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इतने पढ़े लिखे हैं सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बनने वाले नीतीश कुमार, उनके बेटे ने की है ये पढ़ाई

नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक करियर की आधारशीला 70 के दशक में ही रख दी थी, जब वो बी.टेक की पढ़ाई कर रहे थे। सॉफ्ट-स्पोकेन, तेज और मुखर होने के कारण नीतीश कुमार को जल्द ही लोगों द्वारा पसंद किया जाने लगा।

Nitish Kumar, nitish kumar family, nitish kumar age, nitish kumar cast, Bihar Chief minister Nitish Kumarनीतीश कुमार ने राजनीति पारी की शुरुआत जनता पार्टी से की। 1977 और 80 के विधानसभा चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद की सातवीं बार शपथ लेने जा रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि सातवीं बार बिहार की सत्ता पाने वाले नीतीश कुमार कितने पढ़े लिखे हैं। चलिए हम बताते हैं,  नीतीश कुमार ने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (अब एनआईटी पटना) से बी.टेक. (इलेक्ट्रिकल) की डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने बिहार स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में नौकरी करनी शुरू कर दी, इसके बाद वह राजनीति में आ गए। राजनीति और लाइमलाइट से दूर रहने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। निशांत कुमार का राजनीति के बजाय आध्यात्म की तरफ ज्यादा रुझान है।

नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को पटना से 35 किलोमीटर दूर बख्त‍ियारपुर में हुआ था। नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक करियर की आधारशीला 70 के दशक में ही रख दी थी, जब वो बी.टेक की पढ़ाई कर रहे थे। पढ़ाई के दौरान ही नीतीश जय प्रकाश नरायण के आंदोलन से जुड़ गए। जय प्रकाश नरायण ही नीतीश के मार्गदर्शक थे। सॉफ्ट-स्पोकेन, तेज और मुखर होने के कारण नीतीश कुमार को जल्द ही लोगों द्वारा पसंद किया जाने लगा।

नीतीश कुमार की पत्नी का नाम मंजू सिन्हा है जो कि एक स्कूल टीचर थीं। उनका 2007 में देहांत हो गया था। लहरों के विपरीत चलना नीतीश का इतिहास रहा है। साल 1977 में जब जनता पार्टी के सभी दिग्गज मसलन राम विलास पासवान और लालू प्रसाद यादव लोकसभा चुनाव जीत रहे थे, उस वक्त नीतीश कुमार हरनौत से विधानसभा चुनाव तक नहीं जीत सके थे। नीतीश कुमार ने राजनीति पारी की शुरुआत जनता पार्टी से की। 1977 और 80 के विधानसभा चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, 1985 में पहली बार विधायक बने। साल 1987 में उन्हें युवा लोक दल का अध्यक्ष बना दिया गया। बाद में साल 1989 में जनता दल के सचिव-जनरल के रूप में उनकी पदोन्नति हुई।

1990 में देश की राजनीति में कदम रखा और केंद्र में राज्यमंत्री बने। जनता पार्टी के टूटने के बाद नीतीश ने समता पार्टी के साथ गए लेकिन 1995 में हुए चुनाव में पार्टी को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। नीतीश कुमार पहली बार बिहार के विधायक साल 2000 में बने लेकिन पहली सरकार महज सात दिन चली और फिर गिर गयी। नीतीश कुमार केंद्र में वापस चले गए। नवंबर 2005 में फिर बिहार में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने। तब नीतीश के साथ बीजेपी थी।

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