भारत में अधिकतर पैरेंट्स का सपना होता है कि वह अपने बच्चे को डॉक्टर बनाए, लेकिन सरकारी कॉलेजों में सीमित सीटें और प्राइवेट कॉलेजों की आसमान छूती फीस कई बार इस सपने के आगे दीवार बन जाती है। ऐसे में छात्र विदेश में जाकर एमबीबीएस की पढ़ाई करने का ऑप्शन तलाशते हैं। विदेशों में छात्रों के लिए इसके कई विकल्प भी हैं। भारत के बाहर जिन देशों में सबसे अधिक भारतीय एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए जाते हैं उनमें जर्मनी, रूस, कजाकिस्तान, फिलीपींस और चीन जैसे देशों का नाम शामिल है। यहां MBBS की पढ़ाई का खर्च भारत के मुकाबले काफी कम आता है। इस आर्टिकल में हम आपको चीन से MBBS की पढ़ाई के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे।
भारतीयों के लिए नया ‘मेडिकल डेस्टिनेशन’ बना चीन
पिछले कुछ सालों में हमारा पड़ोसी मुल्क भारतीय छात्रों के लिए नया ‘मेडिकल डेस्टिनेशन’ बनाकर उभरा है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, वर्ल्ड-क्लास यूनिवर्सिटी और किफायटी फीस स्ट्रक्चर की वजह से हर साल हजारों भारतीय छात्र डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए चीन जाते हैं। अगर आप भी चीन जाकर MBBS की पढ़ाई करने का विचार कर रहे हैं तो यह आर्टिकल आपके काम का है। इस आर्टिकल में हम आपको चीन में MBBS की पढ़ाई का खर्चा, एडमिशन का तरीका और करियर स्कोप के बारे में बताएंगे।
दुनिया में कहां-कहां सस्ती है MBBS की पढ़ाई, भारत आकर नौकरी के लिए क्या करना होता है?
चीन में 6 साल का होता है MBBS का कोर्स
भारत में या अन्य कई देशों में एमबीबीएस की पढ़ाई 5 साल की ही होती है, लेकिन चीन में आपको इस पढ़ाई के लिए 6 साल देने होते हैं। चीन में लगभग सभी देशों की तरह मेडिकल का यह कोर्स अंडरग्रेजुएट लेवल का ही होता है, लेकिन यहां आपको 5 की जगह 6 साल का समय देना होता है और ऐसा इसलिए क्योंकि पढ़ाई तो 5 साल की ही होती है, लेकिन उस पढ़ाई के बाद आपको 1 साल की इंटर्नशिप या ट्रेनिंग चीन में ही रहकर पूरी करनी होती है और यह इस पढ़ाई का अनिवार्य हिस्सा है। चीन में मेडिकल कोर्स की कुल अवधि 6 साल (5+1) होती है जिसमें 5 साल थ्योरी और 1 साल का प्रैक्टिकल शामिल है। आखिरी का 1 साल किसी मान्यता प्राप्त अस्पताल में इंटर्नशिप के रूप में देना होता है।
कैसे मिलता है एडमिशन?
भारत में जैसे मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए नीट एग्जाम देना होता है उसी तरह चीन में भी एमबीबीएस में एडमिशन के लिए छात्रों को गाओकाओ (Gaokao) नाम की मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास करनी होती है। इस एग्जाम को दुनिया के सबसे कठिन एग्जाम में से एक माना जाता है। हर साल इस प्रवेश परीक्षा में 1 करोड़ से अधिक उम्मीदवार बैठते हैं। हालांकि भारत में NEET क्वालिफाई करने वाले स्टूडेंट्स चीन में डायरेक्ट एमबीबीएस में एडमिशन ले सकते हैं। अगर आपने नीट पास नहीं की है तो आपको फिर गाओकाओ एग्जाम देना होगा।
गाओकाओ या फिर नीट पास करने के बाद स्टूडेंट्स को सीधे यूनिवर्सिटी की वेबसाइट या रजिस्टर्ड कंसल्टेंट्स के जरिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। चीन के शिक्षा मंत्रालय (MOE) की तरफ से स्वीकृत 45 टॉप मेडिकल कॉलेज हैं, जो अंग्रेजी माध्यम में MBBS कराते हैं।
बता दें कि चीन में विदेशी स्टूडेंट्स के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी ही होता है। हालांकि, इस पढ़ाई के दौरान स्टूडेंट्स कोबेसिक चीनी भाषा (Mandarin) भी सिखाई जाती है ताकि 1 साल के प्रैक्टिकल के दौरान जब आप चीन में मरीजों से बात करें तो आपको उनसे बातचीत करने में आसानी हो।
चीन में एमबीबीएस कोर्स की फीस कितनी होती है?
चीन से डॉक्टरी की पढ़ाई भारत के मुकाबले तो सस्ती है। वैसे तो चीन में इस कोर्स की फीस अलग-अलग यूनिवर्सिटी पर निर्धारित करती है, लेकिन चीन में इस पढ़ाई का अनुमानित खर्चा 20 से 40 लाख रुपए आ जाता है। इसमें छात्रों का रहने-खाने का खर्चा भी शामिल है।
डिग्री के बाद प्रैक्टिस कैसे करें?
चीन से मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे डॉक्टर के रूप में इंडिपेंडेंट प्रैक्टिस नहीं की जा सकती। इसके लिए वहां कुछ नियम तय हैं। चीन में प्रैक्टिस के लिए वहां की NMLE (National Medical Licensing Examination) परीक्षा पास करनी होगी। यह परीक्षा चीनी भाषा (Mandarin) में होती है और इसे पास करने के बाद डॉक्टरी का लाइसेंस मिलता है। वहीं भारत में प्रैक्टिस के लिए नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) के नियमों के अनुसार FMGE/NExT परीक्षा पास करनी होगी। इसे क्लियर करने के बाद ही भारत में डॉक्टर के तौर पर रजिस्ट्रेशन मिलेगा।
चीन में डॉक्टर की सैलरी कितनी होती है?
चीन में डॉक्टर की सैलरी इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस शहर में है और किस अस्पताल में है। हालांकि फिर भी चीन में जूनियर डॉक्टर या इंटर्न की शुरुआती सैलरी लगभग RMB 5,000 से RMB 8,000 प्रति माह (लगभग 60,000 से 1,00,000 रुपये) होती है। जैसे-जैसे आपका एक्सपीरियंस बढ़ेगा आपकी सैलरी भी बढ़ती जाएगी। पोस्ट-ग्रेजुएशन (MD/MS) कर लेने के बाद यही सैलरी 2 लाख से 5 लाख रुपये प्रति माह या सालाना 15 लाख से 25 लाख रुपये तक आसानी से पहुंच जाती है।
