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विषय संयोजन के मुताबिक आएंगी बीए प्रोग्राम की कटऑफ

दाखिले के लिए डीयू की स्थायी समिति के सदस्य डॉक्टर रसाल सिंह ने बताया कि ग्रामीण परिवेश में रहने वाले और सरकारी स्कूलों से पढ़े विद्यार्थियों को अधिक मौके देने के उद्देश्य से इस बार इन दोनों ही श्रेणियों के विद्यार्थियों को कटआॅफ में एक फीसद की छूट दी जाएगी।

डीयू की ओर से इस संबंध में सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश भेज दिए गए हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की दाखिला प्रक्रिया को शुरू होने में पिछले साल की तुलना में देरी हो चुकी है। इस बार दाखिला प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं। इसके तहत एक महत्त्वपूर्ण बदलाव यह है कि सभी कॉलेज बीए प्रोग्राम की विषय संयोजन (कॉम्बीनेशन) के हिसाब से अलग-अलग कटआॅफ जारी करेंगे। डीयू की ओर से इस संबंध में सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश भेज दिए गए हैं।

डीयू के दक्षिण परिसर के आत्मा राम सनातन धर्म (एआरएसडी) कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर ज्ञानतोष कुमार झा ने बताया कि पिछले साल तक हम बीए प्रोग्राम की सिर्फ एक ही कटआॅफ जारी करते थे, लेकिन इस बार विश्वविद्यालय की ओर से हमें सूचित किया गया है कि बीए प्रोग्राम की विषय संयोजन के हिसाब से अलग-अलग कटआॅफ तैयार करनी है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की सूचना के बाद हमने अपने स्तर पर इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। उन्होंने बताया कि जैसे मान लीजिए कोई विद्यार्थी बीए प्रोग्राम राजनीतिक शास्त्र में दाखिला लेना चाहता है तो हम उसके लिए अलग-अलग विषय संयोजन के हिसाब से कटआॅफ जारी करेंगे। डीयू के एक अधिकारी के मुताबिक पहले भी कुछ कॉलेज इस तरह से कटआॅफ जारी करते रहे हैं लेकिन इस बार सभी कॉलेजों को इस नियम को लागू करना होगा।

ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थियों को एक फीसद की छूट
दाखिले के लिए डीयू की स्थायी समिति के सदस्य डॉक्टर रसाल सिंह ने बताया कि ग्रामीण परिवेश में रहने वाले और सरकारी स्कूलों से पढ़े विद्यार्थियों को अधिक मौके देने के उद्देश्य से इस बार इन दोनों ही श्रेणियों के विद्यार्थियों को कटआॅफ में एक फीसद की छूट दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इससे गरीबों के बच्चों को दाखिले के अधिक मौके मिल पाएंगे। डीयू की स्थायी समिति ने इस पर निर्णय कर लिया है और उसे विद्वत परिषद (एसी) को भेज दिया है।
वार्ड कोटे को बढ़ाने की मांग

डॉक्टर रसाल सिंह ने बताया कि स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में शिक्षकों और गैर शिक्षकों के लिए जो वार्ड कोटा लागू है, वह बहुत सालों से नहीं बढ़ाया गया है जबकि ओबीसी और ईडब्लूएस कोटे को लागू होने के बाद डीयू में बड़ी संख्या में सीटों में इजाफा हुआ है। उन्होंने बताया कि हमने विश्वविद्यालय से मांग की है कि वार्ड कोटे को तुरंत बढ़ाया जाए और इतना ही इस कोटे को स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रमों में भी लागू किया जाए।

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