कल्पना कीजिए, कोई व्यक्ति अपनी भाषा, संस्कृति, पहचान या स्वाभिमान की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा है। वह केवल अपने अस्तित्व की नहीं, बल्कि अपनी पहचान और सम्मान की बात कर रहा है। यही भाव ‘अस्मिता’ में समाहित है। ‘अस्मिता’ सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज या समुदाय के आत्मबोध, गौरव और अस्तित्व की चेतना को व्यक्त करने वाला शब्द है।

जनसत्ता.कॉम की ‘सही हिंदी’ मुहिम का उद्देश्य हिंदी भाषा की शुद्धता, सुंदरता और व्याकरणिक समझ को आम पाठकों तक सरल रूप में पहुंचाना है। साथ ही ऐसे शब्दों का प्रयोग, जिनका हम दैनिक जीवन में करते हैं, लेकिन उनके सही अर्थ और संदर्भ को लेकर स्पष्टता कम होती है। यह पहल बोले और लिखे जाने वाले शब्दों के सही रूप, अर्थ, उच्चारण और व्याकरण को समझाकर भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास है। आज की कड़ी का शब्द ‘अस्मिता’ है।

अस्मिता का अर्थ

  • संस्कृत मूल का यह शब्द गहरी वैचारिक और भावनात्मक अर्थ रखता है। अस्मिता का अर्थ पहचान, आत्मबोध, अस्तित्व की चेतना और स्वाभिमान है।
  • इसकी बनावट बहुत ही रोचक है। संस्कृत में ‘अस्मि’ का अर्थ ‘मैं हूं’ होता है। वहीं ता भाववाचक संज्ञा बनाने वाला प्रत्यय है। अर्थात अस्मिता का अर्थ ‘मेरे होने का भाव’ या ‘निजता’ है।
  • इसी भाव से बना ‘अस्मिता’ शब्द व्यक्ति या समूह की उस पहचान को व्यक्त करता है, जो उसे विशिष्ट बनाती है।
  • आधुनिक समाजशास्त्र, साहित्य और पत्रकारिता में ‘अस्मिता’ का प्रयोग हमेशा एक सकारात्मक और सशक्त ‘पहचान’ के रूप में ही किया जाता है।

शब्द का महत्व

‘अस्मिता’ शब्द का प्रयोग साहित्य, समाजशास्त्र, राजनीति और संस्कृति के संदर्भों में व्यापक रूप से होता है। जब हम ‘भाषाई अस्मिता’, ‘सांस्कृतिक अस्मिता’ या ‘नारी अस्मिता’ की बात करते हैं तब उसका अर्थ किसी समूह की पहचान, सम्मान और अधिकारों की चेतना से होता है। यह शब्द सिर्फ भाषा ही नहीं, बल्कि संस्कृति के प्रति जागरूकता और गर्व को भी दर्शाता है।

उदाहरण

  • भाषा किसी भी समाज की अस्मिता का महत्वपूर्ण अंग होती है।
  • नारी अस्मिता पर आधारित साहित्य समाज को नई दृष्टि देता है।
  • अपनी अस्मिता से समझौता करके पाई गई सफलता का कोई मूल्य नहीं होता।
  • सैनिक हमारी राष्ट्रीय अस्मिता और सीमाओं की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
  • आदिवासी समुदाय अपनी सांस्कृतिक अस्मिता को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
  • वैश्वीकरण के इस दौर में हमें अपनी भाषाई और सांस्कृतिक अस्मिता को बचाए रखना होगा।
  • यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के एक बड़े वर्ग की अस्मिता की लड़ाई है।

समानार्थी शब्द

पहचान, आत्मबोध, स्वाभिमान, अस्तित्व।

अस्मिता शब्द लिखने के दौरान होने वाली गलतियां

कुछ लोग इसे ‘अश्मिता’ लिख देते हैं, जो गलत है। सही शब्द अस्मिता है।

अभिप्राय

‘अस्मिता’ एक ऐसा शब्द है जो व्यक्ति और समाज की पहचान, स्वाभिमान और अस्तित्व की चेतना को व्यक्त करता है। यह हमें अपनी भाषा, संस्कृति और मूल्यों के महत्व को समझने की प्रेरणा देता है। हिंदी की यही विशेषता है- एकक शब्द और अर्थ की पूरी दुनिया।

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