कल्पना कीजिए… आप किसी बैठक की कार्यवाही पढ़ रहे हैं। उसमें लिखा है, इस विषय के अलावा अन्यान्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यहां ‘अन्यान्य’ शब्द यह बताता है कि चर्चा केवल एक विषय तक सीमित नहीं थी, बल्कि कई दूसरे विषय भी उसमें शामिल थे। आधुनिक हिंदी में ‘अन्यान्य’ का प्रयोग अपेक्षाकृत कम होता है। इसकी जगह ‘अन्य’, ‘विभिन्न’, ‘अनेक’ या ‘दूसरे’ अधिक प्रचलित हैं, लेकिन हिंदी और संस्कृत की परंपरा में एक सुंदर शब्द ‘अन्यान्य’ है, जो विविधता और बहुलता का बोध कराता है।

जनसत्ता.कॉम की ‘सही हिंदी’ मुहिम का उद्देश्य हिंदी भाषा की शुद्धता, सुंदरता और व्याकरणिक समझ को आम पाठकों तक सरल रूप में पहुंचाना है। साथ ही ऐसे शब्दों का प्रयोग, जिनका हम प्रतिदिन के जीवन में करते हैं, लेकिन उनके सही अर्थ और संदर्भ को लेकर स्पष्टता कम होती है। यह पहल बोले और लिखे जाने वाले शब्दों के सही रूप, अर्थ, उच्चारण और व्याकरण को समझाकर भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास है। आज की कड़ी का शब्द ‘अन्यान्य’ है।

  • अन्यान्य: अन्य + अन्य
  • अन्य: भिन्न, दूसरा।
  • अर्थात ‘अन्यान्य’ का अर्थ विभिन्न, अनेक, दूसरे-दूसरे या तरह-तरह के, है। यह शब्द किसी एक से अधिक, अलग-अलग प्रकार की वस्तुओं, व्यक्तियों या विषयों की ओर संकेत करता है।

शब्द का महत्व

‘अन्यान्य’ हिंदी और संस्कृत में एक औपचारिक तथा साहित्यिक शब्द है। इसका प्रयोग प्रशासनिक, अकादमिक और साहित्यिक लेखन में अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिलता है। जब किसी सूची, चर्चा या संदर्भ में अनेक अन्य बातों को एक साथ इंगित करना हो, तब ‘अन्यान्य’ शब्द भाषा को संक्षिप्त और प्रभावशाली बना देता है।

समानार्थी शब्द

विभिन्न, अनेक, अन्य, विविध, नाना।

उदाहरण

  • जनसंख्या के मुद्दे पर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्यान्य बुद्धिजीवियोंने अपनी राय व्यक्त की।
  • पुस्तकालय में साहित्य के अलावा इतिहास, विज्ञान और अन्यान्य विषयों पर भी पुस्तकें उपलब्ध हैं।
  • सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के साथ शहर के अन्यान्य प्रतिष्ठित नागरिक भी उपस्थित थे।
  • दशहरे के मेले में खिलौनों, कपड़ों और अन्यान्य घरेलू वस्तुओं की दुकानें सजी हुई थीं।
Meaning of anyanya, definition of the Word anyanya
अन्यान्य शब्द का अर्थ।

अभिप्राय

‘अन्यान्य’ एक ऐसा शब्द है जो विविधता और बहुलता को संक्षिप्त रूप में व्यक्त करता है। यह हमें बताता है कि हिंदी में ऐसे अनेक शब्द हैं, जो कम प्रचलित होने के बावजूद अर्थ की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध हैं। हिंदी की यही विशेषता है। एक शब्द और अर्थ की पूरी दुनिया।

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