आंध्र प्रदेश कोचिंग संस्थान (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2026 के ड्राफ्ट जारी होने के बाद राज्य में निजी कोचिंग संस्थानों की गतिविधियों में बड़े बदलाव की तैयारी है। आंध्र प्रदेश सरकार ने इन प्रस्तावित नियमों के जरिए छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और शैक्षणिक दबाव को कम करने पर जोर दिया है।

राज्य के मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने ड्राफ्ट नियम जारी करते हुए आम जनता से सुझाव मांगे हैं और कहा है कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों का समग्र विकास और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना है।

क्या हैं Andhra Pradesh Coaching Rules 2026 ड्राफ्ट नियमों की मुख्य बातें?

स्कूल समय में कोचिंग पर रोक, रोजाना 5 घंटे की सीमा

ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, मान्यता प्राप्त स्कूल या जूनियर कॉलेज के निर्धारित समय के दौरान कोचिंग कक्षाएं नहीं चलेंगी और नियमित स्कूल/जूनियर कॉलेज में नामांकित छात्र उसी समय में कोचिंग नहीं कर सकेंगे।

कोचिंग की अधिकतम अवधि 5 घंटे प्रतिदिन तय की गई है, जिसके साथ रविवार को अनिवार्य रुप से अवकाश रहेगा। साप्ताहिक टेस्ट इस तरह आयोजित किए जाएं कि छुट्टियों के आसपास अतिरिक्त तनाव न बने। छात्रों के अंक और रैंक सार्वजनिक करने पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही सार्वजनिक रूप से छात्र की रैंक, अंक या नाम नोटिस बोर्ड या वेबसाइट पर प्रदर्शित नहीं किए जा सकेंगे।

परिणाम केवल छात्र और अभिभावकों को निजी रूप से बताए जाएंगे और कमजोर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। संस्थानों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग देना अनिवार्य होगा, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक शर्मिंदगी और अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को रोकना है।

हर संस्थान में वेलनेस सेल और मानसिक स्वास्थ्य जांच अनिवार्य

ड्राफ्ट नियमों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें हर कोचिंग संस्थान को, स्थानीय अस्पताल या मनोवैज्ञानिक से एमओयू कर वेलनेस सेल स्थापित करना होगा और प्रवेश के 30 दिनों के भीतर अनिवार्य रुप से छात्र के मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग करनी होगी।

पीयर मेंटरशिप प्रोग्राम चलाना होगा, जिसमें हर महीने अभिभावकों के साथ डी-स्ट्रेस वर्कशॉप आयोजित करनी होगी और निर्धारित साइकोमेट्रिक आकलन कराना होगा। इस दौरान छात्रों के मनोवैज्ञानिक रिकॉर्ड पूरी तरह गोपनीय रखे जाएंगे और केवल अधिकृत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या संस्थान प्रमुख ही उन्हें देख सकेंगे।

हर महीने जिला स्तर पर रिपोर्ट देना अनिवार्य

संस्थानों को, मंथली वेलनेस रिपोर्ट के साथ वार्षिक मेंटल हेल्थ ऑडिट रिपोर्ट को जिला स्तरीय निगरानी समिति के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए जमा करनी होगी। इन रिपोर्टों में जो डेटा शामिल होगा उसमें, कितनी काउंसलिंग हुई, कितने छात्रों को मनोचिकित्सक के पास भेजा गया, मुख्य तनाव कारक (जैसे पढ़ाई का दबाव, घर की याद आदि) और स्टाफ और अभिभावकों के लिए आयोजित जागरूकता कार्यक्रम की जानकारी शामिल होगी।

वेबसाइट पर अनिवार्य खुलासे, फर्जी दावों पर रोक

हर कोचिंग संस्थान के लिए कार्यशील वेबसाइट अनिवार्य होगी, जिस पर निम्न जानकारी देनी होगी, जिसमें प्रत्येक शिक्षक की शैक्षणिक योग्यता, कक्षा और हॉस्टल में प्रति छात्र उपलब्ध क्षेत्रफल, फीस स्ट्रक्चर और रिफंड पॉलिसी, पिछले तीन वर्षों का वास्तविक सफलता प्रतिशत, कुल नामांकन और चयनित छात्रों की संख्या शामिल होगी। इससे इससे भ्रामक विज्ञापनों और बढ़ा-चढ़ाकर किए जाने वाले दावों पर रोक लगेगी।

10 दिन में फीस रिफंड, गैर-वापसी क्लॉज अमान्य

ड्राफ्ट के अनुसार, अगर कोई छात्र बीच में कोर्स छोड़ता है तो, संस्थान को बची हुई फीस प्रो-राटा आधार पर 10 दिनों के भीतर लौटानी होगी। इस दौरान “फीस नॉन-रिफंडेबल” जैसी शर्तें अमान्य मानी जाएंगी।

फीस वसूली के लिए छात्रों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र रोकना प्रतिबंधित रहेगा और इस प्रावधान को अभिभावकों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों को ध्यान में रखकर जोड़ा गया है।