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हाईकोर्ट पहुंचा उत्तर प्रदेश दरोगा भर्ती का मामला, राज्य सरकार और भर्ती बोर्ड से तीन हफ्तों में मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दरोगा भर्ती परीक्षा निरस्त कर देने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड से 3 सप्ताह में जवाब देने को कहा है।

परीक्षा निरस्त होने के बाद पंकज जायसवाल तथा अन्य ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दरोगा भर्ती परीक्षा निरस्त कर देने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड से 3 सप्ताह में जवाब देने को कहा है। 29 जनवरी 2018 को आंसर की को लेकर आई आपत्तियों के आधार पर परीक्षा निरस्त कर देने के खिलाफ पंकज जायसवाल और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता कर रहे हैं। ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड ने उपनिरीक्षक गोपनीय, सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) के 609 पद और कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड ए के 666 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था।

13 सितंबर 2017 को दोनों भर्तियों के लिए ऑनलाइन परीक्षा हुई। इसके बाद 21 सितंबर को प्रश्नपत्र की आंसर की भी जारी कर दी गई। आंसर की को लेकर कुछ अभ्यर्थियों की आपत्ति के बाद उसमें संशोधन भी किया गया। संशोधन के बाद 13 नवंबर को संशोधित आंसर की जारी की गई। बाद में आंसर की पर आई इन आपत्तियों को सही ठहराते हुए 29 जनवरी 2018 को परीक्षा को निरस्त कर दिया गया। इस बाबत कहा गया कि उत्तर कुंजी को लेकर जो आपत्ति दर्ज कराई गई है वह सही है और इससे परीक्षा की पारदर्शिता प्रभावित होगी।

परीक्षा निरस्त होने के बाद पंकज जायसवाल तथा अन्य ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। याचिका में कहा गया है कि हर तरह की भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की आंसर की जारी की जाती है। ऐसे में सिर्फ आंसर की में गड़बड़ी के आधार पर परीक्षा निरस्त करना सही नहीं है। इस मामले में अभी कोर्ट राज्य सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड के जवाबों का इंतजार करेगी। दोनों के जवाब दाखिल करने के बाद कोर्ट इस मसले पर कुछ महत्वपूर्ण फैसला दे सकती है।

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