भारत का उच्च शिक्षा क्षेत्र लगातार अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित कर रहा है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) 2023-24 के मुताबिक, देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों की संख्या पिछले एक दशक में करीब 47 प्रतिशत बढ़ गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में 173 देशों के 58,134 विदेशी छात्र भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं 2013-14 में यह संख्या 39,517 थी और छात्र 158 देशों से आए थे। यानी भारत न केवल अधिक विदेशी छात्रों को आकर्षित कर रहा है, बल्कि अब अधिक देशों के विद्यार्थी भी यहां पढ़ाई के लिए आ रहे हैं।
कर्नाटक बना सबसे पसंदीदा राज्य
AISHE रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक विदेशी छात्रों की पहली पसंद बना हुआ है। हालांकि, पिछले दशक की तुलना में वहां पढ़ने वाले विदेशी छात्रों की संख्या कम हुई है। वहीं पंजाब ने बड़ी छलांग लगाते हुए तमिलनाडु को पीछे छोड़ दिया है और विदेशी छात्रों की मेजबानी करने वाला दूसरा सबसे बड़ा राज्य बन गया है।
2023-24 में विदेशी छात्रों की मेजबानी करने वाले शीर्ष 5 राज्य
| रैंक | राज्य | विदेशी छात्र |
| 1 | कर्नाटक | 7,914 |
| 2 | पंजाब | 7,902 |
| 3 | महाराष्ट्र | 6,190 |
| 4 | उत्तर प्रदेश | 5,953 |
| 5 | तमिलनाडु | 5,694 |
10 साल पहले कैसी थी स्थिति?
2013-14 में भी कर्नाटक पहले स्थान पर था, लेकिन उसके बाद का क्रम अलग था।
| रैंक | राज्य | विदेशी छात्र |
| 1 | कर्नाटक | 13,903 |
| 2 | तमिलनाडु | 5,460 |
| 3 | महाराष्ट्र | 5,006 |
| 4 | उत्तर प्रदेश | 2,816 |
| 5 | पंजाब | 2,157 |
इस तुलना से साफ है कि पिछले 10 वर्षों में पंजाब ने विदेशी छात्रों को आकर्षित करने में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की है, जबकि तमिलनाडु दूसरे स्थान से पांचवें स्थान पर खिसक गया।
नेपाल अब भी सबसे बड़ा स्रोत देश
रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल भारत में पढ़ने आने वाले विदेशी छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत देश बना हुआ है। हालांकि शिक्षा मंत्रालय ने इस रिपोर्ट में अन्य देशों के विस्तृत आंकड़े साझा नहीं किए हैं।
बढ़ा उच्च शिक्षा का अंतरराष्ट्रीयकरण
विदेशी छात्रों की बढ़ती संख्या को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की नीति का भी परिणाम माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दुनिया की प्रतिष्ठित विदेशी यूनिवर्सिटियों को यहां कैंपस खोलने की अनुमति दी है। इनमें ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोप के कई संस्थानों को यूजीसी (UGC) के नियमों के तहत मंजूरी मिली है।
भारतीय संस्थान के विदेशों में कैंपस
भारत केवल विदेशी छात्रों को आकर्षित ही नहीं कर रहा, बल्कि अपने प्रमुख संस्थानों का वैश्विक विस्तार भी कर रहा है, जिसमें इन संस्थानों ने विदेशों में अपने कैंपस शुरू किए हैं।
आईआईटी दिल्ली ने 2024 में अबू धाबी में अपना कैंपस शुरू किया।
आईआईएम अहमदाबाद ने दुबई में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय कैंपस खोला।
आईआईटी मद्रास तंजानिया में विदेशी कैंपस खोलने वाला पहला IIT बना।
हाल ही में सरकार ने आईआईएम बेंगलुरु के इंडोनेशिया में कैंपस स्थापित करने की घोषणा की है।
इन पहलों का उद्देश्य भारत को वैश्विक उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनाना है।
