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अब CBSE स्कूलें भी होंगी कैशलेस, नगद नहीं ऑनलाइन माध्यम से जमा करनी होगी फीस

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अपने सभी स्कूलों से कहा है कि वो जनवरी से शुरू होने वाले नए साल से स्टूडेंट्स से सिर्फ ऑनलाइन या किसी भी नॉन कैश मोड में फीस लें।

स्कूलों को जारी किए गए लेटर में सीबीएसई के सेक्रेटरी जोसफ इमैनुअल ने कहा है कि कैशलेस ट्रांजेक्शन के कई फायदे हैं और स्कूलों को सभी लेन-देन इसी मीडियम से करनी चाहिए।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अपने सभी स्कूलों से कहा है कि वो जनवरी से शुरू होने वाले नए साल से स्टूडेंट्स से सिर्फ ऑनलाइन या किसी भी नॉन कैश मोड में फीस लें। स्कूलों को जारी किए गए लेटर में सीबीएसई के सेक्रेटरी जोसफ इमैनुअल ने कहा है कि कैशलेस ट्रांजेक्शन के कई फायदे हैं और स्कूलों को सभी लेन-देन इसी मीडियम से करनी चाहिए। स्कूलों को फीस के अलावा बाकी सर्विस, कॉन्ट्रैक्ट में रखे गए वर्कर्स को सैलरी देने और बाकी तरह के ट्रांजेक्शन के लिए भी नॉन कैश मोड का इस्तेमाल करना चाहिए। बोर्ड ने कहा है कि स्कूल पैरंट्स टीचर्स मीटिंग में इसे लेकर जागरूकता फैलाने के लिए पैरंट्स से बातचीत करें।

बोर्ड ने सभी स्कूलों को कहा है कि सीबीएसई ने ई-पेमेंट फैसिलिटी शुरू कर दी है। एग्जामिनेशन फीस, ऐफिलिएशन और बाकी एक्टिविटीज के पेमेंट के लिए ई-पेमेंट मीडियम का इस्तेमाल किया जाएगा। बोर्ड ने अपने सभी एफिलिएटेड स्कूलों से कहा है कि वे जनवरी 2017 से सभी स्टूडेंट्स से कैश ट्रांजेक्शन के बजाय सिर्फ ऑनलाइन मीडियम या नॉन कैश मोड के जरिए फीस लें। साथ ही, सीनियर स्टूडेंट्स को उनके पड़ोस में कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए प्रमोशनल एक्टिविटी करने के लिए जागरूक करें।

बोर्ड ने कहा है कि स्कूल इसे लेकर वर्कशॉप, सेमिनार, स्लोगन राइटिंग, ऐसे राइटिंग जैसे कॉम्पिटिशन भी करवा सकते हैं। पत्र में कहा गया है कि स्कूल अपने छात्रों को कैशलेस लेन-देन के फायदे बनाएं और उन्हें इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें। नोटबंदी के बाद से कई स्कूलों ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है। कुछ ने स्वाइप मशीन भी मंगाई है। भारत की स्कूली शिक्षा का एक प्रमुख बोर्ड है। भारत के अन्दर और बाहर के बहुत से निजी विद्यालय इससे सम्बद्ध हैं। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं – शिक्षा संस्थानों को अधिक प्रभावशाली ढंग से लाभ पहुंचाना, उन विद्यार्थियों की शैक्षिक आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी होना जिनके माता-पिता केन्द्रीय सरकार के कर्मचारी हैं और निरंतर स्थानान्तरणीय पदों पर कार्यरत हों। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में शिक्षा का माध्यम हिन्दी या अंग्रेजी हो सकता है।

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