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BHU के बाद अब पंजाब यूनिवर्सिटी ने भी किया JNU आंदोलन का समर्थन

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), स्टूडेंट्स फॉर सोसाइटी (SFS) और पंजाब स्टूडेंट यूनियन (PSU) के छात्र नेताओं ने आज सुबह नारों के साथ यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन किया।

Author Updated: November 15, 2019 2:30 PM
फोटो सोर्स: इंडियन एक्‍सप्रेस

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में चल रहे छात्र आंदोलन के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए चार पंजाब विश्‍वविद्यालय के चार राजनीतिक दलों के छात्रों ने गुरुवार सुबह विश्वविद्यालय के छात्र केंद्र पर धरना प्रदर्शन किया और JNU में हुए हॉस्टल शुल्‍क और मेस सिक्‍योरिटी शुल्‍क में भारी वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन किया। JNU में लंबे समय से इन फीस में हुई भारी बढ़ोत्‍तरी के विरोध में छात्र-छात्राएं प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी JNU छात्र आंदोलन का समर्थन किया था।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), स्टूडेंट्स फॉर सोसाइटी (SFS) और पंजाब स्टूडेंट यूनियन (PSU) के छात्र नेताओं ने आज सुबह नारों के साथ यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन किया। SFI के उद्धवन ने कहा, ‘मैं रोजाना खबरें देखता हूं, जहां लोग यह तर्क करते हैं कि जेएनयू के छात्रों को हॉस्टल फीस के रूप में 300 रुपये देने में क्‍या दिक्‍कत है। मैं कहता हूं कि एक छात्र, जिसके माता-पिता प्रति दिन 20 से 30 रुपये कमाते हैं, वह अकेले हॉस्टल फीस के लिए 300 रुपये का भुगतान कैसे कर सकता है?”

जेएनयू में विरोध प्रदर्शन 28 अक्टूबर को शुरू हुआ, जब विश्वविद्यालय में छात्रावास शुल्क और अन्य शुल्क में लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सिंगल ऑक्यूपेंसी रूम की फीस 20 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये की गई, जबकि डबल ऑक्यूपेंसी रूम की फीस 10 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दी गई। इसके अलावा, रिफंडेबल वन-टाइम सिक्योरिटी फीस 5,500 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये कर दी गई।

छात्रों के आंदोलन के बाद गुरुवार को, JNU कार्यकारी परिषद ने आंशिक रूप से फीस वृद्धि को वापस ले लिया और EWS श्रेणी से संबंधित छात्रों को 50 प्रतिशत रियायत का प्रस्ताव दिया। हालाँकि, छात्रों ने इस रोल बैक निर्णय को ‘नौटंकी’ कहते हुए अपना विरोध जारी रखा। इस बीच, पीयू में भी छात्र बढ़ती फीस और गैर-जिम्मेदार शिक्षा के संबंध में अपने स्वयं के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। छात्र अमनजीत ने कहा, “हर सरकारी शिक्षण संस्थान को एक ही खतरा है। हमें एकजुटता के साथ खड़े होना चाहिए, ऐसा न हो कि हम बाद में जेएनयू की तरह ही तकलीफ सहें।”

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