कल्पना कीजिए… एक छोटा बच्चा पहली बार दुनिया को अपनी नजरों से देख रहा है। उसे छल-कपट का ज्ञान नहीं, न ही अच्छे-बुरे का पूरा बोध। वह हर किसी पर सहज विश्वास कर लेता है और मासूमियत से हर बात कह देता है। ऐसी स्थिति को व्यक्त करने के लिए हिंदी में एक सुंदर और अर्थपूर्ण शब्द ‘अबोध’ है।

यह एक बहुत ही सरल, कोमल और साहित्यिक शब्द है। इसका प्रयोग अक्सर बचपन की मासूमियत या अज्ञानता को दर्शाने के लिए किया जाता है। ‘अबोध’ केवल भोलेपन का पर्याय नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति या अवस्था का बोध कराता है, जिसमें अनुभव, ज्ञान या समझ का अभाव हो।

जनसत्ता.कॉम की ‘सही हिंदी’ मुहिम का उद्देश्य हिंदी भाषा की शुद्धता, सुंदरता और व्याकरणिक समझ को आम पाठकों तक सरल रूप में पहुंचाना है। साथ ही ऐसे शब्द, जिनका प्रयोग हम प्रतिदिन की जिंदगी में करते हैं, लेकिन उनके सही अर्थ और सही संदर्भ को लेकर स्पष्टता कम होती है। यह पहल बोले और लिखे जाने वाले शब्दों के सही रूप, अर्थ, उच्चारण और व्याकरण को समझाकर भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास है। आज की कड़ी का शब्द ‘अबोध’ है।

  • अबोध: अ+बोध
  • अ: नहीं, अभाव
  • बोध: ज्ञान, समझ, चेतना।
  • ‘अबोध’ का अर्थ है- जिसे बोध न हो। अर्थात जिसमें पर्याप्त ज्ञान, समझ या अनुभव का अभाव हो।

शब्द का महत्व

‘अबोध’ शब्द का प्रयोग मुख्यतः छोटे बच्चों के लिए किया जाता है, क्योंकि उनमें जीवन के अनुभव और सामाजिक व्यवहार की पूरी समझ विकसित नहीं होती। हालांकि, इसका प्रयोग किसी ऐसे व्यक्ति के लिए भी किया जा सकता है, जो किसी विशेष विषय से पूरी तरह अनजान हो। ध्यान देने वाली बात यह है कि ‘अबोध’ का अर्थ मूर्ख या बुद्धिहीन नहीं होता। यह केवल अनुभव या ज्ञान के अभाव तथा निष्कपटता का संकेत देता है।

उदाहरण

  • छोटे बालकों को सही-गलत या छल-कपट का कोई ज्ञान नहीं होता। उनका अबोध मन हर किसी पर जल्द ही विश्वास कर लेता है।
  • अबोध बालक को दुनिया की चालाकियों का कोई ज्ञान नहीं था। उसकी मुस्कान ने सभी का मन जीत लिया।
  • वह गांव का एक सीधा-सादा इंसान था, जो शहर की चालाकियों से पूरी तरह अबोध था।
  • मेले की भीड़ में खोए उस अबोध बच्चे को देखकर सभी का दिल पसीज गया।

समानार्थी शब्द

भोला, मासूम, अनजान, अज्ञ, निष्कपट।

विलोम शब्द

प्रबुद्ध, ज्ञानी, बुद्धिमान, सचेत।

अभिप्राय

‘अबोध’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि मासूमियत, निष्कपटता और अनुभवहीनता का भाव व्यक्त करता है। यह हमें याद दिलाता है कि ज्ञान और अनुभव समय के साथ प्राप्त होते हैं, जबकि बचपन की अबोधता जीवन की सबसे सुंदर अवस्थाओं में से एक है। हिंदी की यही विशेषता है- एक शब्द और अर्थ की पूरी दुनिया।

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