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इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस: फील्ड विजिट के बिना ही दे दिया दर्जा, कमेटी के अध्यक्ष बोले- नियमों का पालन करता तो 12 महीने लग जाते

इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस के लिए शैक्षणिक संस्थानों के चयन को लेकर नया खुलासा हुआ है। अधिकार प्राप्त समिति ने फील्ड विजिट के बिना ही छह संस्थानों का इसके लिए चयन कर लिया। समिति के अध्यक्ष एन. गोपालास्वामी ने इसके बावजूद कमेटी के तौर-तरीकों का बचाव किया है।

Author नई दिल्ली | July 13, 2018 2:06 PM
जावडेकर ने आइआइटी दिल्ली, आइआइटी बॉम्बे और आइआइएससी बंगलुरु के साथ मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, बिट्स पिलानी और जियो इंस्टीट्यूट को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा मिलने पर बधाई दी।

इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस को लेकर उठा विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। रिलायंस फाउंडेशन के प्रस्तावित जियो इंस्टीट्यूट को देश के छह विशिष्ट शैक्षिक संस्थानों में शामिल करने का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि इस मामले में नया खुलासा हुआ है। ‘इकोनोमिक टाइम्स’ के अनुसार, इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस का चयन करने के लिए गठित विशेषज्ञों की अधिकार प्राप्त समिति (ईईसी) ने फील्ड विजिट किए बिना ही तीन सरकारी और तीन निजी क्षेत्र के संस्थानों को विशिष्ट संस्थान का दर्जा दे दिया। शिक्षण संस्थानों को विशिष्ट का दर्जा देने से पहले ईईसी को 113 संस्थानों की जांच-पड़ताल करनी थी। इसके बावजूद इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस की घोषणा बहुत जल्द कर दी गई। ऐसे में इसके तौर-तरीकों को लेकर भी सवाल उठने लगे थे कि क्या समिति ने सभी 113 संस्थानों के नामों पर विचार कर छानबीन की थी? दरअसल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (सरकारी शैक्षणिक संस्थानों को इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस घोषित करना) दिशा-निर्देश, 2017 के तहत कुछ मानक निर्धारित किए गए हैं। इसके मुताबिक, किसी भी संस्थान को इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस का दर्जा देने से पहले फील्ड विजिट और संबंधित संस्थान की रैंकिंग को ध्यान में रखने का प्रावधान किया गया है। लेकिन, ईईसी ने निर्धारित मानकों का पालन किए बगैर ही छह संस्थानों को इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस का दर्जा दे दिया।

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बचाव में उतरे ईईसी अध्यक्ष: अधिकार प्राप्त समिति के अध्यक्ष एन. गोपालास्वामी ने इंस्टीट्यूशंस ऑफ एमिनेंस के चयन के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का जोरदार बचाव किया है। उन्होंने ईईसी के काम करने के तौर-तरीकों को भी उचित ठहराया है। गोपालास्वामी ने कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करने की स्थिति में पूरी प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाने में एक साल का वक्त लग जाता। ईईसी की रिपोर्ट में संस्थानों का मूल्यांकन करने के तरीकों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। साथ ही विभिन्न पहलुओं पर विचार करने का भी दावा किया गया है। हालांकि, विशेष मानकों और सभी संस्थानों को मूल्यांकन में दिए गए वेटेज या स्कोर के बारे में कोई सूचना नहीं दी गई है। ईईसी की रिपोर्ट में आवेदकों के तुलनात्मक मूल्यांकन का भी उल्लेख नहीं है। बता दें कि ईईसी ने 113 शैक्षिक संस्थानों के आवेदनों पर महज 45-50 दिनों में विचार कर लिया था। विभिन्न संस्थानों द्वारा दिए गए विस्तृत आवेदनों पर 2 अप्रैल से 8 मई तक चर्चा की गई थी। समिति ने मई समाप्त होने से पहले रिपोर्ट भी सौंप दी थी। गोपालास्वामी ने ईईसी द्वारा अपनाए गए तरीकों का बचाव करते हुए बताया कि फील्ड विजिट अनिवार्य नहीं है और समिति तुलनात्मक रैंकिंग को निष्पक्ष नहीं मानती है।

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