Jharkhand Recruitment Exam 2026: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने JSSC-CGL समेत कुल 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। साथ ही वर्ष 2014 से अब तक आयोजित 17 भर्ती परीक्षाओं की जांच CID को सौंपने का फैसला किया गया है। सरकार का यह कदम भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और परीक्षा की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों के बीच आया है।

हालांकि, सरकार के फैसले से उन अभ्यर्थियों में नाराजगी पैदा हो गई है, जिन्होंने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा पास कर ली थी और नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर सरकारी नौकरी हासिल कर चुके थे। करीब 2,000 चयनित अभ्यर्थी अब परीक्षा रद्द किए जाने के विरोध में सामने आए हैं और उनका सवाल है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो उसकी सजा उन उम्मीदवारों को क्यों दी जाए, जिन्होंने अपनी मेहनत से परीक्षा पास की है।

JSSC-CGL समेत 22 परीक्षाओं पर बड़ा फैसला

झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर उठे सवालों के बीच जेएसएससी-सीजीएल सहित 22 परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। यह फैसला उन छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद आया है, जो भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, अनियमितता और परीक्षा संचालन में गड़बड़ी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। सरकार ने कहा है कि वर्ष 2014 से हुई परीक्षाओं में सामने आई गलतियों और अनियमितताओं की जांच की जाएगी। इसके लिए 17 परीक्षाओं को सीआईडी जांच के दायरे में रखा गया है।

झारखंड में रद्द की गई 22 भर्ती परीक्षाओं की पूरी लिस्ट

17 भर्ती परीक्षाओं की होगी CID जांच

सरकार का फैसला सिर्फ परीक्षा रद्द करने तक सीमित नहीं है क्योंकि इसमें 2014 के बाद आयोजित 17 भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच भी सीआईडी को सौंपी गई है। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि परीक्षा आयोजित करने, प्रश्नपत्र तैयार करने, परीक्षा संचालन, परिणाम तैयार करने या नियुक्ति प्रक्रिया में कहीं गड़बड़ी तो नहीं हुई। इस मामले में पहले भी जेएसएससी-सीजीएल प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों में राज्य सरकार की ओर से SIT गठित किए जाने की जानकारी सामने आ चुकी है।

झारखंड CID जांच के दायरे में लाई गई परीक्षाओं की लिस्ट

CID की जांच में एक आरोपी द्वारा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने की जानकारी भी सामने आई है, जिसमें JSSC PGT/CGL और JPSC की ACF, FRO, FSO तथा 11वीं और 13वीं संयुक्त सिविल सेवा PT शामिल हैं।

छात्रों के आंदोलन का असर

भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर झारखंड के छात्र कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे, जिसमें छात्रों की प्रमुख मांग थी कि विवादित परीक्षाओं को रद्द किया जाए और भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो। सरकार के फैसले के बाद आंदोलनकारी छात्रों की एक बड़ी मांग पूरी हुई है। हालांकि, आंदोलन से जुड़े नेताओं की ओर से अब भी सीबीआई जांच और परीक्षा प्रणाली में स्थायी सुधार की मांग उठाई जा रही है। इसका सीधा अर्थ है कि, परीक्षा रद्द होने के बावजूद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

अब चयनित अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ी

परीक्षा रद्द करने के इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा है, जिन्होंने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा पास करके नौकरी हासिल की है। करीब 2,000 सफल उम्मीदवारों को अब अपनी नौकरी के भविष्य की चिंता सता रही है।

इन अभ्यर्थियों का तर्क है कि अगर परीक्षा में किसी स्तर पर अनियमितता हुई भी है तो उसकी जांच दोषियों के खिलाफ होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया है कि बिना किसी व्यक्तिगत गलती के सफल उम्मीदवारों की नियुक्ति क्यों प्रभावित की जा रही है? इसी मांग को लेकर चयनित उम्मीदवारों ने विरोध प्रदर्शन किया है।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

झारखंड सरकार के लिए यह फैसला आसान नहीं है क्योंकि एक तरफ हजारों अभ्यर्थी भर्ती परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ परीक्षा पास कर चुके उम्मीदवारों का भविष्य दांव पर लग गया है। अगर जांच में गड़बड़ी साबित होती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी होगी लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ईमानदारी से परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों के साथ अन्याय न हो।

सिर्फ परीक्षा रद्द करने से खत्म नहीं होगा विवाद

जेएसएससी-सीजीएल और अन्य परीक्षाओं को रद्द करना सरकार के लिए तत्काल समाधान हो सकता है, लेकिन भर्ती व्यवस्था में छात्रों का भरोसा वापस लाना बड़ी चुनौती होगी। छात्रों की मांग अब सिर्फ पुरानी परीक्षाओं की जांच तक सीमित नहीं है। वे ऐसी लीक-प्रूफ और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था चाहते हैं, जिसमें परीक्षा से लेकर रिजल्ट और नियुक्ति तक किसी भी स्तर पर धांधली की गुंजाइश न रहे, जिसमें छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग उठा रहे हैं।

छात्रों की जीत या अभ्यर्थियों के लिए संकट?

झारखंड में चल रहे आंदोलन के नजरिए से देखें तो परीक्षा रद्द होना आंदोलनकारी छात्रों की बड़ी सफलता है। जिन परीक्षाओं को लेकर छात्र लगातार सवाल उठा रहे थे, सरकार ने आखिरकार उन पर कार्रवाई की है। मगर दूसरी तरफ JSSC-CGL पास कर चुके उम्मीदवारों के लिए यह फैसला गंभीर संकट लेकर आया है। इसलिए अब सरकार की अगली परीक्षा यह होगी कि जांच भी निष्पक्ष हो और मेहनत से नौकरी पाने वाले निर्दोष अभ्यर्थियों के हितों की भी रक्षा हो।