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पुराना, मैला और फट जाने के बाद तिरंगे का क्या किया जाता है?

आजादी के जश्न के बाद जब वह मैले, पुराने और फट जाते हैं, तो उनका क्या किया जाता है। कभी सोचा है...

अपने राष्ट्रीय झंडे को तिरंगा कहते हैं। इसमें नारंगी नहीं बल्कि केसरिया रंग होता है और अशोक चक्र में 24 तीलियां होती हैं। अपने राष्ट्रीय ध्वज के बारे में आप यह जानते होंगे, लेकिन 15 अगस्त बीत जाने के बाद जगह-जगह लहराने वाले झंडों का बाद में क्या होता है।

आजादी के जश्न के बाद जब वह मैले, पुराने और फट जाते हैं, तो उनका क्या किया जाता है। कभी सोचा है। नहीं न, चलिए आज हम आपको इस बारे में बताएंगे। पुराने, मैले और फटे हुए ऐसे झंडों को व्यवस्थित तरीके से निस्तारित किया जाता है।

फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 का क्लॉज़ बताता है –
पार्ट-2, सेक्शन 1-22 (xiii): अगर झंडा फटा-पुरानी अवस्था में है तो किसी निजी जगह पर इसे निस्तारित करना चाहिए। तिरंगे की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए इसे दफनाना या कोई और तरीका अपनाया जा सकता है।

फटे झंडे को जला कर भी उसे निस्तारित किया जा सकता है। आप उसे दफना भी सकते हैं, लेकिन यहां एक मुश्किल होती है। मिट्टी हट जाने से वह दोबारा ऊपर आ सकता है। वह फिर इधर-उधर हवा से जा सकता है और लोगों के पैरों के नीचे पड़ सकता है।

चूंकि आजकल प्लास्टिक के झंडे भी चलन में हैं। लोग 15 अगस्त के दिन अपनी बाइक-कार, घर पर, बच्चों के लिए और स्कूल में कार्यक्रम में साज-सज्जा के लिए ढेरों झंडे मंगा लेते हैं। जश्न बीतने के बाद उनका क्या हश्र होता है। यह बताने की जरूरत नहीं है, इसलिए प्लास्टिक के झंडे जला कर ही निस्तारित किए जाने चाहिए।

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