योगी के खिलाफ विपक्ष का अघोषित मोर्चा

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार के विरुद्ध पूरा विपक्ष लामबंद हो रहा है।

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यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार के विरुद्ध पूरा विपक्ष लामबंद हो रहा है। प्रदेश में अपना अस्तित्व तलाश रही कांग्रेस अपने वजूद को बचाने की कोशिश में लगे दो क्षेत्रीय दल समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी छोटे दलों को साथ लेकर नई कहानी गढ़ने की रणनीति बनाने में जुटे हैं। राष्ट्रीय लोकदल और सुसपा सरीखी पार्टियां भी प्रदेश में विपक्ष की लामबंदी में अपना सियासी लाभ तलाशने की कोशिश में हैं।

उत्तर प्रदेश में पांच सालों से पूर्ण बहुमत से सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी को पूरा विपक्ष घेरने की मुद्रा में है। समाजवादी पार्र्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने दो पूर्व सहयोगियों कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी से मतदाताओं को सतर्क रहने की नसीहत तो दे रहे हैं लेकिन भीतर ही भीतर उन्हें इस बात की उम्मीद है कि यदि 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी बहुमत के करीब न पहुंच सकी तो उनके पूर्व सहयोगी उनका साथ दे सकते हैं। जबकि योगी आदित्यनाथ कोरोना महामारी के दौर में भी पांच सालों की अपनी सरकार के कामकाज को लेकर इत्मीनान में हैं।

प्रदेश में इस समय सियासी दलों के बीच गजब बेचैनी है। कांग्रेस के लिए प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में स्थापित करना चुनौतीपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में दलित और किसान उत्पीड़न की दुहार्ई देने वाली प्रियंका गांधी को मौजूदा भाजपा सरकार छत्तीसगढ़ और राजस्थान में किसानों पर हो रहे किसानों पर अत्याचार की घटनाओं पर घेर रही है। इतना ही नहीं, इन दोनों ही राज्यों में जिस तरह दलितों के उत्पीड़न के मामले लगातार सामने आ रहे हैं उसको आधार बनाकर योगी के मंत्री प्रियंका गांधी से सवाल कर रहे हैं कि वो कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ और राजस्थान में किसानों और दलितों के उत्पीड़न के मसले पर मौन क्यों हैं?

उधर, बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक सप्ताह पूर्व अपने मतदाताओं से ट्विटर के जरिये अपील की हैै कि वो समाजवादी पार्टी से सावधान रहें। बहनजी के इस ट्वीट से जाहिर है कि कहीं न कहीं उनको अपने वोट बैंक को संगठित रखने का संदेश देने की जरूरत इस लिए महसूस हो रही है क्योंकि उन्हें इस बात का पता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद से लगातार उनका मतदाता भाजपा के पाले में जा कर खड़ा हो गया है। साथ ही बहनजी इस बात को भी बखूबी जानती हैं कि समाजवादी पार्टी के साथ उनके गठबंधन के फैसले ने अनुसूचित जाति औैर अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं को बसपा से नाराज किया है।

ऐसा ही हाल समाजवादी पार्टी का भी है। पहले कांग्रेस और उसके तुरंत बाद बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन करने से अपने मतदाताओं में अखिलेश का भरोसा कम हुआ है। जिसका नतीजा वो लोकसभा और विधानसभा चुनाव में देख चुके हैं। बसपा के साथ गठबंधन करने के बाद समाजवादी पार्टी से यादव मतदाता असंतुष्ट नजर आ रहा है। उसकी बड़ी वजह सियासी अदावत है। जिसकी वजह से सपा समर्थकों को हरिजन उत्पीड़न के मामलों का सामना करना पड़ा। जो आज भी वो कर रहे हैं।

कन्नौज में डिम्पल यादव से बहनजी का पांव छुआने से भ्भी यादव मतदाताओं में नाराजगी है। उधर, सुसपा के राम अचल राजभर और राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी समाजवादी पार्र्टी के कंधे पर पांव रखकर अपना सियासी भविष्य सुरक्षित करने की पुरजोर कोशिश में हैं। जो राम अचल और जयंत कल तक समाजवादी पार्टी को भला-बुरा कहते थे, वो आज उनके साथ खड़े हैं। ऐसे में योगी आदित्यनाथ अपनी सरकार के पांच साल के काम के साथ आगामी विधानसभा चुनाव में जनता के बीच होंगे। देखना दिलचस्प होगा कि इस बार के विधानसभा चुनाव में कौन सा सियासी दल उत्तर प्रदेश का मैदान मार पाने में कामयाब होता है।

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