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कॉल ड्राप पर मुआवजा देना अनिवार्य बनाने का ट्राइ का नियम खारिज

दूरसंचार कंपनियों ने कोर्ट से कहा था कि पूरा क्षेत्र भारी-भरकम कर्ज से दबा है और उन्हें स्पेक्ट्रम के लिए बड़ी राशि का भुगतान करना है इसलिए कॉल ड्राप को बिल्कुल बर्दाश्त न करने का नियम उन पर लागू नहीं किया जाना चाहिए।
Author नई दिल्‍ली | May 12, 2016 02:57 am
कॉल ड्रॉप पर मुआवजा देने के दूरसंचार नियामक ट्राई के प्रस्ताव का जहां ग्राहकों ने समर्थन किया है वहीं कंपनियों ने कड़ा विरोध जताया है।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (11 मई) को ट्राइ के कॉल ड्राप के संबंध में दूरसंचार कंपनियों के लिए उपभोक्ताओं को मुआवजा देना अनिवार्य बनाने के नियम को खारिज करते हुए कहा कि यह मनमाना, असंगत और गैर-पारदर्शी है। न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ और न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन के पीठ ने कहा- हमने इस रद्द नियम को अधिकार क्षेत्र से बाहर, मनमाना, अतर्कसंगत और गैर-पारदर्शी करार दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने भारत के एकीकृत दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और वोडाफोन, भारती एयरटेल व रिलायंस जैसे 21 दूरसंचार परिचालकों के संगठन सीओएआइ द्वारा दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया। इस याचिका में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी जिसने ट्राइ के इस साल जनवरी से काल ड्राप के संबंध में उपभोक्ताओं को मुआवजा देना अनिवार्य बनाने के फैसले को उचित ठहराया था। दूरसचांर कंपनियों ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि पूरा क्षेत्र भारी-भरकम ऋण से दबा है और उन्हें स्पेक्ट्रम के लिए बड़ी राशि का भुगतान करना है इसलिए काल ड्राप को बिल्कुल बर्दाश्त न करने का नियम उन पर लागू नहीं किया जाना चाहिए।

कंपनियों ने भारतीय दूरसंचार प्राधिकार (ट्राइ) के इस आरोप को खारिज किया कि वे भारी-भरकम मुनाफा कमाती हैं। दूरसंचार कपंनियों ने कहा कि उन्होंने बुनियादी ढांचे में काफी निवेश किया हुआ है। ट्राइ ने अदालत से कहा था कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के वास्ते वह कॉल ड्राप के लिए दूरसंचार कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा क्योंकि सेवा प्रदाता उन्हें मुआवजा देने के लिए तैयार नहीं हैं।

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