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दौर अटकलों का

पिछले चुनाव की तुलना में चार फीसद बढ़ गया पहले चरण का मतदान। जैसे भीषण गर्मी का कोई असर ही नहीं दिखा उत्साहित जनता पर। वैसा उत्साह प्रचार के दौरान अलबत्ता कतई नजर नहीं आया था।

Author May 4, 2019 3:33 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

आजकल मतदान के घटने या बढ़ने के कोई पुख्ता निष्कर्ष निकालना आसान नहीं रह गया। राजस्थान को लेकर अटकलें चालू हैं। जहां पहले चरण की तेरह सीटों पर इस बार बंपर वोट पड़े। अतीत में यह स्थापित मान्यता सी हो गई थी कि ज्यादा मतदान का मतलब सत्ता में बैठी पार्टी के विरोध में लोगों का रुझान। पर अब इसका उलटा भी हो चुका है। लिहाजा इस कसौटी पर निष्कर्ष निकालने का चलन थमा है। ज्यादा वोटिंग ने अलबत्ता राजस्थान की दोनों ही पार्टियों भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के दिलों की धड़कन बढ़ा दी है।

पिछले चुनाव की तुलना में चार फीसद बढ़ गया पहले चरण का मतदान। जैसे भीषण गर्मी का कोई असर ही नहीं दिखा उत्साहित जनता पर। वैसा उत्साह प्रचार के दौरान अलबत्ता कतई नजर नहीं आया था। पिछली दफा सूबे की सभी पच्चीस सीटें भाजपा ने जीती थीं। इस बार दो सीटों पर लोगों को ज्यादा दिलचस्पी है। एक धौलपुर की सीट है जहां पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह मैदान में हैं, तो दूसरी सीट जोधपुर से मौजूदा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का निजी जुड़ाव ठहरा। उनके बेटे वैभव यहां केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से भिड़े हैं। इन दो सीटों पर मतदान और ज्यादा हुआ। इसकी वजह दोनों जगह दोनों ही पार्टियों के दूसरे इलाकों के कार्यकर्ताओं का जमावड़ा भी माना जा रहा है।

कार्यकर्ता अपने योगदान की खुद ही डींग हांक रहे हैं कि उन्होंने अपने इलाके में अपनी जाति के मतदाताओं को अपने उम्मीदवार के पक्ष में खूब प्रभावित किया। इन दो सीटों पर कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटी तो बाकी ग्यारह सीटों पर दोनों ही पार्टियों को कार्यकर्ताओं की किल्लत से दो-चार होना पड़ा। भाजपाई जहां बढ़े मतदान को राष्ट्रवाद और मोदी की आंधी का संकेत बता रहे हैं, वहीं कांग्रेसी इसे केंद्र सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से के इजहार के रूप में परिभाषित कर रहे हैं। एक तरफ इन सीटों के नतीजों को लेकर अटकलें हैं तो दूसरी तरफ बची बारह सीटों के रुझान को लेकर भी कयास कम नहीं लग रहे।

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