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नजरिया : सच्ची घटनाएं बनाम फिल्में

'मिस्टर पर्फेक्शनिस्ट’ के नाम से पहचाने जाने वाले आमिर खान ने बॉलीवुड में 30 बरस पूरे कर लिए हैं और अपने इस सफर को चंद शब्दों में बयां करते हुए उन्होंने कहा कि ‘‘मैं लगातार धारा के विपरीत बहता रहा हूं।’’

Author May 25, 2018 4:09 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

श्रीशचंद्र मिश्र

चार्ल्स शोभराज, वीरप्पन, रमन राघव जैसे अपराधियों पर बनी फिल्मों की नाकामी के बावजूद लगता है कोई सबक सीखने को तैयार नहीं है। सच्ची घटनाओं और जीवनी पर फिल्म बनाने का जो चलन शुरू हुआ है उसमें उन चेहरों का भी महिमा मंडन किया जा रहा है जिन्होंने अपनी आपराधिक गतिविधियों से आतंक मचाए रखा। कुछ ऐसी विवादास्पद हस्तियों को भुनाने की कोशिश हुई जो किसी कोण से प्रेरणा स्रोत नहीं रहीं। ‘अजहर’ में तो तथ्य सामने लाने की बजाए क्रिकेटर मोहम्मद अजहरूद्दीन को पाक साफ साबित करने की कवायद ज्यादा हुई। वास्तविक घटनाओं को फिल्म का रूप देने में कुछ भी गलत नहीं है। पर ऐसी फिल्मों में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि मूल घटनाओं के साथ कोई छेड़छाड़ न की जाए। अपने यहां उलटा हो रहा है। यह जरूर है कि किसी कथा का फिल्मी रूपांतरण करते समय सूत्रों को जोड़ने के लिए थोड़ी बहुत छूट लेनी जरूरी हो जाती है। लेकिन हिंदी फिल्में इस आजादी का कुछ ज्यादा ही फायदा उठा लेती हैं। भाग मिल्खा भाग, मेरी कॉम व अजहर को रोमांटिक अंदाज देने के लिए इन पूर्व खिलाड़ियों को हास्यास्पद बना दिया गया। इस तरह की फिल्म बनाने की होड़ में कुछ गंभीर प्रयास भी हो रहे हैं। इसमें कुछ गुमनाम रह गए लोगों की पहचान कराई गई। मांझी- द माउंटेन मैन, हवाईजादा व बुधिया ऐसी ही कुछ फिल्में हैं। लेकिन इन फिल्मों को कोई खास व्यावसायिक सफलता न मिलने की वजह से कुछ ऐसी जीवनियों की तलाश हो रही है जो रोचक- रोमांचक भी हों।

सच्ची घटनाओं की तो ऐसी मांग है कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुए उपद्रव पर महेश भट्ट फिल्म बनाने के लिए आगे आ गए। बात बनी नहीं। कल्कि ने उस तमाशे पर एक वृत्त फिल्म बना कर जरूर अपना शौक पूरा कर लिया। शीना बोरा हत्याकांड अब भले ही सुर्खियों में न हो पर उस पर दो फिल्में बननी शुरू हो गई थीं। कोई कानूनी अड़चन न आए इसलिए जाहिर है कि इन फिल्मों में काल्पनिक नामों का सहारा लिया जाएगा। इससे शीना हत्याकांड के घटनाक्रम को तोड़ने-मरोड़ने की सुविधा मिल जाएगी। जेसिका हत्याकांड पर बनी नो वन किल्ड जेसिका और आरुषि-हेमराज हत्याकांड पर कई गंभीर सवाल उठाने वाली तलवार की सफलता इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देने की वजह हो सकती है। लेकिन इन दोनों मामलों पर अदालत का फैसला आने के बाद फिल्में बनीं। दोनों ने व्यवस्था पर सवाल उठाए। मीडिया की भूमिका और पुलिस व जांच एजंसियों के तौर-तरीके की पड़ताल की।

मिस जम्मू रही अनारा की हत्या पर बनी फिल्म हो या राजस्थान के चर्चित भंवरी कांड पर, सभी में घटनाओं का विरूपित चित्रण किया गया। उत्तर प्रदेश में कवयित्री मधुमिता की हत्या पर राजनीतिक मानसिकता को कठघरे में खड़ा कर उसे एक अच्छा संदर्भ दिया जा सकता था लेकिन उस हत्याकांड पर बनी फिल्म इस मामले में लचर ही साबित हुई। तलवार और नो वन किल्ड जेसिका की सफलता से साबित हो गया है कि असली कहानी पर आधारित फिल्मों को पसंद किया जाता है। शर्त यही है कि उनमें घटनाओं का चित्रण ईमानदारी से किया जाए। हिंदी फिल्मों में अब असली कहानियों पर फिल्म बनाने की जो होड़ शुरू हुई है उसमें कुछ फिल्मों पर गौर किया जाए तो पता चलता है कि उनमें वैचारिक गंभीरता कम और सनसनी मचाने की मंशा ज्यादा है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद को न्यायोचित ठहराने वालीं फिल्में इसकी मिसाल हैं। सही है कि इस तरह की घटनाओं को देखने का अलग नजरिया हो सकता है और उसके पक्ष में जन भावनाओं के जुड़े होने का तर्क भी दिया जा सकता है।

मैं लगातार धारा के विपरीत बहता रहा

‘मिस्टर पर्फेक्शनिस्ट’ के नाम से पहचाने जाने वाले आमिर खान ने बॉलीवुड में 30 बरस पूरे कर लिए हैं और अपने इस सफर को चंद शब्दों में बयां करते हुए उन्होंने कहा कि ‘‘मैं लगातार धारा के विपरीत बहता रहा हूं।’’ अपने 30 साल के करिअर में हमेशा अलग तरह के किरदारों के चयन को लेकर हमेशा चर्चा में रहे आमिर ने कहा, ‘‘जब मैं फिल्म जगत में आया था, मैं अपनी तरह का अकेला था और ऐसी फिल्में करने की कोशिश कर रहा था जिनमें मुझे विश्वास था लेकिन बाजार को उनमें विश्वास नहीं था और अधिकतर लोग भी उसमें विश्वास नहीं करते थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं लगातार धारा के विपरीत बहता रहा और ऐसी फिल्में करता रहा जिनमें मुझे विश्वास था। अब धारा का रुख बदल गया है। इसलिए वे फिल्में जिनमें मुझे तब भरोसा था, अब वे मुख्यधारा में आ गईं हैं।’’ आमिर का मानना है कि दर्शकों की संवेदनशीलता में बदलाव आया है और अगर ‘जो जीता वही सिकंदर’ आज रिलीज हुई होती तो उसके हिट होने की अधिक संभावना थी। इस मौके पर आमिर ने यह भी बताया कि अपनी पहली फिल्म से उन्होंने 11,000 रुपए कमाए थे।

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