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102 नॉट आउट जैसी फिल्में संतुष्टि देती हैं : ऋषि कपूर

सदाबहार सितारे ऋषि कपूर एक बार फिर अपनी फिल्म 102 नॉट आउट के लिए चर्चा में हैं। इस फिल्म में बाबूलाल बखारिया के किरदार में ऋषि को बहुत पसंद किया जा रहा है। अमिताभ बच्चन और ऋषि की जोड़ी 27 साल बाद फिल्मों में नजर आई। ऋषि कपूर से हुई बातचीत के चुनिंदा अंश...

Author May 25, 2018 4:10 AM
बॉलीवुड एक्टर ऋषि कपूर।

आरती सक्सेना

सवाल : आपकी फिल्म 102 नॉट आउट काफी पसंद की जा रही है। क्या कहेंगे?

’अब दर्शक हर तरह की फिल्में स्वीकार करने लगे हैं। कई साल पहले दर्शकों की सीमित पसंद के कारण फिल्मों में विविधता नहीं होती थी। उस दौर में हर अभिनेता के पास हीरो के पास खोया-मिला जैसी चार फिल्में जरूर होती थीं। आज दर्शक हिचकी और 102… जैसी फिल्में भी पसंद कर रहे हैं। 102 नॉट आउट जैसी फिल्में अभिनय में संतुष्टि प्रदान करती हैं। अच्छा लगता है अर्थपूर्ण फिल्मों में काम करना।

सवाल : आपको 75 साल के वृद्ध की भूमिका मिली है। क्या अब आप ऐसे किरदार निभाने के लिए तैयार हैैं?
’हम कलाकार हैं। हमारे लिए हमेशा किरदार मायने रखता है ना कि उम्र। इससे पहले मैंने कपूर एंड सन्स में वृद्ध दादा की भूमिका की थी। हमारे लिए कहानी और फिल्म मेकिंग ज्यादा मायने रखती है। मुझे पूरी कहानी अच्छी लगी। इसलिए मैंने फिल्म साइन कर ली।

सवाल :कपूर एंड सन्स में दादा का किरदार निभाने में क्या अनुभव रहा?
’हमें शूटिंग के लिए कई कई घंटे मेकअप करना पड़ता था। कहानी और किरदार की मांग के अनुसार ऐसा लाजिमी भी हो जाता है। अमित जी ने तो फिल्म पा में मुझसे भी ज्यादा मुश्किल भूमिका निभाई थी। इसके लिए वे तीन तीन-चार चार घंटे मेकअप करवाते थे। वैसे हम लोग मेकअप पर नहीं, अपने किरदार पर केंद्रित होते हैं।

सवाल :अमिताभ बच्चन के साथ आपने 27 साल बाद काम किया। उनमें क्या फर्क पाया? आगे भी उनके साथ फिल्म करेंगे?
’वो एक लीजेंड एक्टर हैं। उनको ऐसे ही महानायक नहीं कहा जाता । वे अपनी फिल्म में सौ फीसद देते हैं। 27 साल बाद मैंने उनके संग काम किया। मैंने उनमें कोई फर्क नहीं देखा। आज भी वे अपने काम को लेकर उतने ही उत्साहित हैं जितने की जवानी के दिनों में होते थे। उनके संवाद और हाव भाव देख कर मैं उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाया। आज भी वे अपने काम के प्रति उतने ही समर्पित हैं, जितने 27 साल पहले थे।

सवाल : इस फिल्म में कौन सा दृश्य आपके दिल को छू गया?
’किसी एक दृश्य की तारीफ करना पूरी फिल्म के संग अन्याय होगा। क्योंकि इस फिल्म का एक-एक सीन भावनात्मक और दिल को छूने लेने वाला है। पूरी फिल्म ही प्रेरणादायक है। इसलिए मुझे पूरी फिल्म ही अच्छी लगी।

सवाल : दर्शकों की तरफ से इस फिल्म के लिए आपको बढ़िया प्रतिक्रिया मिली है?
’हां, किरदार बाबूलाल बखारिया के लिए बहुत तारीफ मिली। एक महिला ने बताया कि गुजरात में खास तौर पर मेरे किरदार को बहुत पसंद किया जा रहा है। निजी तौर पर मुझे कई लोगों ने कहा कि मैं 102… में बहुत अच्छा लगा हूं और मेरा अभिनय कमाल का है।

सवाल : इस फिल्म के निर्देशक उमेश शुक्ल के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
’उमेश शुक्ल युवा और बेहतरीन निर्देशक हैं। उन्हें अपना काम बहुत अच्छे से पता है। उन्होंने मेरे और अमित जी के कुछ दृश्यों पर कैंची भी चला दी। उन्होंने हमें साफ कह दिया कि फिल्म में जो जरूरी नहीं है, वह संपादित होगा ही। एक निर्देशक के लिए यह बहुत जरूरी है कि उसकी फिल्म का अभिनेता उसके लिए सिर्फ एक पात्र है और उस किरदार की लोकप्रियता कतई हावी नहीं होना चाहिए।

सवाल : आजकल वेब सीरिज का जमाना चल रहा है। इसे आप कितना सही माध्यम समझते हैं?
-मैं वेब सीराज के बारे में ज्यादा नहीं जानता और ना ही मुझे वेब सीरीज के लिए कोई पेशकश ही की गई है। जब कोई आफर आएगा तब ही इस बारे में कुछ बोल पाऊंगा ।

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