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संघर्ष गाथा: लक्ष्‍मी निवास मित्‍तल के पास है आज एक लाख करोड़ की दौलत, पर कभी थे दो जून रोटी के लाले

लक्ष्मी निवास मित्तल के परिवार ने वो दिन भी देखे हैं जब दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पाना भी बहुत मुश्किल होता था।

लक्ष्मी निवास मित्तल।

इंसान अपनी मेहनत और किस्मत से कैसे फर्श से अर्श तक पहुंच सकता है इसका जीता जागता उदाहरण हैं लक्ष्मी निवास मित्तल। पूरी दुनिया में स्टील किंग के नाम से मशहूर एल एन मित्तल ने ऐसा वक्त भी देखा है जब उन्हें एक वक्त की रोटी खाते समय अगले वक्त की रोटी की चिंता सताती रहती थी। उनके परिवार ने वो दिन भी देखे हैं जब दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पाना भी बहुत मुश्किल होता था। लेकिन इसे दृढ़ संकल्प, मेहनत और किस्मत का कॉकटेल ही कहेंगे कि कभी तंगी के चलते भूखा रहने वाले परिवार का सदस्य आज एक लाख करोड़ की संपत्ति का मालिक है। कभी कोलकाता के छोटे से किराए के कमरे में रहने वाले के पास आज दुनिया के सबसे महंगे आलीशान बंगले हैं। आज इनकी लाइफस्टाइल ऐसी है कि देखने वाले कभी इस बात का अंदाजा नहीं लगा सकते कि कभी पैसों की कमी के कारण इन्हें अपना गांव समाज छोड़कर किसी अंजान शहर में किराए की जिंदगी गुजारनी पड़ी होगी।

पिछले दिनों ईस्टर्न आई एशियन रिच लिस्ट में हिंदुजा बंधुओं के बाद लक्ष्मी निवास मित्तल दूसरे नंबर पर हैं। पिछले साल भर में उनकी संपत्ति 51,763 करोड़ रुपए से बढ़कर 1.02 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। लेकिन इस एक लाख करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने वाले लक्ष्मी निवास का बचपन अभावों से भरा हुआ था। उनका जन्म 15 जून, 1950 को राजस्थान के सादुलपुर में हुआ था। जन्म के वक्त उनके घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। पैसों की तंगी से उभरने के लिए उनके जन्म के दो साल बाद उनके पिता मोहनलाल ले अपनी जन्मभूमि छोड़ देने का कठिन फैसला किया।

1952 में लक्ष्मी निवास मित्तल का पूरा परिवार कोलकाता चला आया। कोलकाता में अपने 6 सदस्यों वाले परिवार का पेट भरने के लिए पिता मोहनलाल ने एक कारखाने में नौकरी शुरू कर दी। कहने को तो मोहनलाल नौकरी कर रहे थे लेकिन इस नौकरी से घर में इतने पैसे नहीं आ पाते थे कि पूरे परिवार को ठीक से खाना तक नसीब हो सके। इन हालातों से पार पाने के लिए लक्ष्मी निवास के पिता ने और ज्यादा मेहनत करनी शुरू कर दी। धीरे-धीरे परिवार की माली हालत में सुधार आने लगा। आर्थिक तंगी के बादल थोड़े छटे तो परिवार ने आपना बिजनेस खड़ा करने का मन बनाया। ये मित्तल परिवार की विरासत की नींव का पहला पत्थर था। नाम था निप्पन डेनरो इस्पात।

एक वो दिन था और एक आज का दिन है जब कभी इस परिवार ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। अपने पिता की विरासत को लक्ष्मी निवास इतना आगे ले जा चुके हैं जिसके बारे में शायद ही इनके परिवार ने कभी सोचा होगा।

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