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बाखबर: कंगना का थाली विमर्श

सुशांत की मौत और कंगना के शापों के बीच फंसी रसीली खबरों के बीच आप हमारे चैनलों से यह उम्मीद एकदम न करें कि वे हर रोज सत्तानबे हजार के हिसाब से बढ़ते कोरोना संक्रमण, बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई या लद्दाख में चीनी भारतीय सैनिकों के बीच की तनातनी पर चर्चा करेंगे!

kangana ranaut, Uddhav Thackeray, kangana ranaut videoउद्धव ठाकरे पर फूटा कंगना रनौत का गुस्सा

कहां है सलमान? अरे सलमान तेरे को पता है… तू ड्रग माफिया के बारे में कुछ बोलता क्यों नहीं? एक आवाज नहीं… मैं पूछता हूं सलमान खान कहां है? दिशा सालियान के बारे में तेरी बोलती बंद क्यों?… क्यों न पूछूं मैं?
इस तरह अंग्रेजी भैया अपने हिंदी चैनल पर जब हिंदी में बोला तो इस तरह बोला मानो सलमान चोर हो और भैया जी सिपहिया!
सलमान की ये हिम्मत कि सूट-बूट पहने एक ‘राष्ट्र’ पूछता रहे और वो चुप रहे!

यह है खबर बेचने की कला कि जहां कोई न बोले, भैया जी उसके न बोलने को ही उसका अपराध बना कर केस बना देते और फिर ताल ठोक कर कहते हैं कि यह है नया मीडिया!
ऐसे में जब उस चैनल में कंगना जी एंट्री लेती हैं तो ‘उसके बाद सितारों में रोशनी न रही’ वाली बात होती है!
क्या तो कंगना के स्त्रीत्ववाद की दीप्ति, क्या सहज तेज और ओज और क्या कंगना की डायलाग डिलीवरी कि एक एक डायलाग लाख लाख रुपए का और सीन में इस कदर फिट कि बड़े से बड़ा निर्देशक तक पनाह मांगे।
पता नहीं किस बुरी घड़ी में, नशेड़ी-गंजेड़ी और माफिया बताए जाते बॉलीवुड के प्रति सांसद जया बच्चन जी का वात्सल्य भाव जाग उठा और बॉलीवुड निंदकों को कह बैठीं कि जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं…

हाय हाय! ये क्या कह दिया जया जी ने कि तुरंत सांसद रविकिशन जी अपनी थाली लेकर आए और बजा-बजा कर दिखाए कि मैंने किसी की थाली नहीं ली, बल्कि भोेजपुरी फिल्मों से अपनी थाली बनाई है और देख लो कि इसमें कोई छेद नहीं है!
सारे चैनल रविकिशन जी की थाली को देखने-दिखाने के लिए मचल उठे और शाम तक उनकी भोजुपरी थाली दिखाते रहे कि एक बार फिर से कंगना जी को अपना थाली विमर्श संभालना पड़ा और अपने ‘थाली-ट्वीटों’ से जया जी पर ऐसे कड़वे सवाल पूछे कि उनकी समूची थाली ठंडी पड़ गई। जैसे कि अगर आपकी बेटी को पीटा जाता, नशा दिया जाता और ‘मोलेस्ट’ किया जाता, अगर आपके बेटे को धमकाया जाता, प्रताड़ित किया जाता और वह लटक जाता, तो क्या आप यही कहतीं?… एक सीन, एक आइटम सांग के लिए जहां हीरो के साथ सोना पड़ता है… और फिर यह भी घोषित कर दिया कि मैंने ही बॉलीवुड को स्त्रीत्ववाद सिखाया है।

हाय हाय! यह कंगना तो स्त्रीत्ववाद को भी ले उड़ी! इसलिए एक अंग्रेजी लेडी एंकर ने एक शाम ‘कंगना स्त्रीवादी कि सेक्सवादी’ पर तीन स्त्रीत्ववादिनियों से चर्चा कर सिद्ध करना चाहा कि कंगना स्त्रीत्ववादी नहीं, बल्कि ‘सेक्सिस्ट’ है, ‘पितृसत्तावादी सौदेबाज’ (पैट्रियार्कल बारगेनर) है (क्योंकि उसने स्त्रीत्ववाद की थियरी नहीं पढ़ी!)
उफ! वही अंग्रेजीवादी एलीट की ऐंठ!

सुशांत की मौत और कंगना के शापों के बीच फंसी रसीली खबरों के बीच आप हमारे चैनलों से यह उम्मीद एकदम न करें कि वे हर रोज सत्तानबे हजार के हिसाब से बढ़ते कोरोना संक्रमण, बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई या लद्दाख में चीनी भारतीय सैनिकों के बीच की तनातनी पर चर्चा करेंगे! हमारे चैनलों के लिए सबसे बडी राष्टÑीय खबर अब भी सुशांत की आत्महत्या या हत्या या नशामाफिया है!
और अब तो कभी-कभी ऐसा लगता है कि इस मामले में भाजपा के दो विधायकों को एंकरों और जांच एजेसियों से भी कहीं अधिक जानकारी है, लेकिन आश्चर्य कि कोई एजेंसी इनसे पूछताछ करती नहीं दिखती!

हम आए दिन एक-सी खबरों को लीक होते और उन्हीं को पूरे दिन बजता देखते हैं मानो कोई दूसरी खबर ही न हो!
तिस पर भी, ऐसी ही पूर्व ‘लीक्ड’ खबर को अपनी नई खोजी खबर की तरह पेश कर कई एंकर दावा करते दिखते हैं कि देखो देखो, हमें मिले सुशांत की डायरी के कुछ नए पन्ने। फिर उनको पढ़ कर वे सुशांत को कभी नीत्शे, रूमी और क्वांटम फिजिक्स का परम ज्ञानी बताते नहीं थकते, लेकिन कबीर के जिस दोहे को दिखाते हैं, वह न केवल डायरी में गलत लिखा होता है, बल्कि एंकर भी गलत पढ़ती है कि ‘जब मैं था तब ‘हरी’ नहीं अब ‘हरी’ है मैं नाहीं!’ बावले, यहां ‘हरी’ न होकर ‘हरि’ है! उसे ‘हरि’ की तरह ही पढ़ो!

और अब तो चैनलों को हत्यारा खोजने की जगह नशा माफिया खोजने में मजा आने लगा है। नित्य नए-नए नामों की सूची दी जाती है कि नशा करने वालों में न जाने कौन-कौन नशेड़ी हैं। हर रोज नए नाम जोड़ दिए जाते हैं। इस तरह रायता फैलाया जा रहा है और सब जानते हैं कि जब रायता बहुत फैलाया जाता है तो फिर वह समेटने में नहीं आता!

खबर चैनलों के लिए आम जनता की बढ़ती परेशानियां ‘खबर’ नहीं हैं। उदाहरण के लिए, कृषि बिल पास होता है, अकाली दल की नेता मंत्रिमंडल से इस्तीफा देती हैं, लेकिन एक एंकर नहीं बताता कि किसानों के हित के लिए पास की जाती व्यवस्थाओं में क्या क्या हित-अहितकारी है?
इस बीच, एक दिन ‘दिल्ली दंगों’ की सत्रह हजार पेज की रिपोर्ट आती है और दिल्ली पुलिस पंद्रह आरोपितों को चार्जशीट कर देती है। एक चैनल में एक एंकर, एक वकील और दो एक्स पुलिस अधिकारी आपस में आश्वस्त नजर आते हैं कि पुलिस कुछ भी कर ले, अदालत में यह चार्जशीट नहीं टिकेगी! जब ऐसा है, तो रोने की क्या जरूरत?

इसी बीच पीएम का सत्तरवां जन्मदिन मना, जिसे सेवा दिवस की तरह मनाया, लेकिन कांगे्रस ने इसे ‘खिसियाहट दिवस’ की तरह ही मनाया!
चलते चलते : महा-सरकार ने भैयाजी की चैनल सरकार पर ‘विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव’ ठोक दिया। लेकिन अपने भैया जी तो पहले ही कह चुके हैं कि वे गाड़ी चला कर वहां जाएंगे। वे डरने वाले नहीं!

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