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ब्रजेश पांडे पर सोशल मीडिया ट्रायल: कठघरे में रवीश कुमार, वकील और जज की भूमिका में पत्रकार

बिहार के एक पूर्व मंत्री की नाबालिग बेटी ने बिहार कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष ब्रजेश पाण्डेय, पूर्व आईएएस के बेटे निखिल प्रियदर्शी और संजीत कुमार शर्मा पर यौन शोषण और बलात्कार का आरोप लगाया है।

ब्रजेश कुमार पाण्डेय 2015 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक का चुनाव लड़े थे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

पत्रकार और टीवी एंकर रवीश कुमार के भाई ब्रजेश पाण्डेय पर एक नाबालिग दलित लड़की द्वारा यौन शोषण का आरोप लगाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर दो फाड़ में बंटता नजर आ रहा है। आम लोगों के साथ ही पत्रकार भी रवीश के पक्ष विपक्ष में आवाज उठाते नजर आ रहे हैं। जहां कुछ पत्रकार रवीश की पूरे मुद्दे पर चुप्पी को लेकर उन्हें घेर रहे हैं तो वहीं कुछ पत्रकार भाई के आरोपी होने पर रवीश को निशाने पर लेने को गलत बता रहे हैं। बिहार के एक पूर्व मंत्री की नाबालिग बेटी ने बिहार कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष ब्रजेश पाण्डेय, पूर्व आईएएस के बेटे निखिल प्रियदर्शी और संजीत कुमार शर्मा पर यौन शोषण और बलात्कार का आरोप लगाया है।

एक निजी चैनल से जुड़े अभिषेक उपाध्याय ने रवीश की चुप्पी पर सवाल खड़े करते हुए फेसबुक पर लिखा, “रवीश कुमार के बड़े भाई ब्रजेश पांडेय बलात्कार के मुकदमे में हैं। पीड़ित भी कौन? एक दलित लड़की! वो भी नाबालिग?? ज़िला मोतिहारी। बिहार। सेक्स रैकेट चलाने का मामला अलग से है!!!! पर इसमें रवीश कुमार का करें? अब ठीक है, माना कि आसाराम से लेकर स्वामी नित्यानन्द तक ऐसे ही मामलों पर बड़ा शोर मचाए रहे वो। गर्दा झाड़े पड़े थे। तब पीड़ित के साथ खड़े थे। रोज़ ही जलते सवालों की बौछार। स्टूडियो न हुआ था। आग का मैदान हो गया था तब। पर भूलो मत। भाई की बात है। आपस में भले लड़ लें। बाहर सब एक हैं। जब बाहर से विपत्ति आई तो युधिष्ठिर ने कहा था- “वयम पंचादि शतकम।” हम एक सौ पांच हैं। कौरव-पांडव सब एक। अब धर्मराज युधिष्ठिर की भी न सुने रवीश!!!” अभिषेक की पोस्ट को 240 से ज्यादा लोग शेयर और 720 से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं।

वहीं वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने इस मुद्दे के बारे में फेसबुक पर लिखा है, “लेकिन महज़ आरोपों के बीच सोशल मीडिया पर रवीश कुमार पर कीचड़ उछालना क्या ज़ाहिर करता है? निश्चय ही अपने आप में यह निहायत अन्याय भरा काम है। आरोप उछले रिश्तेदार पर और निशाने पर हों रवीश कुमार? इसलिए कि उनकी काली स्क्रीन कुछ लोगों के काले कारनामों को सामने लाती रहती है? ज़ाहिर है, यह हमला रवीश पर नहीं, इस दौर में भी आलोचना का साहस रखने वाली पत्रकारिता पर है। पहले एनडीटीवी पर “बैन” का सीधा सरकारी हमला हो चुका है। अब चेले-चौंपटे फिर सक्रिय हैं। इन ओछी हरकतों में उन्हें सफलता नहीं मिलती, पर लगता है अपनी कोशिशों में ख़ुश ज़रूर हो लेते हैं। अजीब लोग हैं।” ओम थानवी की पोस्ट को 150 से ज्यादा लोग शेयर और 730 से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं।

Patna Rape Victim, Patna Minor Rape, Brajesh Kumar Pandey, Nikhil Priyadarsh, Sanjeet Sharma, Ravish Kumar लड़की ने मीडिया के सामने आकर आत्मदाह की धमकी दी है। (वीडियो स्क्रीनग्रैब)

बिहार के वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह ने मामले की पड़ताल करके ब्रजेश पाण्डेय पर लगाए आरोपों पर सवाल खड़ा किया है। सिंह के अनुसार मामले की शुरुआती एफआईआर इत्यादि में ब्रजेश पाण्डेय का नाम आरोपियों में नहीं हैं। संतोष सिंह ने लिखा है, “मामला जो हो, जाँच जिधर चले मैं फिर कहूँगा कि रवीश जैसे ज़िम्मेदार और संजीदा पत्रकार को इसमें बदनाम करने की कोशिश न सिर्फ़ दूर की कौड़ी (वहाँ कौड़ी भी नहीं) है, बल्कि सिरफिरे लोगों का सुनियोजित कीचड़-उछाल षड्यंत्र मात्र है। ऐसे बेपेंदे के अभियान चार दिन में अपनी मौत ख़ुद मर जाते हैं।”

लेकिन रवीश कुमार की आलोचना करने वाले इन तर्कों से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। पत्रकार व्यालोक ने रवीश की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए लिखा है, “कई बार ‘ट्रोल्स’ के आरोपों पर आंसूपछाड़ वक्तव्य जारी कर चुके, अपनी मां तक को इसमें घसीट लानेवाले पंडित ‘रवीश कुमार’ और उनके साथी कॉमरेडों की ख़तरनाक और रहस्यमय चुप्पी बहुत कुछ बयां कर रही है…”

पत्रकार पुष्य मित्र ने भी फेसबुक पर भाई के बहाने रवीश कुमार को निशाना बनाने की आलोचना की है। पुष्य मित्र ने लिखा है, “भाई के बहाने रवीश पर निशाना दागना ठीक नहीं है। आपको अगर उनका काम पसंद नहीं आता तो काम की आलोचना कीजिये। मैंने भी रवीश की खूब आलोचना की है, मगर सिर्फ उनके एकपक्षीय एंकरिंग की।….यह बात हमेशा ध्यान रखिये, कोई व्यक्ति अपने भाई के कर्मों का जिम्मेदार कैसे हो सकता है? हर व्यक्ति सिर्फ अपने कर्मों का जिम्मेदार है।”

पत्रकार जहां खुद ही इस मुद्दे पर बंटे हुए वहीं उनके फॉलोवर्स इस मुद्दे पर बंटे नजर आ रहे हैं। कुछ फॉलोवर जहां पत्रकारों से सहमति जता रहे हैं तो कुछ सवाल उठा रहे हैं। ओम थानवी की पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए पत्रकार उर्मिलेश ने लिखा है, “इस मामले में बेवजह रवीश को निशाना बनाने का क्या औचित्य है? अगर कहीं किसी के परिजन पर कोई आरोप लगा है तो कानून की प्रक्रिया के तहत जांच होगी। इसमें सैकड़ों किमी दूर रहने वाले उक्त व्यक्ति के परिवार के एक पत्रकार-एंकर का भला क्या कसूर कि कुछ शरारती तत्व कीचड़ उछालने की कोशिश कर रहे हैं! इस दुष्प्रचार अभियान की जितनी निंदा की जाय, कम है।” वहीं कुछ लोग रवीश कुमार को इस तर्क के साथ घेर रहे हैं जब वो नाथुराम गोडसे या राघवजी जैसे किसी व्यक्ति के कर्मों के आधार पर पूरे संगठन पर सवाल खड़ा कर सकते हैं तो उन पर भाई के आरोपी होने पर सवाल क्यों नहीं खड़ा किया जा सकता?

नाबालिग लड़की दलित है और उसने मीडिया के सामने मामले में न्याय न मिलने पर आत्मदाह करने की धमकी दी है। पीड़िता ने करीब दो महीने पहले निखिल प्रियदर्शी के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी थी। मामले में पाण्डेय का नाम हाल ही में सामने आया है। पाण्डेय ने मंगलवार (21 फरवरी) को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। मुख्य आरोपी निखिल अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

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