ताज़ा खबर
 

अंतिम बार आउट होने के बारे में भी चर्चा की थी भाई से चर्चा: तेंदुलकर

तेंदुलकर ने कहा, ‘‘अपने कैरियर के अंतिम दिन भी जब मैं वानखेड़े स्टेडियम में आउट हुआ तब भी हमने आउट होने के बारे में चर्चा की और यह भी कि मैं क्या कर सकता था।’’

Author मुंबई | February 19, 2016 8:29 PM
तेंदुलकर ने जोर देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अपने भाई की राय पर भरोसा किया, भले ही वह इससे सहमत नहीं होते थे।

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने नवंबर 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने अंतिम टेस्ट के बाद भी अपने आउट होने के बारे में बड़े भाई अजीत से चर्चा की थी जबकि उन्हें अच्छी तरह पता था कि इसके बाद वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोबारा बल्ला नहीं पकड़ेंगे। तेंदुलकर ने वानखेड़े स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ यहां अपना 200वां और अंतिम टेस्ट खेलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। उन्होंने खुलासा किया कि किस तरह से उन्होंने अपने भाई से अंतिम बार आउट होने पर चर्चा की थी। तेंदुलकर ने कहा, ‘‘अपने कैरियर के अंतिम दिन भी जब मैं वानखेड़े स्टेडियम में आउट हुआ तब भी हमने आउट होने के बारे में चर्चा की और यह भी कि मैं क्या कर सकता था।’’

वर्ष 2011 क्रिकेट विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य ने कहा, ‘‘इसमें कोई शक नहीं कि अपने भाई अजीत की वजह से ही मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था। मैं पहले अपने भाई की तरह बनना चाहता था। फिर मैंने क्रिकेट मैच देखना शुरू किया, तब भारत ने विश्व कप जीता और मैं ट्रॉफी अपने हाथ में लेना चाहता था। मैंने वहीं से अपने इस सपने का पीछा करना शुरू कर दिया।’’

उन्होंने अवीवा लाइफ इंश्योरेंस के अभियान ‘अवीवा अर्ली स्टारटर्स’ के समापन पर कहा, ‘‘मेरा भाई ही मुझे कोच रमाकांत अचरेकर के पास ले गया था और स्कूली दिनों में अचरेकर सर हमेशा मेरे साथ थे। लेकिन स्कूल छोड़ने के बाद मैंने तुरंत भारत के लिये खेलना शुरू कर दिया, तब मैं शिवाजी पार्क से दूर चला गया। मैंने मुंबई रणजी टीम और भारतीय टीम के साथ यात्रा शुरू करना शुरू कर दिया। इसलिये बाद में ज्यादातर चर्चा मेरे भाई के साथ होनी शुरू हो गयी।’’

तेंदुलकर ने जोर देते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अपने भाई की राय पर भरोसा किया, भले ही वह इससे सहमत नहीं होते थे। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा भाई क्रिकेट खेल चुका था और जानता था कि क्या जरूरी है और उनसे मैं अपनी बल्लेबाजी तकनीक और खेल के मानसिक पहलू पर बात कर सकता था।’’

तेंदुलकर ने कहा, ‘‘मैं आलोचना के लिये भी तैयार था। ऐसे भी मौके आये जब हमारी राय अलग अलग होती थी, लेकिन मैं जानता था कि अंत में वह जो कह रहा था, वो मेरे अच्छे के लिये था और मैंने हमेशा उसकी राय पर भरोसा किया।’’

तेंदुलकर ने कहा कि उनके संन्यास लेने के अगले दिन सुबह उन्होंने एक कप चाय बनायी। इस 42 वर्षीय स्टार खिलाड़ी ने कहा, ‘‘जब मैंने संन्यास लिया, उसके अगले दिन सुबह मैंने एक कप चाय बनायी। मुझसे सवाल पूछा गया, ‘आपने सबसे पहले क्या किया’ तो मैं उठा, अपनी बालकनी में बैठा। यह आरामदायक था। मैंने ये चीजें करना जारी रखीं।’’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App