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हमारी याद आएगी : निर्माता बन कर खूब पछताए थे राजेंद्र नाथ

राजेंद्र नाथ (8 जून,1931 -13 फरवरी, 2008) : मुंबई फिल्मजगत में आने वाले हर हुनरमंद आदमी का अंतिम लक्ष्य फिल्म निर्माता बनना होता है। जोखिम के बावजूद, लेखक, गायक, गीतकार, संगीतकार, अभिनेता, निर्देशक से लेकर फाइट मास्टर और तकनीशियन तक निर्माता बनते रहे हैं। मुकेश, किशोर कुमार, लता मंगेशकर जैसे गायक भी निर्माता बने। हास्य कलाकार मोहन चोटी से लेकर महमूद, ओमप्रकाश तक ने भी फिल्म निर्माण में हाथ आजमाए। निर्माता बनने की चाह से बहुत कम ही फिल्म वाले बच पाए। हास्य अभिनेता राजेंद्र नाथ ने भी एक बार फिल्म बनाने की कोशिश की थी, मगर वह निर्माता बन कर इतना पछताए कि फिर कभी फिल्म नहीं बनाई। आज उनकी जयंती है।

राजेंद्र नाथ (8 जून,1931 -13 फरवरी, 2008)

राजेंद्र नाथ ने 1971 में बतौर निर्माता ‘गेट क्रेशर’ नामक फिल्म शुरू की थी। मुंबई फिल्मजगत में गेट क्रेशर उन संघर्षरत कलाकारों को कहा जाता है, जो पांच सितारा होटलों में होने वाली फिल्मी पार्टियों में बिना निमंत्रण घुस जाते हैं ताकि निर्माता-निर्देशकों से मिल सकें। राजेंद्र कुमार ने रणधीर कपूर और नीतू सिंह को लेकर ‘गेट क्रेशर’ शुरू तो की, मगर एक पखवाड़ा भी इसकी शूटिंग नहीं कर पाए। आर्थिक संकटों के चलते फिल्म की शूटिंग बंद हो गई और फिल्म हमेशा के लिए डिब्बे में चली गई। हालांकि निर्माता तो नहीं मगर अभिनेता के रूप में उन्हें खूब कामयाबी मिली। अभिनेता के रूप में राजेंद्र नाथ को परदे पर देखते ही दर्शक अपनी मुस्कराहट नहीं रोक पाते थे।

फ्राक जैसी पोशाक, टोपी, मोटी फ्रेम का चश्मा पहने, लगातार ऊलजुलूल हरकतें करने वाले पोपटलाल के किरदार को ऐसी अद्भुत सफलता मिली कि राजेंद्र नाथ ने बाद में अमेरिका, ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देशों में पोपटलाल के नाम से स्टेज शो किए। 1959 से पहले राजेंद्र नाथ को ऐसी भूमिकाएं मिल रही थीं, जो कुछेक सेकंड या मिनट की होती थी। दस साल तक संघर्ष करने के बाद आखिर 1959 में उनकी पहली बड़ी कामयाब फिल्म आई नासिर हुसैन की ‘दिल देके देखो’। 1961 में नासिर हुसैन की ही ‘जब प्यार किसी से होता है’ में राजेंद्र नाथ पोपटलाल की भूमिका में अजीबोगरीब हरकतें करते दर्शकों के सामने आए। यह किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि बाद में कई फिल्मों ही नहीं एकता कपूर के धारावाहिक ‘हम पांच’ में भी राजेंद्र नाथ के किरदार का नाम पोपटलाल रखा गया।

मगर निर्माता के रूप में न तो उन्हें बड़ी कामयाबी मिली, न उनके बड़े भाई प्रेम नाथ को। राजेंद्र नाथ के बड़े भाई प्रेम नाथ ने 1952 में बीना राय से शादी कर ली थी। 1953 में ‘शगुफ्ता’ (प्रेमनाथ, बीनाराय) और 1954 में ‘प्रिजनर ऑफ गोलकुंडा’ (प्रेम नाथ-बीना राय) बनाई। इसमें राजेंद्र नाथ को भी अच्छी भूमिका दी गई मगर दोनों ही फिल्में नहीं चलीं। प्रेम नाथ-बीना राय के बेटे प्रेम किशन ने 70 के दशक में बतौर अभिनेता अपनी जगह बनाने की कोशिश की मगर विफल रहे। बाद में प्रेम किशन ने सिनेविस्टा नाम कंपनी खोली। टीवी धारावाहिक बनाकर सफलता पाई। मगर फिल्म निर्माता के रूप में उन्हें भी सफलता नहीं मिली। उन्होंने सलमान खान को लेकर ‘गर्व’ समेत तीन फिल्में बनाईं, मगर किसी को भी बड़ी कामयाबी नहीं मिली। राजेंद्र नाथ मध्य प्रदेश से 1947 में मुंबई आ गए थे। दरअसल 1946 में प्रेम नाथ, राजेंद्र नाथ और नरेंद्र नाथ की बहन कृष्णा मल्होत्रा की शादी राज कपूर से हो गई थी। उनकी दूसरी बहन उमा ने बाद में अभिनेता प्रेम चोपड़ा से ब्याह किया था। राज कपूर ने शादी के बाद प्रेम नाथ को मुंबई बुला कर पृथ्वी थियेटर में काम दिलवा दिया था। बाद में राजेंद्र नाथ और नरेंद्र नाथ भी मुंबई आ गए।

राजेंद्र नाथ को लगभग दस सालों तक संघर्ष करना पड़ा। पहले तो वह प्रेम नाथ और बीना राय के साथ ही रहते थे। बाद में उन्होंने अकेले रहना शुरू किया। उनके साथ करण जौहर के पिता यश जौहर भी रहते थे। दोनों कुछ बनने के लिए संघर्ष कर रहे थे। जौहर देव आनंद के प्रोडक्शन कंट्रोलर बने और उन्होंने फिल्म निर्माता बन कर खूब नाम कमाया। उनकी कंपनी धर्मा प्रोडक्शंस को आजकल करण जौहर नई ऊंचाइयां दे रहे हैं।

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