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बाल विवाह : जागरूकता के बाद भी दसवां नंबर पर राजस्थान

महिला बाल विकास राज्य मंत्री अनिता भदेल का कहना है कि कानूनी सख्ती और शिक्षा के फैलाव से आई जागरूकता के चलते बाल विवाहों में बड़ी कमी आई है। बावजूद अभी भी बाल विवाह होना निश्चित तौर पर समाज के लिए कलंक है।

Author May 2, 2018 5:09 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

पिछले चार साल के दौरान राजस्थान में बाल विवाह के 32 मामले सामने आए, पर इनमें से एक भी मामले में किसी को कोई सजा नहीं मिली। शिक्षा और जागरूकता के साथ-साथ कानून के डर के चलते बाल विवाहों की संख्या में कमी जरूर आई है, पर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में आज भी चोरी छिपे नाबालिगों की शादी कराई जा रही है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार, बाल विवाह के मामले में राजस्थान का देश में दसवां स्थान है। बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि किसी जमाने में बाल विवाह के लिए राजस्थान सबसे ज्यादा बदनाम प्रदेश था। अब हालात में काफी सुधार हुआ है पर अभी भी बच्चों की शादियों का क्रम नहीं रुका है।

सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने वाली दीपा माथुर का कहना है कि कानून के तहत दो साल की सजा और एक लाख रुपए का जुर्माना तय है। माथुर का कहना है कि यह एक बड़ी सामाजिक बुराई है, इसे जागरूकता के जरिए ही रोका जा सकता है। गृह विभाग के अनुसार, प्रदेश में जनवरी 14 से दिसंबर 17 तक इस कानून के तहत 32 मामले दर्ज हुए। इनमें से एक भी मामले में सजा नहीं हुई। दर्ज 32 मामलों में से 15 में तो एफआर लगा कर बंद कर दिया गया। पुलिस ने 16 मामलों में अदालत में चालान पेश किया है।

अदालतों में इनकी सुनवाई चल रही है। करौली जिले में बाल विवाह से जुड़ा एक मामला दो साल से विचाराधीन है। महिला बाल विकास राज्य मंत्री अनिता भदेल का कहना है कि कानूनी सख्ती और शिक्षा के फैलाव से आई जागरूकता के चलते बाल विवाहों में बड़ी कमी आई है। बावजूद अभी भी बाल विवाह होना निश्चित तौर पर समाज के लिए कलंक है।

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