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जान‍िए, एनडीटीवी पर ड‍िबेट में पहली बार क‍िस तरह आए थे नरेंद्र मोदी और 2002 में गुजरात में चैनल पर क्‍यों लगाया था बैन

2001 में नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री बनने के बाद साल 2002 में कुछ ऐसा हुआ कि एनडीटीवी को पूरे गुजरात में एक दिन के लिए बैन कर दिया गया।

कैमरे पर हाथ आजमाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।(फोटो सोर्स: Indihumour)

एनडीटीवी के प्रमोटर प्रणय रॉय के घर सीबीआई रेड की खबर इन दिनों चर्चा में है। इस कार्रवाई पर कुछ लोगों का मनना है कि केंद्र की मोदी सरकार एनडीटीवी को जानबूझ कर टारगेट कर रही है। सीबीआई की इस कार्रवाई से एनडीटीवी भी खुलकर सरकार के खिलाफ उतर आया है। आपको बता दें कि नरेंद्र मोदी पहली बार 1999 में भाजपा का पक्ष रखने के ल‍िए बतौर पैनल‍िस्‍ट एनडीटीवी पर गए थे। उन द‍िनों एनडीटीवी की बड़ी धाक थी। मशहूर पत्रकार और लेखक नलिन मेहता ने अपनी किताब ‘टेलीविजन इन इंडिया’ में बताया है कि तब राजनीतिक पार्टियों के नेता एनडीटीवी पर आने के लिए बेचैन रहते थे। एनडीटीवी ने अपने हिंदी प्रोग्राम ‘रविवार’ में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा लाहौर तक बस सेवा शुरू करने के बाद डिबेट शो रखा था। इस डिबेट शो में तब के सूचना प्रसारण राज्यमंत्री रहे अरुण जेटली को बीजेपी का पक्ष रखने के लिए बतौर पैनलिस्ट इनवाइट किया गया था। शो की रिकॉर्डिंग से कुछ घंटे पहले अरुण जेटली ने कार्यक्रम में मौजूद रहने में असमर्थता जताते हुए शो के एंकर पंकज पचौरी से कहा कि आप अपनी गाड़ी बीजेपी ऑफिस भेज दीजिए मैं हिंदी में शानदार बोलने वाले अपने संगठन के एक नेता को आपके शो में भेजता हूं। जिस नेता की बात जेटली कर रहे थे वो नेता कोई और नहीं नरेंद्र मोदी थे।

ये पहला मौका था जब नरेंद्र मोदी टीवी के माध्यम से पूरे देश के सामने आए। इस शो में एंकर पंकज पचौरी ने मोदी को घेरते हुए कहा कि लाहौर बस सेवा को लेकर अटल जी तो ये कहते हैं..अटल जी तो वो कहते हैं। एंकर की बात सुनकर नरेंद्र मोदी शो में अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ ही हो गए थे और ये कह बैठे थे कि अटल जी तो कुछ भी बोलते रहते हैं।

एनडीटीवी पर अपने इस इंटरव्यू के लगभग दो साल बाद साल 2001 में नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बन गए। मुख्यमंत्री बनने के बाद साल 2002 में कुछ ऐसी घटना घटी कि एनडीटीवी को पूरे गुजरात में एक दिन के लिए बैन कर दिया गया। एक इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी ने बताया कि 2002 के गोधरा दंगों के दौरान एनडीटीवी के पत्रकार राजदीप सरदेसाई और बरखा दत्त की न्यूज रिपोर्ट से गुजरात में साम्प्रदायिक माहौल बिगड़ने का खतरा पैदा हो रहा था। मोदी ने बताया कि एनडीटीवी के पत्रकारों को मैंने फोन कर समझाने की कोशिश भी की कि आप लोग इस तरह की रिपोर्टिंग ना करें लेकिन फिर भी वो नहीं मानें और भुज में हनुमान जी का मंदिर तोड़ने की खबर चला बैठे। एनडीटीवी की इस खबर के चलते ही गुजरात में इसे एक दिन के लिए बैन करना पड़ा था।

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