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चुनावी हार के लिए राहुल जिम्मेदार नहीं: कांग्रेस

कांग्रेस ने गुरुवार को इन सुझावों को खारिज कर दिया कि राहुल गांधी को चार राज्यों में चुनावी हार की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। साथ ही पार्टी ने पांच राज्यों के चुनाव परिणामों पर निराशा जताई।
Author नई दिल्ली | May 20, 2016 02:46 am
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला

कांग्रेस ने गुरुवार को इन सुझावों को खारिज कर दिया कि राहुल गांधी को चार राज्यों में चुनावी हार की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। साथ ही पार्टी ने पांच राज्यों के चुनाव परिणामों पर निराशा जताई। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने महासचिव मुकुल वासनिक और प्रवक्ता आरपीएन सिंह के साथ पत्रकारों से कहा कि हर चुनाव के अपने मुद्दे होते हैं। हम किसी व्यक्ति (तरुण गोगोई या ओमन चांडी) के संदर्भ में राज्य चुनावों को नहीं देखते हैं। हम विश्लेषण करेंगे कि कहां बेहतर करने की जरूरत है। हम सौहार्दपूर्ण माहौल में इस पर चर्चा करेंगे। उनसे जब पूछा गया कि जिस तरह से राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने लोकसभा चुनावों में हार के बाद जिम्मेदारी स्वीकार की थी, क्या राहुल को इस बार जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करनी चाहिए।

इस पर उन्होंने कहा कि वे इस अनुचित सुझाव को पूरी तरह खारिज करते हैं। सुरजेवाला ने कहा कि यह रेखांकित किया जाना चाहिए कि कांग्रेस असम में 15 साल से और पिछले पांच साल से केरल में सत्ता में रही और सक्षम नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने इस सवाल को अप्रासंगिक करार देते हुए खारिज कर दिया कि क्या इस चुनावी हार के बाद प्रियंका गांधी संगठन में ज्यादा बड़ी भूमिका निभाएंगी। सुरजेवाला पर इन प्रश्नों की झड़ी लग गई कि क्या राहुल को जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए तो उन्होंने कहा हर चुनाव के अलग मुद्दे होते हैं और उन्हें किसी व्यक्ति से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए।

राहुल ने कहा कि हम नम्रता के साथ जनादेश स्वीकार करते हैं। चुनावों में जो पार्टियां जीती हैं, उन्हें मेरी शुभकामनाएं। उन्होंने ट्विटर पर पोस्ट में कहा कि मैं इस मौके का उपयोग चुनाव के दौरान किए गए प्रयासों के लिए प्रत्येक कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता और अपने सहयोगियों को धन्यवाद देने में करता हूं। जब तक हम लोगों का विश्वास और भरोसा नहीं जीत लेते हम कड़ी मेहनत करेंगे।

तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में पार्टी मामलों के प्रभारी वासनिक ने कहा कि इन राज्यों में चुनावी हार के कारणों की तत्काल पहचान करना संभव नहीं है। पार्टी को इन चुनावों में बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा थी। सुरजेवाला ने कांग्रेस मुक्त भारत के भाजपा के अभियान की आलोचना की और कहा कि कांग्रेस का रिश्ता भारत की आत्मा के साथ है और कोई संगठन या व्यक्ति उसे मिटाने में सक्षम नहीं है। उधर पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने असम में पार्टी की हार का कारण लोगों की बदलाव की इच्छा को बताया जहां तीन कार्यकाल से मुख्यमंत्री तरुण गोगोई कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे थे। परिणाम निराशाजनक हैं, लेकिन अप्रत्याशित नहीं हैं। केरल शायद बदलाव चाह रहा था। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और माकपा गठबंधन के सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के लिए खतरा उत्पन्न करने में विफल रहने पर उन्होंने कहा कि परिणाम के बावजूद कांग्रेस और वाम के बीच गठबंधन अत्यंत स्वाभाविक है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि केरल और असम में चुनाव परिणाम आश्चर्यजनक नहीं हैं लेकिन पश्चिम बंगाल के परिणाम को लेकर निराशा हुई है क्योंकि पार्टी को वहां काफी बेहतर की उम्मीद थी। रमेश ने कहा कि असम और केरल में जो हुआ, उससे हम पूरी तरह आश्चर्यचकित नहीं हैं। असम में हमें जबर्दस्त सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के परिणाम निराशाजनक हैं। मैं पश्चिम बंगाल में कम प्रदर्शन से आश्चर्यचकित हूं।

निश्चित तौर पर हमें काफी बेहतर करने की उम्मीद थी। हमें विश्वास था कि गठबंधन बहुत अच्छा करेगा। हमें कुछ विवरण देखने की आवश्यकता है। कांग्रेस के अन्य प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि पार्टी लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी लेकिन इस बात से संतोष है कि इसने चुनाव जीतने के लिए विभाजक और विनाशक राजनीति का सहारा नहीं लिया। लोगों ने हमें खारिज नहीं किया है, लेकिन लोगों ने हमें स्वीकार भी नहीं किया है। हम उनकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। हम जनादेश को स्वीकार करते हैं।

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