President Pranab Mukherjee Seeks Cooperation MPs For Parliament - Jansatta
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सरकार के लिए किसानों के हित सर्वोपरि

संसद के बजट सत्र के हंगामेदार रहने की आशंका व भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर अण्णा हजारे के राजधानी में धरना शुरू कर देने के बीच के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सभी सांसदों से अनुरोध किया कि वे सहयोग और परस्पर सद्भावना के साथ अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करें, लेकिन ऐसा कोई संकेत नहीं दिया […]

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के लिए पारंपरिक बग्घी से संसद भवन पहुंचे। (एक्सप्रेस फ़ोटो, रेणुका पुरी)

संसद के बजट सत्र के हंगामेदार रहने की आशंका व भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर अण्णा हजारे के राजधानी में धरना शुरू कर देने के बीच के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सभी सांसदों से अनुरोध किया कि वे सहयोग और परस्पर सद्भावना के साथ अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करें, लेकिन ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि विवादास्पद भूमि अधिग्रहण अध्यादेश में बदलाव करने की सरकार की कोई मंशा है।

राष्ट्रपति ने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों और उनके परिवारों के हितों की सुरक्षा को सर्वाधिक महत्व देती है। सरकार विधायी कामकाज सुचारू रूप से चलाने और संसद में ऐसे प्रगतिशील कानून बनाने के लिए निरंतर प्रत्यनशील रहेगी जो लोगों की इच्छा और आकांक्षाओं को दर्शाते हैं।

विभिन्न राजनीतिक दलों व संगठनों के विरोध के बीच सरकार ने विवादास्पद भूमि अधिग्रहण अधिनियम के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि इसमें उपयुक्त सुधार किए गए हैं ताकि आधारभूत ढांचे की महत्वपूर्ण जनपरियोजनाओं में प्रक्रियागत समस्याओं को कम करने के साथ ही किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि मेरी सरकार भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों और उनके परिवारों के हितों की सुरक्षा को सर्वाधिक महत्व देती है। क्षतिपूर्ति व मुआवजे के उनके हक सहित किसानों के हितों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देते हुए भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम में उपयुक्त सुधार किए गए हैं।

भूमि अधिग्रहण कानून में इन बदलावों के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे के सोमवार से शुरू हुए दो दिवसीय धरने और कांग्रेस व वामदलों की ओर से भी विरोध प्रदर्शन किए जाने की घोषणाओं के परिप्रेक्ष्य में सरकार का यह स्पष्टीकरण आया है। सरकार ने इस पहल पर अन्य दलों का सहयोग मांगा था लेकिन विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि वह इस विधेयक को संसद में परित नहीं होने देगा।

राष्ट्रपति ने अपने 20 पृष्ठ के अभिभाषण में कहा कि मेरी सरकार के सतत प्रयासों व नीतिगत पहलों के परिणामस्वरूप हमारी अर्थव्यवस्था पुन: उच्च विकास के रास्ते पर है। हाल के अनुमानों के मुताबिक, हमारी जीडीपी 7.4 फीसद की दर से वृद्धि कर रही है जिसने भारत को विश्व में तीव्रतम गति से वृद्धि करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना दिया है। सरकार की ओर से कई निर्णायक कदम उठाने के परिणामस्वरूप मुद्रास्फीति, विशेषकर खाद्य मुद्रास्फीति में रेकार्ड कमी आई है। पूंजी बाजार ऊंचाई के स्तर पर है और हमारे विदेशी मुद्रा भंडार में भी पर्याप्त वृद्धि हुई है।

अपने अभिभाषण में मुखर्जी ने आतंकवाद और वामपंथी उग्रवाद को देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बताया और कहा कि मेरी सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावित लोगों व प्रभावित राज्यों की सरकारों के समन्वित सहयोग के साथ पूर्णत: प्रतिबद्ध है। जम्मू कश्मीर के विस्थापितों के बारे में उन्होंने कहा कि यह विषय सरकार के एजंडे में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और उसने राज्य में विस्थापितों के लिए अनुकूल माहौल बनाने का प्रयास किया है। इसमें 60 हजार से अधिक कश्मीरी पंडित परिवारों के पुनर्वास को सुगम बनाना शामिल है और सरकार ने इस संबंध में कारगर कदम उठाए हैं जिनमें अन्य कार्यों के साथ साथ सरकारी नौकरियों, आर्थिक अवसर और सुरक्षा उपलब्ध कराना शामिल है।

उन्होंने कहा कि सरकार विधायी और प्रशासनिक ढांचों के जरिए काले धन पर नकेल कसने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुखर्जी ने कहा कि भ्रष्टाचार से निपटने के लिए अपेक्षाकृत कठोर कदम उठाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि लोकहित में लिए गए सद्भावनापूर्ण निर्णयों को संरक्षण प्रदान किया जाए ताकि नौकरशाही में विश्वास बढ़ाया जा सके। ‘अधिकतम सुशासन, न्यूनतम सरकार’ के सिद्धांत का हवाला देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार आधिकारिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर ध्यान दे रही है और प्रौद्योगिकी के माध्यम से निर्णय लेने के स्तरों को कम कर रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि मंत्रिसमूह की प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है और त्वरित निर्णय लेने पर जोर दिया जा रहा है। पेट्रोलियम और कोयला क्षेत्र से जुड़े विवादास्पद मामलों पर मुखर्जी ने कहा कि सरकार प्राकृतिक संसाधनों के आबंटन में पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है।

राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में कहा कि यह मानते हुए कि हमारा भविष्य हमारे पड़ोस से जुड़ा हुआ है, मेरी सरकार ने पड़ोसियों के साथ हमारे संबंधों में नई जान फूंकी है और यह दक्षिण एशिया में और अधिक सहकारिता व मेलमिलाप को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने इसके लिए चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख किया। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में भाजपा के तीन दिग्गज नेताओं श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उद्धृत किया।

तेज विकास के दावे:

सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.4 फीसद
मुद्रास्फीति में कमी, विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़ा
काले धन पर नकेल कसने के लिए सरकार प्रतिबद्ध
पड़ोसी मुल्कों से बेहतर हुए संबंध
कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए कई कदम

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