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हार्वर्ड में पढ़ाई जाएगी अंग्रेजी में बेहद तंग रहे पेटीएम के विजय शेखर शर्मा की कहानी

कभी जिस कंपनी के लिए विजय 6000 रुपये महीने में काम करते थे, उस कंपनी की नेट वर्थ नोटबंदी के बाद 162% की ग्रोथ के साथ 7300 करोड़ रुपये पहुंच गई है।

Paytm, Vijay Shekhar Sharmaपेटीएम के संस्थापक और सीईओ विजय शेखर शर्मा। (फाइल फोटो)

रिचार्ज प्लेटफॉर्म से पेमेंट बैंक बनने के पेटीएम के सफर को अब हार्वर्ड में बतौर केस स्टडी पढ़ाया जाएगा। प्रतिष्ठित हार्वर्ड बिजनेस स्कूल (एचबीएस) के इंडिया रिसर्च सेंटर (आईआरसी) ने इस पर एक केस स्टडी पब्लिश की है। इसका शीर्षक है-पेटीएम : बिल्डिंग अ पेमेंट नेटवर्क और अब यह हार्वर्ड के भीतर या बाहर टीचिंग के लिए मुहैया होगी। 2006 में मुंबई में स्थापित हुई आईआरसी अपने टीचर्स को क्षेत्र में उभरते ट्रेंड्स पर रिसर्च से मदद करती है। आईआरसी ने दक्षिण एशियाई क्षेत्र में बिजनेस को लेकर ज्यादातर केस स्टडीज और एचबीएस का समर्थन किया है।

स्टडी के लेखकों में से एक प्रोफेसर सुनील गुप्ता और एचबीएस में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के प्रोफेसर एडवर्ड डब्ल्यू कार्टर ने कहा कि भारत में पेटीएम भुगतान में क्रांति है और यह भारत के डिजिटल भविष्य का एक शानदार उदाहरण है। प्रोफेसर गुप्ता और प्रोफेसर दास नारायणदास ने इससे पहले फ्लिपकार्ट पर भी एक केस स्टडी की थी।

पेटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा ने कहा कि हमारा मिशन है कि हम आधे अरब भारतीयों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में लाएं और एेसा बिजनेस बनाएं, जिसपर भारत को गर्व हो। उन्होंने कहा कि भारतीयों को डिजिटल पेमेंट्स से जोड़ने और उन्हें वित्तीय समावेश का हिस्सा बनाने का सफर अभी शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि इतने प्रतिष्ठित संस्था के करिकुलम का हम हिस्सा बनने जा रहे हैं।

कौन हैं विजय शेखर शर्मा

अलीगढ़ के गांव विजयगढ़ में पैदा हुए 38 वर्षीय विजय शेखर शर्मा के लिए पेटीएम के सीईओ तक का सफर आसान नहीं था। पिता स्कूल टीचर थे, लिहाजा घर पर हर तरफ किताबें और पढ़ाई का माहौल था। विजय पढ़ाई में काफी तेज थे, इसलिए एक ही साल में दो क्लासेज की और 14 साल की उम्र में ही 12वीं पास कर ली थी। 12वीं के बाद समस्या तब शुरू हुई जब ये पता लगा कि इंजीनियर बनने के लिए होने वाला एंट्रेस एग्जामिनेशन अंग्रेजी में होता है। विजय की अंग्रेजी बहुत ज्यादा कमजोर थी, क्योंकि सारी स्कूलिंग हिंदी मीडियम स्कूल में हुई थी। एग्जामिनेशन में बैठे ऑब्जेक्टिव टाइप सवालों की बजाय जवाब पढ़कर उसके सही उत्तर पहचाने और 47वां रैक हासिल किया।

इसके बाद वह अमेरिका जाने चाहते थे, लेकिन फीस चुकाने के पैसे नहीं थे। इसके बाद उन्होंने 4 दोस्तों के साथ कंपनी खोली और फिर उसे 1 मिलियन डॉलर में बेच दिया। दिसंबर 2000 में वन नाइंटी सेवन कम्युनिकेशंस कंपनी शुरू की। पेटीएम को यही कंपनी चलाती है। ऐसा नाम इसलिए रखा क्योंकि बीएसएनएल का इंक्वायरी नंबर 197 हुआ करता था। 2006 तक अपनी ही कंपनी में 6000 रुपए महीने में काम किया। किसी रिश्तेदार से 24 परसेंट पर 8 लाख रुपए उधार लिए जो मुनाफा आता, वह ब्याज चुकाने में ही चला जाता।

पैसे की तंगी के कारण ट्यूशन क्लासेज भी ली, लेकिन फिर एक अन्य कंपनी के साथ जुड़कर पेटीएम का काम शुरू कर दिया और मुनाफा होता गया। कभी जिस कंपनी के लिए विजय 6000 रुपए महीने में काम करते थे उस कंपनी की नेट वर्थ नोटबंदी के बाद 162% की ग्रोथ के साथ 7300 करोड़ रुपए पहुंच गई है।

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