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आतंक का कोना

पाकिस्तान उन्हीं संगठनों पर नकेल कसने की कवायद करता है, जो पाकिस्तान में दहशत फैलाते हैं। जो संगठन भारत के खिलाफ सक्रिय हैं, उनकी तरफ वह टेढ़ी नजर से कभी नहीं देखता।

Author नई दिल्ली | May 19, 2016 03:25 am
जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर (फाइल फोटो)

प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैशे-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर और उसके साथियों के खिलाफ इंटरपोल का रेड कार्नर नोटिस जारी होना भारत की एक और कामयाबी कही जा सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की ओर से पेश पठानकोट वायुसेना अड्डे पर हुए आतंकी हमले से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर यह नोटिस जारी किया गया है। दस्तावेजों में जैशे-मोहम्मद की संलिप्तता जाहिर है। मगर इस नोटिस से पाकिस्तान पर शायद ही कोई असर पड़े। जब भी भारत आतंकवाद को सीमा पार से मिल रही मदद पर नकेल कसने की कोशिश करता है, पाकिस्तान उसमें अड़ंगा डालने से नहीं चूकता। पठानकोट हमले के बाद जब संयुक्त जांच की बात हुई तो पाकिस्तान ने अपना जांच दल फौरन भेज दिया, मगर जब जांच में जैशे-मोहम्मद का हाथ होने के प्रमाण मिले तो उसने भारतीय जांच दल को अपने यहां आने देने में आनाकानी शुरू कर दी। पाकिस्तान जानता है कि इंटरपोल का नोटिस तब प्रभावी होगा, जब जैश के आतंकी दूसरे देश में जाएंगे। फिर यह पहली बार नहीं है, जब मसूद अजहर या उसके दूसरे साथियों के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी किया गया है। भारतीय संसद और जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर आतंकी हमले को लेकर मसूद अजहर के खिलाफ पहले ही रेड कार्नर नोटिस जारी है, जिसकी तामील अभी तक नहीं हो पाई है। इसी तरह शाहिद लतीफ के खिलाफ नेपाल से भारतीय विमान अपहरण कर कंधार ले जाने के मामले में रेड कार्नर नोटिस जारी है। इसलिए पाकिस्तान इंटरपोल के ताजा नोटिस को बहुत गंभीरता से लेगा, दावा नहीं किया जा सकता।

दरअसल, पाकिस्तान उन्हीं संगठनों पर नकेल कसने की कवायद करता है, जो पाकिस्तान में दहशत फैलाते हैं। जो संगठन भारत के खिलाफ सक्रिय हैं, उनकी तरफ वह टेढ़ी नजर से कभी नहीं देखता। बल्कि उन्हें पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी की मदद हासिल है। ऊपर से पाकिस्तान को जैशे-मोहम्मद और लश्करे-तैयबा के संरक्षण को लेकर चीन का भी समर्थन हासिल है। अपनी पीठ पर चीन का हाथ होने के चलते पाकिस्तान भारत के खिलाफ कभी भी कोई मुद्दा लेकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने उपस्थित हो जाता है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब भारत ने देश के मानचित्र से जुड़ा मसौदा विधेयक तैयार किया तो पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गुहार लगाते हुए एक बार फिर जम्मू-कश्मीर मामले में संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में रायशुमारी का राग अलापना शुरू कर दिया। पठानकोट मामले में वह इसलिए जांच से कन्नी काट रहा है कि उसमें उजागर तथ्यों को विश्व बिरादरी के सामने रखा जाएगा, तब उनसे इनकार करना उसके लिए मुश्किल होगा। फिर वह अनेक मौकों पर दोहरा चुका है कि जैशे-मोहम्मद और लश्करे-तैयबा आतंकी संगठन नहीं हैं। इसलिए वह इंटरपोल के ताजा रेड कार्नर नोटिस को बहुत महत्त्व नहीं देने वाला। मगर इस नोटिस से भारत को एक फायदा यह होगा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन जैश और लश्कर को पाकिस्तान में मिली पनाह का समर्थन नहीं कर पाएगा। पाकिस्तान एक बार फिर आतंकवाद से लड़ने के मोर्चे पर बेनकाब हुआ है। जब दुनिया के तमाम देशों ने आतंकवाद को विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा और सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए इसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने की वचनबद्धता दोहराई तब पाकिस्तान ने भी उसमें अपना सुर मिलाया। मगर भारत के बार-बार प्रमाण देने के बावजूद वह अपने यहां पल रहे आतंकवादी संगठनों पर परदा डालने की कोशिश करता रहा है।

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