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हवाई क्षेत्र की रार : खमियाजा भुगत रहे विमान यात्री

पाकिस्तान के फैसले से भारत की यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया जाने वाली उड़ानें प्रभावित हुई हैं। उदाहरण के लिए काबुल से दिल्ली की उड़ान अब पाकिस्तान के रास्ते नहीं जा रही।

Author Updated: July 16, 2019 4:43 AM
आर्थिक संकट झेल रहा पाकिस्तान कब तक इस नुकसान को उठाता रहता है।

बालाकोट के आतंकी शिविर पर भारतीय वायु सेना की कार्रवाई के छह महीने बाद भी पाकिस्तान अपना हवाई क्षेत्र भारतीय विमानों के लिए खोलने की खातिर तैयार नहीं। पाकिस्तानी को भारतीय विमानन कंपनियों द्वारा मिलने वाले करोड़ों के शुल्क का नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर, भारतीय विमानन कंपनियों को दूसरे वायुमार्ग खोलने पड़े हैं, जो लंबे हैं और नतीजतन उड़ान का खर्च बढ़ रहा है। जाहिर है, दोनों देश आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। लेकिन राजनयिक दबाव का खेल भी चल रहा है। पाकिस्तान ने अपने तईं जो शर्तें रखी हैं, वह भारत को मान्य नहीं। पाकिस्तान ने शर्त रखी है कि भारत अग्रिम ठिकानों से अपने लड़ाकू विमान हटाए, तभी वह हवाई क्षेत्र खोलेगा। दूसरी ओर, भारतीय राजनयिकों का कहना है कि देखते हैं, आर्थिक संकट झेल रहा पाकिस्तान कब तक इस नुकसान को उठाता रहता है।

विभिन्न उड्डययन संस्थाओं ने अलग-अलग रिपोर्ट देनी शुरू की है, जिनसे जाहिर हुआ है कि पाकिस्तान के द्वारा अपना वायुक्षेत्र बंद किए जाने से भारत को 548 करोड़ रुपए और पाकिस्तान को 100 मिलियन डॉलर (लगभग 688 करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ है। भारत के करीब चार सौ विमानों ने पाकिस्तान हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल बंद कर दिया है। भारत की सरकारी विमानन कंपनी एअर इंडिया को जुलाई के पहले हफ्ते तक करीब 491 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसके अलावा इंडिगो को 31 मई तक 25.1 करोड़ का, स्पाइसजेट एवं गोएयर को क्रमश: 30.73 एवं 2.1 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान ने अपना पूरा वायुक्षेत्र बंद कर दिया है। उसके पास 11 वायुक्षेत्र हैं, जिसमें से नौ बंद हैं। फिलहाल जो दो हवाई रास्ते चालू हैं वे दक्षिण पाकिस्तान से होकर गुजरते हैं।

दरअसल, कोई भी विमानन कंपनी अन्य देशों में उड़ान भरने या गुजरने के लिए पैसे का भुगतान करती हैं। इसे ओवरफ्लाइट फीस या एअरटोल कहा जाता है। पाकिस्तान में, बोइंग 737 को वायुक्षेत्र का इस्तेमाल करने के लिए 580 डॉलर का भुगतान करना होता है। एअरबस 380 या बोइंग 747 के लिए यह किराया बढ़ जाता है। भारत में ओवरफ्लाइट और लैंडिंग चार्ज डीजीसीए तय करता है। हमारे यहां स्थानीय उड़ानों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से ज्यादा भगुतान करना होता है। इसके लिए तय किए गए रास्ते की नॉटिकल माइल्स के हिसाब से गणना होती है। साथ ही उड़ान का वजन भी देखा जाता है।

पाकिस्तान के फैसले से भारत की यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया जाने वाली उड़ानें प्रभावित हुई हैं। उदाहरण के लिए काबुल से दिल्ली की उड़ान अब पाकिस्तान के रास्ते नहीं जा रही। उसे ईरान से होकर अरब सागर होते हुए दिल्ली का रास्ता लेना पड़ रहा है। भारत से यूरोप जाने वाली उड़ानों की दूरी में 913 किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई है जो कुल यात्रा का 22 फीसद है और इस वजह से दूरियां दो घंटे तक बढ़ गई हैं। लंदन से दिल्ली या मुंबई जाने वाले यात्री अब औसतन 21000 रुपए तक अधिक खर्च कर रहे हैं। प्रभावित होने वाली एअरलाइंस में एशिया, यूरोप, अमेरिका और सुदूर पूर्व की एअरलाइंस कंपनियां जैसे कि सिंगापुर एअरलाइंस, ब्रिटिश एअरलाइंस, लुफ्थांसा, थाई एअरवेज, वर्जिन अटलांटिक शामिल हैं।

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