पचौरी की जमानत रद्द करने की याचिका खारिज - Jansatta
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पचौरी की जमानत रद्द करने की याचिका खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें टेरी के कार्यकारी उपाध्यक्ष आरके पचौरी को निचली अदालत द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी।

Author नई दिल्ली | March 5, 2016 2:59 AM
टेरी के पूर्व कुलपति आरके पचौरी

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें टेरी के कार्यकारी उपाध्यक्ष आरके पचौरी को निचली अदालत द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी। पचौरी यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी हैं। न्यायमूर्ति एसपी गर्ग ने आदेश सुनाते हुए कहा, ‘याचिका खारिज की जाती है।’

अदालत ने टेरी की एक पूर्व महिला शोध विश्लेषक की याचिका पर आदेश दिया जिसने आरोप लगाया है कि अगर पचौरी को खुला घूमने की अनुमति दी गई तो स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती। इससे पहले शिकायतकर्ता के वकील प्रशांत मेंहदीरत्ता ने अदालत में आरोप लगाया था कि पचौरी ने मामले में गवाहों को क्या कहना है इस बारे में बताया था और दावा किया कि इस बात को दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि उन्होंने जमानत की शर्तों का दुरुपयोग किया।

12 मार्च 2015 का आदेश जिसके जरिए पचौरी को अग्रिम जमानत दी गई थी, उसका उल्लेख करते हुए महिला ने कहा कि निचली अदालत पुलिस द्वारा इस बात को दिखाने के लिए एकत्र किए गए साक्ष्य को समझने में बुरी तरह विफल रही है कि अदालत के आदेशों का उल्लंघन करते हुए पचौरी सक्रिय रूप से टेरी के अधिकारियों के साथ संपर्क में थे और गवाहों को प्रभावित कर रहे थे।

हाई कोर्ट में याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने भी पचौरी की जमानत रद्द करने की मांग की जिसमें दावा किया गया है कि वह गवाहों को प्रभावित कर रहे हैं और जमानत की शर्तों का दुरुपयोग कर रहे हैं। पचौरी ने हालांकि पुलिस के दावों का खंडन करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में इस बात को दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है कि उन्होंने गवाहों को प्रभावित किया या मौजूदा मामले से संबंधित अन्य लोगों को प्रभावित किया या जांच में हस्तक्षेप किया।

हाल में पुलिस ने निचली अदालत में पचौरी के खिलाफ आइपीसी की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने), धारा 506 (आपराधिक धमकी), धारा 509 के तहत आरोप पत्र दायर किया था। पचौरी ने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों का खंडन किया है।

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