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संपादकीयः सहयोग का सफर

ट्रंप का ये दौरा दिल्ली और अमदाबाद केंद्रित होगा। पिछले साल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अमेरिकी शहर ह्यूस्टन में जिस तरह का आयोजन ‘हाउडी मोदी’ करवाया गया था, ठीक वैसा ही भव्य आयोजन ‘केम छो ट्रंप’ अमदाबाद में होगा। इससे ट्रंप को अमेरिका में बसे भारतीयों के समर्थन से जोड़ कर देखा जा रहा है।

Author Published on: February 13, 2020 2:12 AM
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है।

भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों का व्यापक दायरा दोनों देशों के मजबूत संबंधों को रेखांकित करता है। लंबे समय से दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते तो रहे ही हैं, विशेष रूप से रक्षा और रणनीतिक क्षेत्र में दोनों देश एक दूसरे के लिए पूरक बन चुके हैं। इस महीने की 24 और 25 तारीख को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दो दिन का भारत दौरा रिश्तों की नई इबारत लिख सकता है। अपने कार्यकाल में ट्रंप पहली बार भारत आ रहे हैं। राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल का यह आखिरी साल है। इस साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में वे फिर उतर रहे हैं। इस लिहाज से ट्रंप का यह भारत दौरा कई मायनों में महत्त्वपूर्ण है। वे भारत के साथ कई समझौते करेंगे, जिनमें रक्षा समझौते भी हैं। कारोबार बढ़ाने को लेकर भी समझौते होंगे। इससे भी बड़ी बात यह कि ट्रंप का भारत दौरा एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए भी बड़े संदेश लिए होगा। हिंद महासागर में चीन के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए भारत को किस तरह से साथ रखा जाए, इसकी रणनीति इसमें साफ दिखती है।

ट्रंप का ये दौरा दिल्ली और अमदाबाद केंद्रित होगा। पिछले साल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अमेरिकी शहर ह्यूस्टन में जिस तरह का आयोजन ‘हाउडी मोदी’ करवाया गया था, ठीक वैसा ही भव्य आयोजन ‘केम छो ट्रंप’ अमदाबाद में होगा। इससे ट्रंप को अमेरिका में बसे भारतीयों के समर्थन से जोड़ कर देखा जा रहा है। राष्ट्रपति चुनाव में वहां बसे भारतीय ट्रंप की जीत आसान बना सकते हैं। पिछले एक साल में अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की संख्या अड़तीस फीसद तक बढ़ी है। अमेरिका में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात, पंजाब, तमिलनाडु और केरल के लोग बड़ी संख्या में हैं। ट्रंप की यात्रा का दूसरा बड़ा मकसद भारत को एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली बेचना है।

अमेरिका इस 1.9 अरब डॉलर के इस सौदे के लिए काफी समय से लगा है। ट्रंप की इस यात्रा में इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसके अलावा दो दर्जन सी-हॉक हेलिकॉप्टरों की खरीद का भी समझौता होना है, जो ढाई अरब डॉलर से ज्यादा का सौदा होगा। कुल मिलाकर भारत की सैन्य ताकत बढ़ेगी और अमेरिका का कारोबार बढ़ेगा। पिछले साल दोनों देशों के बीच व्यापारिक मुद्दों पर जो तल्खी आ गई थी और आयात शुल्क के मुद्दे पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया था, वे अड़चनें ट्रंप के इस दौरे में दूर हो सकती हैं। अमेरिका अपने कई उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों के खत्म कराने के लिए बेचैन है। भारत भी अमेरिका को काफी सामान निर्यात करता है। इस लिहाज से अमेरिका भारत के लिए बड़ा बाजार है और भारत किसी कीमत पर ऐेसा कोई कदम नहीं उठाना नहीं चाहता, जिससे विदेश व्यापार प्रभावित हो।

ट्रंप का दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब भारत की अर्थव्यवस्था मंदी से जूझ रही है और देश में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के मुद्दे पर आंदोलन हो रहे हैं। अमेरिका भी किसी न किसी रूप में भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव के मुद्दे उठवा कर भारत की आलोचना करता रहा है। हालांकि इसका मकसद अपने हितों के लिए दबाव डालने से ज्यादा कुछ नहीं होता। ट्रंप चीन को साधे रखने के लिए भी भारत को जरूर मानते हैं। दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में उसे रोकने के लिए ही अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया, भारत और वियतनाम एकजुट हुए हैं। ट्रंप के भारत दौरे पर पाकिस्तान की निगाहें भी हैं। कश्मीर को लेकर वह पहले ही परेशान है। ट्रंप कश्मीर में ‘मध्यस्थता’ और ‘मदद’ के शिगूफे छोड़ते रहे हैं जो भारत को नागवार गुजरे हैं। ऐसे में यह देखने की बात है कि ट्रंप के इस दौरे से भारत को कितना और क्या हासिल होता है।

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