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संपादकीयः देशभक्ति का दायरा

देशभक्ति की परिभाषा शायद इतनी संकुचित कर दी गई है या उसे एक ऐसे छोटे फीते के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है कि कुछ लोग अपने हिसाब से किसी की भी देश के प्रति निष्ठा या लगाव को नाप कर तत्काल उसका दोष सिद्ध कर देते हैं।

Author December 21, 2017 2:20 AM

देशभक्ति की परिभाषा शायद इतनी संकुचित कर दी गई है या उसे एक ऐसे छोटे फीते के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है कि कुछ लोग अपने हिसाब से किसी की भी देश के प्रति निष्ठा या लगाव को नाप कर तत्काल उसका दोष सिद्ध कर देते हैं। क्रिकेट खिलाड़ी विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के विवाह को लेकर भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। मध्यप्रदेश के एक भाजपा विधायक की नजर में उन दोनों की देशभक्ति इसलिए संदिग्ध हो गई कि उन्होंने देश के भीतर विवाह करने के बजाय इटली में यह संस्कार संपन्न कराया। विधायक पन्नालाल शाक्य का तर्क है कि उन्होंने पैसा देश के भीतर कमाया, पर दूसरे देश में जाकर अरबों रुपए खर्च किए। यह सही है कि अगर वे अपने देश के किसी शहर में विवाह समारोह करते तो यहां के राजस्व में उसका कुछ अंशदान होता। पर सवाल है कि ऐसा नहीं हुआ, तो उससे विराट और अनुष्का की देशभक्ति में कहां से कमी आ गई। बहुत सारे राजनेता विदेशी अस्पतालों में अपना और अपने परिजनों का इलाज कराने जाते हैं, उसमें भी विदेशी सरकारों को राजस्व मिलता है, तब क्या उनकी देशभक्ति संदिग्ध है!

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अगर विदेश में विवाह करने से देशभक्ति संदिग्ध हो जाती है, तो फिर विदेश में पढ़ाई करने, वहां जाकर नौकरी, व्यापार, सैर-सपाटा आदि करने को भी इसी नजर से क्यों नहीं देखा जाना चाहिए। विवाह नितांत व्यक्तिगत मामला होता है। कोई अपना या अपने बच्चों का विवाह समारोह किस जगह करना चाहता है, उस पर रोक नहीं लगाई जा सकती। विराट और अनुष्का ने इटली में विवाह क्यों किया, इसके पीछे हो सकता है उनका आपसी कोई वादा रहा हो। हो सकता है, वे भारत में विवाह समारोह करके बेवजह शोर-शराबा न करना चाहते रहे हों। वे अपने विवाह को नितांत व्यक्तिगत दायरे में संपन्न कराना चाहते रहे हों। यह पहली बार नहीं है कि किसी भारतीय नागरिक ने विदेश में जाकर अपना विवाह समारोह संपन्न कराया। बहुत सारे विदेशी लोग भारत आकर राजस्थान के राजसी महलों में विवाह संपन्न कराते हैं।

उसी तरह अगर विराट और अनुष्का ने इटली जाकर विवाह किया तो उसमें हर्ज क्या है। भाजपा के नेता देशभक्ति को इतने संकुचित दायरे में बांध कर क्यों रखना चाहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति उनके मन के मुताबिक कोई काम नहीं करता, तो उन्हें उसकी देशभक्ति संदिग्ध नजर आने लगती है। विराट कोहली भारतीय टीम के खिलाड़ी हैं और जब भी वे मैदान में उतरते हैं, भारत की साख का खयाल रखते हुए खेलते हैं। इस पर क्या किसी को कभी संदेह हुआ! अनुष्का ने हिंदी फिल्मों के जरिए विदेशों में भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया है। यह ठीक है कि उन्होंने पैसा यहां से कमाया है, पर उस कमाए हुए पैसे पर उन्होंने नियम के मुताबिक कर भी चुकाया है। उसके बाद उनके पास जो पैसा बचा, उस पर उनका पूरा अधिकार है कि वे उसे कब, कैसे और कहां खर्च करें। किसी के अपनी कमाई खर्च करने से उसकी देशभक्ति को नहीं नापा जा सकता, न ही नापा जाना चाहिए। अगर देशभक्ति का दायरा इतना संकुचित कर दिया जाएगा, तो बहुत सारी चीजें कुछ लोगों की मर्जी पर निर्भर होकर रह जाएंगी। बहुत सारी चीजें देशभक्ति के नाम पर दम तोड़ देंगी और पूरा समाज एक कबीलाई तंत्र में तब्दील होता चला जाएगा। इसलिए देशभक्ति को लेकर भाजपा नेताओं को अपनी दृष्टि व्यापक बनाने की जरूरत है।

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