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संपादकीयः दो-टूक संदेश

ट्रंप की भारत के प्रधानमंत्री के साथ फोन पर बातचीत इस बात का संकेत है कि कश्मीर मसले को लेकर अमेरिका भी चिंतित है और अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिए जाने के भारत के फैसले के साथ है।

Author Published on: August 21, 2019 2:18 AM
ट्रंप के झूठ से हर कोई सकते में है।

पिछले एक पखवाड़े में भारत के खिलाफ पाकिस्तान ने जिस तरह के भड़काऊ और गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए हैं, वे क्षेत्रीय शांति के लिए बड़े खतरे का संकेत हैं। भारत ने अमेरिका को यह बात साफ तौर पर कह दी है। सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन पर आधे घंटे की बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना साफ कह दिया कि जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर देने के भारत के फैसले के बाद पड़ोस के कुछ नेताओं की बयानबाजी से माहौल बिगड़ा है। दरअसल, पिछले कुछ दिनों में जिस तरह के घटनाक्रम सामने आए हैं वे इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि कश्मीर मसले पर पाकिस्तान कुछ न कुछ ऐसा करता रहेगा जिससे वैश्विक नेताओं की नींद भी उड़ी रहेगी। ट्रंप की भारत के प्रधानमंत्री के साथ फोन पर बातचीत इस बात का संकेत है कि कश्मीर मसले को लेकर अमेरिका भी चिंतित है और अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिए जाने के भारत के फैसले के साथ है। फोन-वार्ता की कूटनीति तब शुरू हुई जब पिछले शुक्रवार को अनुच्छेद 370 को बेअसर किए जाने के मामले को सुरक्षा परिषद में ले जाने के ठीक पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति को फोन किया था और उनसे समर्थन मांगा था।

लेकिन पाकिस्तान का यह पैंतरा उस पर ही उलटा पड़ गया है। ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री के साथ बात करने के बाद इमरान खान को फोन कर नसीहत दी कि भारत के खिलाफ जो भी बोलें, संभल कर बोलें। हालांकि यह देखने वाली बात है कि इमरान खान ट्रंप की कितनी सुनते हैं और कितना उस पर अमल करते हैं। इस वक्त पाकिस्तान जिस तरह से बौखलाया हुआ है वह उसकी हताशा का परिचायक है। सुरक्षा परिषद में भी पाकिस्तान ने चीन की मदद से जो दांव चला था, उसमें भी वह पिट गया है। इससे भी उसकी बौखलाहट बढ़ना स्वाभाविक है। यह पहले ही स्पष्ट था कि सुरक्षा परिषद का दरवाजा खटखटाने से पाकिस्तान को कुछ हासिल नहीं होने वाला, लेकिन वह इसे ही अपनी कामयाबी बता कर खुश है कि उसने कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण कर दिया है। हालांकि दुनिया हकीकत समझ रही है, इसीलिए चीन को छोड़ कर कोई भी देश, यहां तक कि इस्लामी देशों का संगठन (ओआइसी) भी उसके साथ नहीं है।
ट्रंप के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान किसी बड़ी साजिश को अंजाम दे सकता है। पाकिस्तान का अब तक जो चरित्र और रिकार्ड रहा है, उसे देखते हुए ऐसी शंकाओं को खारिज भी नहीं किया जा सकता।

तीन दशकों से ज्यादा समय से वह सीमापार आतंकवाद जारी रखे हुए है। छह अगस्त को इमरान खान ने कहा था कि पुलवामा जैसे हमले हो सकते हैं, फिर पंद्रह अगस्त को यह कह दिया कि कश्मीर की वजह से युद्ध हुआ तो विश्व जिम्मेदार होगा। पाकिस्तान की छटपटाहट अब इस बात को लेकर ज्यादा है कि कश्मीर मसले पर उसकी कूटनीतिक चालें धरी रह गईं और जिस तरह वह दुनिया को गुमराह करना चाह रहा था, उसमें उसे निराशा हाथ लगी। इसके अलावा, भारत के प्रधानमंत्री से फोन पर बात करने के बाद ट्रंप ने इमरान खान को फोन कर संयम बरतने की जो नसीहत दी, उसका मतलब पाकिस्तान अच्छी तरह समझ रहा है। जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करना भारत का अंदरूनी मामला है, इसमें पाकिस्तान को किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए। अब सभ्य पड़ोसी होने के नाते उसे सबसे पहले सीमापार आतंकवाद बंद करना होगा। यही बात ट्रंप ने उसे समझाने की कोशिश की है।

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