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संपादकीयः वृद्धि का अर्थ

बुधवार को आए जीडीपी के आंकड़े अर्थव्यवस्था को लेकर आश्वस्त करते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर

बुधवार को आए जीडीपी के आंकड़े अर्थव्यवस्था को लेकर आश्वस्त करते हैं। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी किए गए इन आंकड़ों के मुताबिक अक्तूबर से दिसंबर 2017 की तिमाही में जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर बढ़ कर 7.2 फीसद पहुंच गई। इसके उत्साहजनक होने का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि यह पिछली पांच तिमाहियों में सबसे ज्यादा है। यही नहीं, ताजा आंकड़ों के साथ भारत ने जीडीपी की वृद्धि दर के मामले में फिलहाल चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। ये आंकड़े ऐसे वक्त आए हैं जब कुछ समय से बैंक घोटाला लगातार सुर्खियों में रहा है। ऐसे माहौल में, जीडीपी की ताजा खबर से सरकार ने राहत महसूस की होगी। पिछले वित्तवर्ष में तीसरी तिमाही में वृद्धि दर सात फीसद थी। जबकि मौजूदा वित्तवर्ष में जुलाई से सितंबर के दौरान की वृद्धि दर 6.3 फीसद दर्ज की गई थी, जिसे अब संशोधित कर 6.5 फीसद कर दिया गया है। यानी ऐन पिछली तिमाही के मुकाबले आधा फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सालाना विकास दर के अनुमान को भी संशोधित किया गया है। पहले अनुमान था कि वित्तवर्ष 2017-18 में वृद्धि दर 6.5 फीसद रहेगी; अब इसे तनिक बढ़ा कर 6.6 फीसद कर दिया गया है।

अगर खंडवार देखें तो पिछली यानी तीसरी तिमाही में खनन को छोड़ कर बाकी सभी क्षेत्रों में बढ़ोतरी हुई है। औद्योगिक सूचकांक में करीब तीन चौथाई हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग का रहता है, वहीं कृषि भी अर्थव्यवस्था का एक विशाल क्षेत्र है। मैन्युफैक्चरिंग में 8.1 फीसद और कृषि में 4.1 फीसद की वृद्धि और खनन में 0.1 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को ही आठ बुनियादी क्षेत्रों यानी कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट तथा बिजली की वृद्धि दर के आंकड़े आए। इनके मुताबिक इन आठ क्षेत्रों की वृद्धि दर जनवरी में 6.7 फीसद रही, जबकि यह आंकड़ा दिसंबर में 4.2 फीसद और नवंबर में 7.4 फीसद रहा। जैसा कि अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी कहा है, भारतीय अर्थव्यवस्था ने साल 2016 में हुई नोटबंदी के नकारात्मक असर तथा पिछले साल लागू की गई जीएसटी प्रणाली से संबंधित व्यवधानों से उबरना शुरू कर दिया है। इस तरह, ताजा आंकड़ों ने जहां मौजूदा वित्तवर्ष की अंतिम तिमाही में अच्छे नतीजे आने की संभावना जताई है वहीं अगले वित्तवर्ष को लेकर भी उम्मीद बढ़ाई है। अलबत्ता मूडीज ने अगले वित्तवर्ष की बाबत वृद्धि दर के अपने अनुमान को 7.6 फीसद पर यथावत रखा है।

बहरहाल, खुशनुमा आंकड़ों के बीच, यह उचित नहीं होगा कि अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी नई चुनौतियों या समस्याओं को भुला दिया जाए। सरकार ने बजट में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य बढ़ा कर 3.5 फीसद कर दिया है, जो कि पहले 3.2 फीसद था। राजकोषीय घाटे का लक्ष्य बढ़ाना तमाम अर्थशास्त्रियों को तो नागवार गुजरा ही, खुद प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के कई सदस्यों ने भी इस पर नाराजगी जताई। फिर, तीसरी तिमाही के उत्साहजनक आंकड़े ऐसे वक्त आए हैं जब पीएनबी घोटाले की वजह से बैंकिंग क्षेत्र साख के संकट से गुजर रहा है। रोज घोटाले की नई-नई परतें खुल रही हैं और अन्य बैंकों के भी धोखाधड़ी का शिकार होने की खबरें आ रही हैं। फिलहाल कहना मुश्किल है कि यह अध्याय कहां जाकर बंद होगा। इतना जरूर कहा जा सकता है कि इससे आने वाले दिनों में कारोबार पर बुरा असर पड़ सकता है। जाहिर है, नोटबंदी और जीएसटी के असर से उबरने के संकेतों के बीच देश की अर्थव्यवस्था एक नई चुनौती से रूबरू है।

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