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संपादकीयः जानलेवा सफर

सड़क पर वाहन चलाते समय लापरवाही का अंजाम कितना त्रासद हो सकता है, रविवार की सुबह दिल्ली-हरियाणा सीमा पर हुआ एक बड़ा हादसा इसका उदाहरण है।

Author January 9, 2018 01:59 am
इस हादसे में मारे गए सक्षम यादव राष्ट्रीय स्तर की भारोत्तोलन प्रतियोगिताओं में विजेता बनने के बाद 2016 में स्पेन और फिर 2017 में मास्को में आयोजित विश्व चैंम्पियनशिप में विजेता रहे थे।

सड़क पर वाहन चलाते समय लापरवाही का अंजाम कितना त्रासद हो सकता है, रविवार की सुबह दिल्ली-हरियाणा सीमा पर हुआ एक बड़ा हादसा इसका उदाहरण है। एक कार से लौट रहे राष्ट्रीय स्तर के पांच भारोत्तोलक खिलाड़ियों की जान महज इस शौक के चलते चली गई कि उन्हें हरियाणा के मुरथल के पराठे खाना था और कोहरे के बावजूद बेलगाम रफ्तार से गाड़ी चलाना था। यों सड़क हादसे में किसी भी नागरिक की मौत उतनी ही दुखद है। लेकिन इस हादसे ने नाहक ही राष्ट्रीय स्तर के पांच होनहार खिलाड़ियों की जान ले ली। फिर, उनके परिवारों पर जो बीतेगी उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकेगी। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में यह तथ्य सामने आया कि गाड़ी में शराब की बोतलें थीं और यह हादसा नशे में वाहन चलाने की वजह से हुआ हो सकता है।

बिना किसी को नुकसान पहुंचाए शौक पूरा करना कोई गलत बात नहीं है। लेकिन अगर उस शौक के चलते दूसरों की या खुद अपनी जान की परवाह न की जाए तो उससे दूर रहने की ही सलाह दी जानी चाहिए। गौरतलब है कि इस हादसे में मारे गए सक्षम यादव राष्ट्रीय स्तर की भारोत्तोलन प्रतियोगिताओं में विजेता बनने के बाद 2016 में स्पेन और फिर 2017 में मास्को में आयोजित विश्व चैंम्पियनशिप में विजेता रहे थे। सक्षम के अलावा, इसी दुर्घटना में जान गंवा देने वाले टीकमचंद को भी अच्छे भारोत्तोलकों में शुमार किया जाता था। बाकी सभी खिलाड़ियों की भी उपलब्धियां खासे महत्त्व की थीं। लेकिन सड़क पर गाड़ी की बेलगाम रफ्तार ने उन सबकी असमय ही जान ले ली। इस तरह की यह कोई अकेली घटना नहीं है। यों भी दुनिया में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं भारत में होती हैं और उनमें जान गंवाने या फिर घायल होने वालों की संख्या के लिहाज से भी भारत पहले नंबर पर है। यह एक जगजाहिर तथ्य है कि सबसे ज्यादा हादसे वाहन चालकों की लापरवाही और गलती के साथ-साथ नियम-कायदों की व्यापक अनदेखी के चलते होते हैं।

हमारे देश में निर्धारित अधिकतम सीमा से भी ज्यादा रफ्तार से गाड़ी चलाना बहुतों को रोमांच का या अपनी हैसियत प्रदर्शित करने का जरिया लगता है। सख्त निषेध-कानूनों के बावजूद शराब पीकर वाहन चलाने की आदतों पर रोक नहीं लग पा रही है। इसी तरह, तय गति से ज्यादा तेज गाड़ी चलाने की प्रवृत्ति भी बेलगाम बनी हुई है। बहुत बार नशे और तेज रफ्तार का शौक, दोनों का मेल रहता है। सड़क पर गाड़ी चलाने से संबंधित अन्य नियम-कायदों का पालन करना भी लोगों को जरूरी नहीं लगता है। जबकि न केवल कानूनों का ध्यान रखना, बल्कि अपनी और सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों की परवाह करना एक सामान्य नागरिक-बोध का हिस्सा होना चाहिए। यही सबसे बड़ी मुश्किल भी है कि कानून भर बना देने से वाहन चलाने को लेकर लापरवाही की प्रवृत्ति पर काबू नहीं पाया जा सकता। प्रशासनिक सक्रियता के साथ-साथ आम लोगों के बीच जागरूकता फैलाना भी उतना ही जरूरी है। अच्छी सड़कें निर्बाध सफर के लिए होती हैं। अगर वैसी सड़कें बेलगाम रफ्तार और लगातार हादसों की वजह बनती हैं तो इसका मतलब यही है कि सुरक्षित यातायात के नियम-कायदे अभी बहुत-से लोगों की आदत का हिस्सा नहीं बन पाए हैं।

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