ताज़ा खबर
 

संपादकीयः हताशा के कदम

पाकिस्तान जानता है कि उसके इन कदमों का भारत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उसके द्विपक्षीय व्यापार खत्म कर देने से भारत का नहीं, ज्यादा नुकसान उसी का होने वाला है। जब भारत ने कुछ दिनों पहले पाकिस्तान का तरजीही राष्ट्र का दर्जा खत्म कर दिया था और वहां से आने वाली कुछ वस्तुओं पर कर लगा दिया था तो वह बहुत हताश हुआ था।

Author Published on: August 9, 2019 2:17 AM
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान। (रॉयटर्स फोटो)

जम्मू-कश्मीर में धारा तीन सौ सत्तर खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट चरम पर है। उसे समझ नहीं आ रहा कि क्या करना चाहिए। किस तरह प्रतिक्रिया व्यक्त करनी चाहिए। इसी बौखलाहट में इमरान खान सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार खत्म करने का फैसला किया। भारतीय उच्चायुक्त को वापस जाने को कह दिया और कश्मीर मसले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने का निर्णय लिया। भारत के स्वतंत्रता दिवस को काले दिन के रूप में मनाने का भी फैसला किया है। भारत ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पाकिस्तान जानता है कि उसके इन कदमों का भारत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उसके द्विपक्षीय व्यापार खत्म कर देने से भारत का नहीं, ज्यादा नुकसान उसी का होने वाला है। जब भारत ने कुछ दिनों पहले पाकिस्तान का तरजीही राष्ट्र का दर्जा खत्म कर दिया था और वहां से आने वाली कुछ वस्तुओं पर कर लगा दिया था तो वह बहुत हताश हुआ था। इसकी प्रतिक्रिया में उसने भी भारत से भेजी जाने वाली करमुक्त वस्तुओं पर भारी कर थोप दिया था। लेकिन इतने भर से उसने संतोष नहीं हुआ, तो उसने तरजीही राष्ट्र का दर्जा खत्म करने के फैसले को अंतरराष्ट्रीय अदालत में चुनौती देने की भी धमकी दी थी। अब उसी ने द्विपक्षीय व्यापार खत्म करने का फैसला किया है।

दरअसल, भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार मुख्य रूप से कश्मीर वाले हिस्से से होता रहा है। उसमें भी भारत से बहुत कम चीजें पाकिस्तान में भेजी जाती रही हैं। उनमें ज्यादातर कश्मीर में पैदा होने वाले फल, सूखे मेवे, दस्तकारी की वस्तुएं होती थीं। जबकि पाकिस्तान से बहुत सारी चीजें भारत में आती थीं। इस तरह भारत को इस फैसले से कोई खास नुकसान नहीं होगा। जो चीजें वह पाकिस्तान भेजता रहा है, उनका बहुत बड़ा बाजार भारत में ही है। फिर अनेक देश उन चीजों के खरीदार हैं। जबकि पाकिस्तान की वस्तुएं अगर भारत नहीं पहुंचेंगी, तो उसे खासा नुकसान उठाना पड़ेगा। दूसरे सार्क देशों के साथ भी उसके व्यापारिक संबंध अच्छे नहीं हैं, सो उसे अपने माल की खपत के लिए नया बाजार तलाशना आसान नहीं होगा।

जहां तक संयुक्त राष्ट्र में अपील करने के उसके फैसले की बात है, वह पाकिस्तान के पक्ष को कितनी गंभीरता से लेगा, दावा नहीं किया जा सकता। भारत शुरू से कहता रहा है कि कश्मीर समस्या उसका अंदरूनी मामला है, और वह बिना बाहरी मध्यस्थता के खुद इसका हल निकाल लेगा। इसलिए धारा तीन सौ सत्तर हटने के बाद न तो अमेरिका ने पाकिस्तान के पक्ष में कोई प्रतिक्रिया दी है और न संयुक्त राष्ट्र की तरफ से कोई आपत्ति दर्ज हुई है। कश्मीर को मिली स्वायत्तता संविधान के एक अस्थाई प्रावधान के तहत थी, उसे समाप्त कर भारत ने उसे संघीय ढांचे में गूंथने का फैसला किया है, तो इस पर संयुक्त राष्ट्र को भी क्या आपत्ति हो सकती है! फिर पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंधों को घटाने से भारत को क्या नुकसान होने वाला है! यह पहला मौका नहीं है, जब पाकिस्तान ने भारतीय उच्चायुक्त को वापस भेजने का फैसला किया है। सामान्य तनातनी की स्थितियों में भी वह इस तरह के कदम उठाता रहा है। यह कदम भी उसका हताशा में ही उठाया गया है। अगर उसे अपनी सुरक्षा की इतनी ही चिंता है, तो अपने यहां पनाह पाए आतंकी संगठनों पर नकेल कसने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 संपादकीय: संकट और उम्मीदें