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नियमों को धता बता कर बन रहीं वेब सीरीज

ओटीटी पर दिखाई जाने वाली वेब सीरीजों पर हिंसा, अश्लीलता और अभद्र भाषा के आरोप लगने के बाद केंद्र सरकार ने ओटीटी को नियमों के दायरे में लाने की कोशिश की थी। मगर देखने में आ रहा है कि नियमों की यह लगाम बेमानी हो गई है।

Bollywoodओटीटी प्लेटफॉर्म पर बोल्ड विषयों वाली वेब सीरीज की बाढ़ आई हुई है।

आरती सक्सेना

ओटीटी पर दिखाई जाने वाली वेब सीरीजों पर हिंसा, अश्लीलता और अभद्र भाषा के आरोप लगने के बाद केंद्र सरकार ने ओटीटी को नियमों के दायरे में लाने की कोशिश की थी। मगर देखने में आ रहा है कि नियमों की यह लगाम बेमानी हो गई है। दूसरी ओर निर्माता ऐसे विषय उठा रहे हैं, जो सामाजिक परहेज के दायरे में आते रहे हैं। मसलन इन दिनों गे, लेस्बियन या समलैंगिक संबंधों पर बनी वेब सीरीजों की ओटीटी पर बाढ़ आई हुई है। शायद ही कोई ऐसा ओटीटी प्लेटफार्म होगा, जो ऐसे बोल्ड विषयों को नहीं उठा रहा हो।

आजकल ओटीटी प्लेटफॉर्म पर समलैंगिक संबंधों वाले विषयों की भरमार देखने को मिल रही है। दर्शकों का एक वर्ग है जो इस तरह के विषयों पर बनी फिल्मों और सीरीज को पसंद भी कर रहा है। मगर दूसरा वर्ग इसे नापसंद करने वालों का भी है। लगभग 25 साल पहले जब समलैंगिक संबंधों को केंद्र में रखकर नंदिता दास और शबाना आजमी की फिल्म ‘फायर’ आई थी, तो देश में हंगामा मच गया था। मगर आज ओटीटी पर धड़ल्ले से ऐसे विषय परोसे और पसंद किए जा रहे हैं। समलैंगिक संबंधों पर बनी ज्यादातर वेब सीरीज महिला निर्माताओं द्वारा बनाई गई हैं। फिर वह दीपा मेहता हों, एकता कपूर हों या जोया अख्तर।

नियम पड़े हाशिए पर

बीते दिनों केंद्र सरकार ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बढ़ती हिंसा और अश्लीलता को देखते हुए कुछ नियमों की घोषणा की थी। सरकार की कोशिश दर्शकों की उम्र के हिसाब से कार्यक्रमों को दिखाने की थी। मगर नियम बेमानी नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर नियमों की लगाम के बावजूद निर्माता बेलगाम हैं। सरकार के नियमों को धता बताते हुए ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बोल्ड विषयों वाली वेब सीरीज की बाढ़ आई हुई है।

इनमें अल्ट बालाजी की ‘द मैरिड वूमन’ की काफी चर्चा है। इसमें दो औरतों के रिश्तों की कहानी है, जो एक दूसरे की ओर आकर्षित हैं। एकता कपूर की ‘हिज स्टोरी’ भी समलैंगिक रिश्तों पर है। नीरज धायवन की ‘गीली पुच्ची’ नेटफ्लिक्स पर दिखाई जा रही है। वीआरवन बैनर की ‘लव मुबारक’ दो ‘गे’ पुरुषों की कहानी है। ‘अजीब दास्तां है’ ये दो औरतों के प्रेम संबंधों की कहानी है, जो अलग अलग क्षेत्रों से जुड़े हैं।

‘अजीब दास्तां है ये’ में भी दो औरतों की प्रेम कहानी है जो अलग अलग क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं। जोया अख्तर की वेब सीरीज ‘मेड इन हैवन’ मे दो वेडिग प्लानर एक दूसरे के प्यार में पड़ जाते हैं लेकिन बाद में लड़की को पता चलता है कि उसका पे्रमी गे है। वेब सीरीज ‘रोमिल एंड जुगल’ दो पुरुषों की प्रेम कहानी है। ‘फोर मोर शार्ट्स’ चार लड़कियों की कहानी है। इनमें एक लेस्बियन जिम ट्रेनर है। दूसरी वकील, तीसरी पत्रकार और चौथी बेरोजगार है। चारों दोस्त हैं और जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीना चाहती हैं। वे समलैंगिकता को गलत नहीं मानती हैं। ‘अदर लव स्टोरी’ दो लड़कियों की प्रेम कहानी है।

सामाजिक स्वीकृति का अभाव

हालांकि भारतीय समाज में समलैंगिक संबधों को मान्यता नहीं है चाहे कानून उसके हक में हो। समाज ऐसे रिश्तों को हिकारत से देखता है। दूसरे क्षेत्रों की तरह ग्लैमर की दुनिया में, बॉलीवुड में भी समलैंगिक हैं मगर वे खुलकर अपने संबंधों को स्वीकार करने में झिझकते हैं। इसके उलट हॉलीवुड में कई सितारे समलैंगिक हैं और वे इसे स्वीकार करने में नहीं झिझकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह बात कही है कि दो वयस्क जिस तरह चाहें अपनी जिंदगी के फैसले ले सकते हैं। बावजूद कानूनी मान्यता के भारतीय समाज की अपनी मान्यताएं हैं। उसका मानना है कि दो विपरीत लिंगियों में आकर्षण प्राकृतिक है जबकि समान लिंगियों में आकर्षण नैतिक नहीं है।

बॉलीवुड में भी आकर्षण

सामाजिक अस्वीकृति के विषयों को लेकर बॉलीवुड के निर्माताओं में आकर्षण रहा है। लिहाजा फिल्मों में समलैंगिकता को कहानी का विषय भी बनाया गया और फिल्म में उसे आटे में नमक जितना भी पेश किया। ‘गर्लफ्रेंड’, ‘अलीगढ़’, ‘माय ब्रदर निखिल’, ‘कपूर एंड संस’, ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’, ‘शुभ मंगल और ज्यादा सावधान’ ऐसी फिल्में हैं जिनमें समलैंगिकता को जगह दी गई। 2010 की फिल्म ‘आइएम’ चार कहानियों से मिलकर बनी थी।

इनमें एक कहानी गे रिश्तों पर आधारित थी। इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। फिल्म में राहुल बोस ने प्रमुख भूमिका निभाई थी। चाहे फिल्मों में समलैंगिकता पर कैमरा चलाया जाता रहा हो, मगर निर्माता जल्दी ही ऐसे बोल्ड विषयों पर फिल्में बनाने से बचते हैं। समाज का एक वर्ग अगर इसे पसंद करता है, तो दूसरा खुलकर इसका विरोध भी करता रहा है।

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