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ह्यूस्टन में मोदी-ट्रंप: कूटनीति और राजनीति पर दूरगामी असर

डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिका के अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर इस आयोजन में अपना हित दिखा। ट्रंप का पूरा ध्यान हर समुदाय को अपनी तरफ करने में है।

Author नई दिल्ली | September 24, 2019 5:43 AM
Howdy Modi Event Today in Houston Live: ह्यूस्टन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप।(फोटो-ANI)

दीपक रस्तोगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 से 27 सितंबर तक सात दिनों के दौरे पर अमेरिका में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ह्यूस्टन में भारतीय समुदाय को उनका संबोधित करने का बहुचर्चित आयोजन हो चुका है। कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों के लिए इस आयोजन के दूरगामी परिणाम संभावित माने जा रहे हैं। स्पष्ट रूप से दुनिया भर में अमेरिका को लेकर भारत की कामयाब कूटनीति का संकेत गया है। अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में हिस्सा लेने के साथ ही मोदी करीब 20 द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे।

भारत के लिए कूटनीतिक लाभ
दुनिया के सबसे ताकतवर देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर बड़ी भीड़ का जुटना कामयाब कूटनीति का संकेत मानी जा रही है। अमेरिका में प्रवासी भारतीयों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी-भारतीय वहां सबसे अमीर एथनिक समूह हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर कह चुके हैं कि अमेरिका में भारतीय समुदाय भारत की विदेश नीति का हिस्सा है। ह्यूस्टन की यात्रा या भाषण के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच की अनौपचारिक केमिस्ट्री सामने आई। इससे धाक बढ़ी। इस आयोजन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा का रुख किया, जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कश्मीर का मुद्दा उठाने की तैयारी में हैं। ऐसे में अमेरिका जैसे बड़े देश को अपने साथ दिखाकर भारत ने बड़ा संदेश दिया है। 2019 लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद प्रधानमंत्री की यह पहली अमेरिकी यात्रा है। इसलिए भी राजनीतिक तौर पर उनके लिए यह हाउडी मोदी आयोजन अहम साबित हुआ।

ट्रंप को क्या मिलेगा फायदा
अमेरिका का टेक्सास एक रूढ़िवादी क्षेत्र माना जाता है, जिसका झुकाव डेमोक्रेट्स की तरफ ज्यादा रहता है। 1970 से अमेरिकी भारतीय भी डेमोक्रेट्स को ज्यादा पसंद करते रहे हैं। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिका के अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर इस आयोजन में अपना हित दिखा। ट्रंप का पूरा ध्यान हर समुदाय को अपनी तरफ करने में है। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में शिरकत कर ट्रंप ने न केवल अमेरिकी भारतीयों को रिझाने की कोशिश की, बल्कि टेक्सास में भी अपनी पकड़ और मजबूत करने की कवायद की है। ट्रंप हमेशा से उन नेताओं के मुरीद रहे हैं, जिन्होंने जनता के बीच करिश्मा कायम किया। ओसाका (जापान) में जी-20 सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा भी था कि मैं मोदी के व्यक्तित्व से प्रभावित रहता हूं। जब भी उनसे (मोदी से) मिलता हूं तो ऊर्जा प्राप्त करता हूं। जाहिर है, हाउडी मोदी के मंच पर ट्रंप ने जो कहा, वह उनके चुनाव भाषण के रूप में देखा गया।

आर्थिक मोर्चे पर निवेश का रास्ता
भारत और अमेरिका परंपरागत, वैकल्पिक व नवीनीकृत ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का दायरा कई गुना बढ़ाने वाले हैं। अमेरिका प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों से होने वाली मुलाकात में ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश का रास्ता खुला है। भारत की पेट्रोनेट वहां बड़ा निवेश करने जा रही है और भारत में एनएनजी की बड़े पैमाने पर आपूर्ति होने वाली है। मेक इन इंडिया के तहत अमेरिकी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए राजी करने की योजना पर काम चल रहा है। हजारों डॉलर के निवेश की योजना पर काम चल रहा है, जिसका स्वरूप मोदी की यात्रा के बाद सामने आएगा। भारत में अगले 15 साल में साढ़े चार फीसद की दर से ऊर्जा खपत बढ़ेगी। अगले 20 साल के लिए एक अनुमान के मुताबिक विश्व भर में ऊर्जा खपत का करीब दस से 11 फीसद तक भारत में खर्च हो सकता है। इस लिहाज से भारत में ऊर्जा का एक बड़ा बाजार है। ऐसे में अमेरिका की नजर भारत के बढ़ते ऊर्जा बाजार पर है। कई अमेरिकी कंपनियों ने भारत में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की इच्छा जताई है। अमेरिका और भारत में कारोबार तनाव भी कम हुआ है।

धारा 370 पर कवायद
कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के बाद भारत सरकार शक्तिशाली देशों को अपने पक्ष में खड़ा दिखाने की कवायद में जुटी है। ह्यूस्टन में मोदी-ट्रंप का एक मंच पर दिखने की राजनीतिक में अहम हिस्सा इस मुद्दे का भी रहा। पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी- अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मामले की असलियत समझाना। क्योंकि पाकिस्तान ने कश्मीर को दुनिया में मानवाधिकार हनन का प्रोपैगेंडा बना रखा था। अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद आज भारत विजेता की स्थिति में है। अरब देश, यूरोपीय यूनियन (ईयू), अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन सभी भारत के साथ खड़े नजर आते हैं। ऐसे में मोदी के अमेरिकी दौरे को भारत को कूटनीतिक जीत दिलाने वाले नेता के दौरे के तौर पर देखा गया है।

क्या है जानकारों की राय

यह आयोजन तब हुआ है, जब भारत-अमेरिका के बीच कारोबार को लेकर तनाव है, कश्मीर को लेकर बड़ी-बड़ी बयानबाजी हुई है। ह्यूस्टन में इतिहास रचा गया। अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं और ऐसे में अमेरिका में दूसरे वर्गों से ज्यादा तेजी से बढ़ रहे भारतीय समुदाय से मिलने वाले फायदे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
-सुरेश के गोयल, पूर्व राजनयिक

पाकिस्तान की दिक्कत उसकी आंतरिक राजनीति है। पाकिस्तान भारत के विरोध पर जिंदा है। इसलिए अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पाक ने जिस भी देश से समर्थन पाने की कोशिश की, उसे हर जगह मुंह की खानी पड़ी। दूसरी ओर, भारत की कूटनीति का असर सामने आया। दुनिया के ताकतवर देश भारत के साथ खड़े हैं।
– विष्णु प्रकाश, पाकिस्तान में काम कर चुके पूर्व राजनयिक

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