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मद्रास हाई कोर्ट का 79 द्रमुक विधायकों के निलंबन पर रोक लगाने से इनकार

लेकिन न्यायालय ने विपक्ष के नेता एमके स्टालिन और एक अन्य द्रमुक सदस्य की दायर याचिकाओं पर राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है।

Author चेन्नई | August 23, 2016 4:10 AM
मद्रास उच्च न्यायालय (फोटो-विकिपीडिया)

मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा से 79 द्रमुक विधायकों के निलंबन पर अंतरिम रोक लगाने से सोमवार (22 अगस्त) को इनकार कर दिया। लेकिन न्यायालय ने विपक्ष के नेता एमके स्टालिन और एक अन्य द्रमुक सदस्य की दायर याचिकाओं पर राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। इन याचिकाओं में इन्होंने विधानसभा से अपने सामूहिक निलंबन को चुनौती दी है और सभी कार्यवाहियों को अवैध, अधिकारातीत और असंवैधानिक घोषित करने का निर्देश देने की मांग की है। अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा- चूंकि यह सदन के कामकाज का मामला है और यह आदेश विधानसभा अध्यक्ष का पारित किया गया है, इसलिए हम अंतरिम आदेश पारित करने को तैयार नहीं हैं। लेकिन प्रार्थना को निष्फल बनाने का कोई सवाल नहीं होगा क्योंकि अंत में प्रस्ताव की वैधता पर फैसला करना ही होगा क्योंकि इसके अन्य प्रभाव हो सकते हैं।

पीठ ने याचिकाकर्ताओं- स्टालिन और द्रमुक विधायक त्यागराजन को विधानसभा अध्यक्ष पी धनपाल और तमिलनाडु विधानसभा सचिव को निजी नोटिस जारी करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई की तारीख एक सितंबर तय की। मामला जब सुनवाई के लिए सामने आया, स्टालिन के वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन परासरन ने कहा कि यह विधानसभा के इतिहास में पहली बार है कि विपक्षी पार्टी द्रमुक के सभी विधायकों के सामूहिक निलंबन का प्रस्ताव पारित किया गया। अपनी याचिका में स्टालिन ने खुद को और अन्य निलंबित विधायकों को सदन के मौजूदा सत्र में शामिल होने की अनुमति का एक अंतरिम निर्देश देने की न्यायालय से मांग की थी। उन्होंने कहा कि जब सदन में ध्वनिमत से यह प्रस्ताव पारित किया गया था, उस समय वह और द्रमुक के ज्यादातर विधायक सदन में मौजूद नहीं थे।

बीती 17 अगस्त को राज्य की विधानसभा में तब काफी हंगामा हुआ था जब विधानसभा अध्यक्ष पी धनपाल ने द्रमुक के सभी विधायकों को सदन की कार्रवाई में कथित तौर पर खलल डालने के लिए सदन से बाहर कर दिया था और उन्हें एक हफ्ते के लिए निलंबित भी कर दिया था। शुरुआत में 80 विधायकों को निलंबित किया गया था। बाद में एक विधायक का निलंबन वापस ले लिया गया क्योंकि हंगामे के दौरान वह सदन में मौजूद ही नहीं थे। यह हंगामा अन्नाद्रमुक के एक विधायक की स्टालिन के खिलाफ टिप्पणियों के बाद शुरू हुआ था। अपने विधायकों के निलंबन के खिलाफ द्रमुक ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और कहा था कि सभी विधायकों का एक साथ निलंबन गैरकानूनी है।

इससे पहले सुबह द्रमुक विधायकों ने अपने 79 सहयोगियों का निलंबन खत्म करने से विधानसभा अध्यक्ष पी धनपाल के मना करने के बाद सदन से वॉकआउट कर दिया। मुख्यमंत्री जयललिता ने सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेने पर मुख्य विपक्षी पार्टी और उसके प्रमुख करुणानिधि पर निशाना साधा। धनपाल ने कहा कि द्रमुक सदस्य सदन के बाहर उनकी आलोचना कर रहे हैं और भीतर में उनका निलंबन रद्द करने का अनुरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि इस पर विचार करने का सवाल ही नहीं उठता।

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