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कानूनी मंजूरी, पर संयुक्त राष्ट्र में भारत की दूरी

गूगल ने इस साल चार जून के डूडल को 50 साल के प्राइड और एलजीबीटीक्यू समुदाय की स्वीकृति को समर्पित किया। गूगल ने कई स्लाइड्स में प्राइड परेड के सफर को दिखाया। 1969 से हर 10 साल के बाद प्राइड परेड में किस तरह के बदलाव आए।

पिछले साल भारत में भी समलैंगिकता को कानूनन स्वीकार कर लिया गया।

इस साल समलैंगिक अधिकारियों को लेकर संयुक्त राष्ट्र में मतदान के दौरान भारत ने दूरी बना ली। इस मुद्दे पर मतदान में भारत ने हिस्सा नहीं लिया। संयुक्त राष्ट्र ने इस मुद्दे पर मतदान प्रक्रिया में किस देश ने क्या फैसला लिया, इसकी सूची चार्ट के रूप में जारी की है। इस प्रक्रिया में भारत अनुपस्थित रहा, लेकिन पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने मतदान में हिस्सा लिया। पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर असहमति जताई। इसमें कुल 37 देशों ने हिस्सा लिया। समलैंगिक (एलजीबीटीक्यू) समुदाय के अधिकारों के समर्थन में 27 देशों ने मतदान किया और इसके खिलाफ 12 देशों ने वोट डाले। वहीं इस प्रक्रिया से भारत समेत सात देश बाहर रहे।

दरअसल, न्यूयॉर्क में होने वाले एलजीबीटी परेड को गर्वोत्सव (प्राइड परेड) की मान्यता मिली हुई है। इस परेड में इस कम्युनिटी के लोग हाथों में एक छह रंगों वाला झंडा लेकर निकलते हैं। इस साल प्राइड के 50 साल पूरे होने के जश्न की मेजबानी न्यूयॉर्क अंतरराष्ट्रीय एलजीबीटी प्राइड परेड ने किया। इसे स्टोनवैल 50 के रूप में जाना जाता है। पूरे एलजीबीटीक्यू समुदाय के लिए ये परेड एक तरह के विशेष उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। इसके जरिए वे दैहिक चेतना, खुद की पहचान और यौनिक मुक्ति का ऐलान करते हैं।

न्यूयॉर्क शहर की क्रिस्टोफर स्ट्रीट पर प्राइड परेड का आयोजन किया जाता है। यह समलैंगिकों का गर्वोत्सव है। अब धीरे-धीरे भारत के तमाम शहरों में भी गर्वोत्सव (प्राइड परेड) प्रचलित हो रही है। गूगल ने इस साल चार जून के डूडल को 50 साल के प्राइड और एलजीबीटीक्यू समुदाय की स्वीकृति को समर्पित किया। गूगल ने कई स्लाइड्स में प्राइड परेड के सफर को दिखाया। 1969 से हर 10 साल के बाद प्राइड परेड में किस तरह के बदलाव आए। पिछले साल भारत में भी समलैंगिकता को कानूनन स्वीकार कर लिया गया।

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