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मुकदमा जीतने वालीं दोनों वकील खुद भी हैं ‘जोड़ा’

अरुंधति काटजू और मेनका गुरुस्वामी ने 18 जुलाई को टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में दुनिया के सामने अपना प्यार कबूला। इंटरव्यू के दौरान मेनका और अरुंधती ने कहा कि यह लड़ाई आसान नहीं थी।

एडवोकेट मेनका और अरुंधति

समलैंगिक समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ने वाली वकील अरुंधति काटजू और मेनका गुरुस्वामी का नाम पिछले दिनों दुनिया के शीर्ष 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में आया था। अमेरिका की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘टाइम’ की ओर से जारी सूची में महज तीन भारतीय नाम शामिल थे, जिनमें मुकेश अंबानी के अलावा ये दोनों वकील शामिल हुईं। इन दोनों वकीलों ने खुलासा किया है कि ये ‘कपल’ (जोड़ा) हैं। अरुंधति ने हाल ही में हैशटैग साड़ी ट्विटर ट्रेंड को फॉलो करते हुए अपनी साथी मेनका के साथ वाली फोटो ट्विटर पर पोस्ट की थी।

अरुंधति काटजू और मेनका गुरुस्वामी ने 18 जुलाई को टीवी चैनल सीएनएन को दिए गए इंटरव्यू में दुनिया के सामने अपना प्यार कबूला। इंटरव्यू के दौरान मेनका और अरुंधती ने कहा कि यह लड़ाई आसान नहीं थी। बहुत लंबी और मुश्किल जंग थी। आखिरकार वह पांच जजों वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच को इस बात के लिए मनाने में कामयाब रहीं कि समलैंगिक संबंध अपराध नहीं हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मिली यह जीत सिर्फ उनके पेशे की जीत नहीं थी बल्कि निजी कामयाबी भी थी। मेनका और अरुंधति दोनों ही सफल वकील हैं। मेनका ने हावर्ड स्कूल से एलएलएम और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डीफिल किया है। वह बर्लिन के इंस्टीट्यूट आॅफ एडवांस्ड स्टडीज की फेलो रह चुकी हैं। यही नहीं वह कोलंबिया लॉ स्कूल, येल लॉ स्कूल, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ जैसे विश्वप्रसिद्ध शिक्षण संस्थानों की विजिटिंग फैकल्टी भी हैं। वहीं अरुंधति ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से एलएलएम की डिग्री हासिल की है।

सुप्रीम कोर्ट में मिली ऐतिहासिक जीत के लगभग एक साल बाद एडवोकेट मेनका और अरुंधति ने खुलासा किया है वह खुद भी समलैंगिक जोड़ा हैं। सीएनएन को दिए इंटरव्यू में दोनों ने न सिर्फ धारा 377 के खिलाफ अपनी जीत के बारे में बताया, बल्कि अपने रिश्ते को भी सार्वजनिक किया। इंटरव्यू के दौरान जब टिप्पणी की गई कि 377 के खिलाफ जीत सिर्फ वकीलों के तौर पर बड़ी जीत नहीं थी, बल्कि एक जोड़े (कपल) के तौर पर भी थी, तो वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि साल 2013 में (फैसला विरुद्ध आने पर) एक वकील के तौर पर, देश के नागरिक के तौर पर नुकसान हुआ था, वह व्यक्तिगत नुकसान था। एक ‘अपराधी’ होना अच्छा नहीं लगता, जिसे दूसरे मामलों पर बहस के लिए एक वकील के रूप में कोर्ट में वापस जाना पड़ता है।

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