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इस पत्रकार से इंदिरा गांधी के थे अच्छे संबंध, गिरफ्तारी के वक्त थाने में अधिकारी ने छू लिए थे पांव

जब कुलदीप साहब स्टेट्समैन में थे। तब वह इंदिरा की नीतियों और फैसलों की आलोचना करते थे। यह तब था जब इंदिरा से उनके अच्छे संबंध थे। तब उनका रवैया तानाशाही...

पत्रकारिता की दुनिया में आप ने एक नाम सुना होगा। कुलदीप नैयर। वैसे तो इनका परिचय कराने की जरूरत नहीं। फिर भी शॉर्ट में बताएं तो- नैयर साहब के कई रूप रहे हैं। संपादक, रिपोर्टर, लेखक और डिप्लोमैट। उसूलों से समझौता करना मानो इन्होंने सीखा ही न ही था। लिखते इतना जबर थे कि इंदिरा गांधी तक ने मान लिया था कि उनकी छवि इस शख्स की टीका-टिप्पणियों से प्रभावित हुई थी। वह भी तब जब वह इंदिरा के बेहद करीबी माने जाते थे।

आज नैयर साहब का जन्मदिन है। इस मौके पर पढ़वा रहे हैं आपको उनके दो रोचक किस्से। पहला तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी से जुड़ा है। वह बताते हैं कि “इंदिरा और उनके अच्छे संबंध थे। पहले वह लंबे बाल रखती थीं। एक दिन उन्होंने बाल कटाए। मुझसे पूछा कैसी लग रही हूं। मैं बोला- आप पहले भी अच्छी लगती थीं। अब और सुंदर लग रही हैं।”

जब कुलदीप साहब स्टेट्समैन में थे। तब वह इंदिरा की नीतियों और फैसलों की आलोचना करते थे। यह तब था जब इंदिरा से उनके अच्छे संबंध थे। चूंकि तब उनका रवैया कुछ तानाशाही (आपातकाल के दौरान) वाला हो गया था। नैयर साहब के लेखों और कॉलमों से लोगों पर असर पड़ा था। खुद इंदिरा ने भी यह बात मानी थी कि उनके लेखों और कॉलमों से इंदिरा की छवि पर असर पड़ा था।

दूसरा किस्सा नैयर साहब की गिरफ्तार से जुड़ा है। उन्हें आपात्काल के दो दिन बाद गिरफ्तार किया गया था। कारण था उनका पत्रकारों के एक प्रदर्शन का नेतृत्व करना। उन्हें तुगलक रोड पुलिस थाने ले जाया गया। वहां एक आईपीएस अधिकारी तैनात था। उसने वहां उनके पैर छुए। जब नैयर साहब ने पूछा कि क्या हुआ।

वह बोला-आप मेरे गुरु हैं। आपकी किताब पढ़कर खत्म की है। डिस्टैंट नेबर्स। बेहद पसंद आई। यह मेरी ड्यूटी है, इसलिए गिरफ्तार करना पड़ रहा है। यह उनकी शख्सियत ही थी कि तब उन्हें वहां पांच सितारा होटल से नाश्ता मंगाकर खिलाया गया था।

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