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बाखबर: रहिमन असमय के परे

जब कोई बड़ा फंसता है तो पता नहीं क्यों एक साथ ‘अच्छा’ भी लगता है और ‘बुरा’ भी लगता है। कभी लगता है कि अच्छा है कि न्याय सबके लिए बराबर है, फिर लगता है कि यह बदलेखोरी भी हो सकती है!

Author Published on: August 25, 2019 3:55 AM
हिरासत के दौरान पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी. चिदंबरम।

हाय! कैसे दुर्दिन आ गए हैं कि कल तक जो सलाम बजाया करते थे, अब आंखें दिखा रहे हैं! कल तक जो परम आदरणीय, महामहिम और सरजी सरजी कहलाते थे, आज ‘भगोड़ा’ और ‘चोर’ कहे जा रहे हैं।

एक ‘दुष्ट’ चैनल ने तो अपनी स्क्रीन पर ‘वांटेड’ का पोस्टर बना कर ही चिपका दिया!
ज्यों ही अदालत ने फैसला दिया कि वह ‘स्कैम के किंगपिन’ हैं और उनको ‘बेल’ नहीं दी जा सकती, उसी क्षण से एंकर अदालत के फैसले के कागज लेकर बैठ गए और गाने लगे ‘किंगपिन’, ‘किंगपिन’!

एक एंकर देर तक चहकता दिखा, मानो उसी ने ‘बेल’ के लिए मना किया हो! दूसरे ने खिलखिला कर कहा कि बहुत दिन हो गए ‘बेल’ पर मौज करते हुए। कानून के आगे कोई वीआइपी नहीं हो सकता। अदालत ने सही फैसला दिया है। अब कोई नहीं बचा सकता।
कल तक जो एंकर उनको अपने स्टूडियो में बुलाने के लिए उनके दरवाजे की धूल चाटते रहते थे, अब वही आंख दिखा रहे थे। एक एंकर कहता रहा : वो षड्यंत्र का ंिकंगपिन हैं। एक भाजपा प्रवक्ता ने दुहत्थड़ लगाया- वो ‘माफिया का मुखिया’ हैं।

अदालत के फैसले के बाद कथित ‘किंगपिन जी’ ज्यों ही गायब हुए कि एंकरों को ठोकने का एक और नायाब मौका मिल गया।
वे दिन भर पूछते रहे कि ‘किंगपिन जी’ कहां जा छिपे हैं? कहां छिपाए गए हैं? हमने तो आखिरी बार ‘किंगपिन जी’ को बड़ी अदालत के परिसर से निकलते हुए शाम के पांच बजे देखा था!

एक ने लाइन लगा दी : उनके घर पर सीबीआई ने ‘दो घंटे में हाजिर हो’ वाला नोटिस लगा दिया है। फिर एक और चैनल ने लाइन चिपकाई कि सीबीआई ने ‘लुक आउट’ नोटिस निकाला है। ‘फ्लाइट रिस्क’ है। फिर सचित्र लिखा कि वो ‘वांटेड’ हैं!
जब एंकर ही किसी के ‘अमित्र’ हो जाएं, तो फिर उसका भगवान भी बेली नहीं!

फिर भी, जब कोई बड़ा फंसता है तो पता नहीं क्यों एक साथ ‘अच्छा’ भी लगता है और ‘बुरा’ भी लगता है। कभी लगता है कि अच्छा है कि न्याय सबके लिए बराबर है, फिर लगता है कि यह बदलेखोरी भी हो सकती है!

एक चैनल की चर्चा में यह बात भी आई कि दस साल पहले ‘उनके’ साथ ‘इनने’ यही किया था, जो आज ‘इनके’ साथ हो रहा है। भाजपा प्रवक्ता बोला कि उसके ‘कर्मा’ (कर्मफल) ने उसे पकड़ लिया है।

इस बीच ‘किंगपिन जी’ के वकील चैनलों में आते रहे और बताते रहे कि वे हर सवाल का जवाब पहले दे चुके हैं। पचास घंटे की पूछताछ में शामिल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है। शुक्रवार को सुनवाई है। उनको सबसे बड़ी अदालत में जमानत की प्रार्थना का हक तो है न!

इसी क्रम में कांग्रेसी प्रवक्ता कहते रहे कि यह ‘राजनीतिक बदलेखोरी’ है। ‘किंगपिन जी’ के सुपुत्र जी भी बोले कि यह ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’ है। इसके बाद एक शाम अचानक, कथित ‘किंगपिन जी’ यानी पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम ने अपने वकीलों की फौज के साथ कांग्रेस मुख्यालय में अंग्रेजी में एक पांच मिनटी प्रेस कान्फ्रेंस कर सबको चकित कर दिया। चौबीस घंटे गायब होने का रहस्य खोलते हुए उन्होंने कहा कि आजादी सबका हक है, कि वे पिछले चौबीस घंटे में अपनी टीम के साथ अदालती कागजात तैयार करने में व्यस्त रहे हैं, कि वे निर्दाेष हैं, कि सीबीआई की ‘चार्जशीट’ में भी उनको दोषी नहीं ठहराया गया है, कि उनके खिलाफ झूठा प्रचार किया जा रहा है, कि सात महीने बाद ‘बेल रिजेक्ट’ की गई है, कि उनको दुख है कि उनको कानून का ‘भगोड़ा’ कहा गया, जबकि वे न्याय के लिए तैयारी कर रहे थे, कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी सुनवाई शुक्रवार को होनी है, कि शुक्रवार तक वे अपना सिर ऊंचा किए सब कुछ ‘फेस’ करेंगे, कि उम्मीद है कि सीबीआई-ईडी कानून के अनुसार आचरण करेंगे।…

इसके बाद वे तुरंत मुख्यालय से निकल गए। चैनल एक-दूसरे से पूछते रहे कि ‘किंगपिन जी’ कहां गए? किधर गए?
फिर कांग्रेस मुख्यालय में सीबीआई के अफसर आते दिखे, जिनके अंदर जाने में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने बाधा डाली, लेकिन तब तक खबरियों को खबर लग चुकी थी कि वे अपने ‘जोेरबाग’ वाले घर में ही हैं और इसके बाद एक घंटे लंबा वह ड्रामा हुआ, जिसे कैमरों ने किसी फिल्मी ड्रामे की तरह लाइव दिखाया।

घर के फाटक बंद पाकर सीबीआई के दस अफसरों की टीम चारदीवारी फांद कर अंदर पहुंची, लेकिन कैमरे बाहर ही रहे। रात के आठ का वक्त। हर चैनल पर हलचल। चैनलों के कैमरे गेट से ही अंदर तक रौशनी मार कर ताक-झांक के चक्कर में दिखते रहे। रिपोर्टर बताते रहे कि सीबीआई वाले जोरबाग के घर के मुख्य दरवाजे को घेर कर खड़े हैं, लेकिन दवाजा नहीं खोला जा रहा। फिर बताया गया कि सीबीआई ने मकान को चारों ओर से घेरने के लिए पूरे सौ अफसर लगा दिए हैं। पुलिस भी आ गई है। फिर खबर आई कि बातचीत चल रही है। फिर खबर आई कि ‘किंगपिन जी’ को सीबीआई गिरफ्तार करके ले जाने वाली है। फिर एक सफेद कार में वे सीबीआई मुख्यालय ले जाए जाते दिखे।

पचपन मिनट चले इस ड्रामे पर एक पत्रकार ने टिप्पणी की कि उनको पहले ही समर्पण कर देना चाहिए था, बेकार में फजीहत कराई। एक पक्षधर पत्रकार बोलीं कि कांग्रेस ‘पेरानॉयड’ हो चली है।

शुक्रवार की सुबह सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में भी कथित किंगपिन जी यानी चिदंबरम को राहत नहीं मिली। अदालत ने कह दिया कि ‘बेल’ की अर्जी पर सोमवार को विचार होगा। सच कहा है:

‘रहिमन असमय के परे हित अनहित ह्वै जाय!
बधिक बधै मृग बान सौं रुधिरै देत बताया!’

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