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पैकिंग प्लास्टिक के लिए अपनाने होंगे नए नियम

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से रोक है।

Author Published on: September 11, 2019 12:42 AM
सांकेतिक तस्वीर।

आशीष दुबे
एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के उपयोग, विनिर्माण, विक्रय, वितरण, भंडारण, परिवहन व आयात या निर्यात पर रोक का मुद्दा इन दिनों चर्चा में है। इस श्रेणी में खास तौर पर कैरी बैग (पॉलीथीन थैलियां) में समान देने पर दुकानदारों का इनकार खरीदार से झगड़े का भी कारण बन रहा है लेकिन पॉलीथीन थैलियों पर रोक और जुर्माना लगाने का हवाला देकर दुकानदार जैसे तैसे ग्राहकों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, एकल योग्य प्लास्टिक की श्रेणी में आने वालीं दूध की थैलियां, रिफाइंड ऑयल, बिस्कुट, नमकीन, गुटखा, तंबाकू आदि की बिक्री बे-रोकटोक जारी है। एक तरह की थैली पर रोक लेकिन दूसरी तरह की थैली पर रोक नहीं, लोगों के बीच असली विवाद की वजह है।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से रोक है। लेकिन इसमें उन उद्यमों या ब्रांड, जिनका प्लास्टिक या पॉलीथीन उनकी पैकिंग का अनिवार्य हिस्सा है, उन्हें नए नियम का पालन करना होगा। यह नया नियम एक्सटेंडेड प्रॉड्यूसर रिस्पांसलिबिटी (ईआरपी) यानी विस्तारित निर्माता जिम्मेदारी है। जिसका अनुपालन अमूल, डाबर, हल्दीराम, डीएस समेत असंख्य संख्या में ब्रांडेड उत्पादन बनाने वाली कंपनियों को करना होगा।

ईआरपी के तहत ऐसी कंपनियां जिनका प्लास्टिक या पॉलीथीन पैकिंग का अनिवार्य हिस्सा है, उन्हें उस प्लास्टिक या पॉलीथीन का इस्तेमाल होने के बाद इकट्ठा कर अंतिम चरण के निस्तारण तक की जिम्मेदारी उठानी होगी। मसलन यदि एक कंपनी जो अपने उत्पादन की पैकिंग के लिए साल भर में दस टन प्लास्टिक या पॉलीथीन का इस्तेमाल करेगी, उसे साल भर के भीतर 10 टन प्लास्टिक या पॉलीथीन का पुनर्चक्रण सुनिश्चित करना होगा। पुनर्चक्रित प्लास्टिक या पॉलीथीन का इस्तेमाल वेस्ट टू एनर्जी संयंत्रों एवं सीमेंट बनाने वाली कंपनियों में किया जाएगा।

जानकारों का मानना है कि ईआरपी का अनुपालन तय करने से जगह-जगह फैलने या उड़ने वाली पॉलीथीन (कैरी बैग) से पूरी तरह से छुटकारा मिल जाएगा क्योंकि ये पॉलीथीन या प्लास्टिक उत्पाद की पैकिंग का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। वहीं, बड़े ब्रांड या नामचीन कंपनियां अपने उत्पाद की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले पॉलीथीन आदि को पुनर्चक्रित कर प्रदूषण रोकथाम में मदद करेंगी। बताया गया है कि ईआरपी की मंजूरी मिलने के बाद कंपनी जितना पॉलीथीन या प्लास्टिक पैकिंग के लिए इस्तेमाल करेगी, उसका सौ फीसद निस्तारण सुनिश्चित करेगी लेकिन जरूरी नहीं है कि वह पॉलीथीन या प्लास्टिक उसी के उत्पादन का हो।

जैसे थैलीबंद दूध की आपूर्ति करने वाली कंपनी की जिम्मेदारी उसी मात्रा में पॉलीथीन का निस्तारण करने की होगी लेकिन जरूरी नहीं होगा कि निस्तारित होने वाली पॉलीथीन दूध की ही हो। मुख्य मुद्दा यह है कि ऐसी प्लास्टिक या पॉलीथीन, जो एक बार इस्तेमाल के बाद फेंक दी जाती है, वह समुद्र, नदी या सड़कों पर न जाए बल्कि रीसाइकलिंग इकाइयों में पहुंचे, इसकी व्यवस्था करनी है।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नोएडा कार्यालय के मुताबिक पॉलीथीन थैलियों के अलावा एक बार निस्तारित योग्य कप, गिलास, प्लेट, चम्मच, टंबलरों के उपयोग, विनिर्माण, विक्रय, वितरण, भंडारण, परिवहन, आयात या निर्यात पर भी रोक है। उल्लंघन करने पर एक हजार रुपए से 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। गौतम बुद्ध नगर में निर्देशों का उल्लंघन करने पर सितंबर 2016 से अगस्त 2019 तक कुल 30.45 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अनिल कुमार सिंह के मुताबिक मल्टी लेयर पैकिंग के तहत शहर की 4 इकाइयों को नए प्रावधानों के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मंजूरी मिली है। अन्य करीब दो दर्जन से ज्यादा इकाइयों के प्रस्ताव मंजूरी के लिए विचाराधीन हैं।

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