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राजपाट: मिजाज के पारखी

राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी अश्विनी भगत को हटा दिया। आरोप था कि वे सरकार में बैठे एक आला अफसर के मनमाफिक फैसले कर रहे थे। जिसकी शिकायत केवल कांग्रेस पार्टी ने ही नहीं भगत के मातहत अफसरों ने भी आयोग के मुख्यालय तक पहुंचाई थी।

Author September 8, 2018 3:25 AM
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया। Express Photo by Rohit Jain Paras

सियासी तापमान को नापने का उत्तम थर्मामीटर मानी जाती है नौकरशाही। राजस्थान में विधानसभा चुनाव अब करीब ही हैं। लिहाजा भाईलोग नौकरशाही के रवैए से भी कर रहे हैं सियासी तस्वीर का गुणा-भाग। नौकरशाह अब रवैया बदल रहे हैं। वैसे भी रंग बदलने में इनके सामने गिरगिट तक शरमा जाए। जो सत्ता के नजदीक थे वे भी सत्ताधारियों से दूरी बनाने लगे हैं। जैसे हवा का रुख भांप लिया हो। राजस्थान में तो यूं भी एक स्थापित रिवाज सा है हर बार सरकार बदल जाने का। खासकर जमीन, ठेकेदारी और रंगदारी से जुड़े काम की सिफारिश अब अनसुनी ही की जा रही है। ऊपर से वसुंधरा सरकार को चुनाव आयोग ने अलग झटका दे दिया।

राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी अश्विनी भगत को हटा दिया। आरोप था कि वे सरकार में बैठे एक आला अफसर के मनमाफिक फैसले कर रहे थे। जिसकी शिकायत केवल कांग्रेस पार्टी ने ही नहीं भगत के मातहत अफसरों ने भी आयोग के मुख्यालय तक पहुंचाई थी। मतदाता सूचियों में गड़बड़ी की शिकायत उन्हें महंगी पड़ गई। उनकी जगह आए आनंद कुमार तटस्थ भाव से दे रहे हैं अपने काम को अंजाम। भगत का हटना जिलों में तैनात कलक्टरों को हक्का-बक्का कर गया। ज्यादातर सिफारिशी ठहरे। चुनाव की तारीखों का एलान होते ही वे चुनाव आयोग के मातहत आ जाएंगे। आयोग के निर्देशों पर अमल करना मजबूरी होगी।

वे आकाओं को आयोग के चाबुक का हवाला देते हैं तो आकाओं का भी अब उन पर भरोसा कम हुआ है। रिटायर अफसरों में भी ज्यादा चाहत कांग्रेसी टिकट की दिख रही है। यहां तक कि कांग्रेस के टिकट की गारंटी हो तो कई अफसर वक्त से पहले नौकरी छोड़ने को तैयार हैं। सूबे में आइएएस-आइपीएस अफसरों को सियासत का रोग पुराना है। तभी तो भाजपा के मौजूदा सांसदों में चार पहले अफसर ही थे। अर्जुन मेघवाल और सीआर चौधरी तो मोदी सरकार में मंत्री बने बैठे हैं। रही सत्तारूढ़ पार्टी को झटका मिलने की बात तो हाई कोर्ट ने बुधवार को फिर नया फरमान जारी कर दिया कि मुख्यमंत्री की गौरव यात्रा के दौरान कोई सरकारी फरमान जारी नहीं होगा। यानी अभी से कतर दिए उनके अधिकार।

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