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राजपाट : अग्निपरीक्षा

मोदी की आंधी और वोट के बंटवारे के चलते भाजपा को 22, लोजपा को छह और रालोसपा को तीन सीटों पर कामयाबी मिली थी। और पीछे जाएं तो 2009 का लोकसभा चुनाव है। नीतीश उसी को आधार बनाना चाहते हैं। तब वे भाजपा के साथ गठबंधन में थे। चालीस में से 25 सीटें जद (एकी) और 15 भाजपा को मिली थीं।

Author June 9, 2018 4:16 AM
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

नीतीश कुमार अपनी परेशानी चाह कर भी छिपा नहीं पा रहे। बिहार के मुख्यमंत्री को अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की चिंता सताने लगी है। जैसे-जैसे समय करीब आ रहा है, जद (एकी) के मुखिया को डर सताने लगा है कि उन्हें कितनी सीटें देगी भाजपा। पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त वे अलग थे। हालांकि सत्ता पर उन्हीं का कब्जा था। इससे उन्हें खासा नुकसान भी हुआ था। दरअसल लोकसभा का चुनाव राजद ने कांग्रेस से मिलकर लड़ा था। एक तरह से मुकाबला सीधा न रहकर तिकोना हो गया था। भाजपा ने चालीस में से 29 सीटें खुद लड़ी थी, सात राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी को दी थी और चार उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा को।

मोदी की आंधी और वोट के बंटवारे के चलते भाजपा को 22, लोजपा को छह और रालोसपा को तीन सीटों पर कामयाबी मिली थी। और पीछे जाएं तो 2009 का लोकसभा चुनाव है। नीतीश उसी को आधार बनाना चाहते हैं। तब वे भाजपा के साथ गठबंधन में थे। चालीस में से 25 सीटें जद (एकी) और 15 भाजपा को मिली थीं। अब दुविधा यही है कि राजग में भाजपा, लोजपा और रालोसपा के रहते उन्हें ज्यादा सीटें मिल ही नहीं पाएंगी। पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजे को आधार बना कर करना चाहेगी भाजपा तो सहयोगियों के बीच बंटवारा। जद(एकी) को तो बस दो ही सीटें मिल पाईं थी। सीटों के बंटवारे को लेकर अनबन हुई तो नीतीश किस राह चलेंगे, यह अभी तय नहीं है। इसी हफ्ते पटना में उनकी पार्टी की बैठक हुई तो दो एलान कर दिए गए।

एक- जद (एकी) को गठबंधन में पच्चीस सीटें चाहिए। दूसरे बिहार में राजग का चेहरा नीतीश होंगे। यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं। इस शर्त को भाजपा कैसे मानेगी, कहना मुुश्किल है। नीतीश जानते हैं कि उनके अड़ने पर भाजपा उनसे नाता भी तोड़ सकती है, वह पासवान और कुशवाहा को लेकर इठलाती जो है। लिहाजा नीतीश पहले से ही जताने लगे हैं कि वे भाजपा की गोद में नहीं हैं। भाजपा के साथ रहने में उन्हें घाटे का अंदेशा भी कम नहीं है। उस सूरत में मुसलमान वोट बैंक उनसे पूरी तरह छिटक सकता है। सो, दुधारी तलवार भांज रहे हैं ताकि अपनी राह को आसान बना सकें।

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