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राजपाट : यथास्थिति बरकरार

सूबेदार के बिना ही बुला ली मोर्चे के पदाधिकारियों की बैठक। अन्यथा वसुंधरा खेमा तो अब भी पूर्व सूबेदार अशोक परनामी को ही बनाए था पार्टी का सूबेदार। राजस्थान में भाजपा के भीतर सब कुछ तो कभी भी ठीक नहीं रहा।

Author June 23, 2018 2:30 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

राजस्थान में भाजपा के संगठन का बुरा हाल है। दो महीने से कोई सूबेदार नहीं। कौन हो नया सूबेदार, इस चक्कर में जंग छिड़ी है। तो भला पार्टी की सक्रियता कहां दिखे। आलाकमान तो गजेंद्र सिंह शेखावत के नाम पर ही अड़े हैं। पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे उनके नाम पर कतई तैयार नहीं। कर्नाटक चुनाव के बाद का भरोसा दिया था संकट के समाधान के लिए। लेकिन कुछ नहीं हुआ। सो महामंत्री संगठन चंद्रशेखर को सक्रिय होना पड़ा है। बकरे की मां खैर भी कब तक मनाएगी। आखिर एक साल हो चुका है यूपी से जयपुर आए उन्हें।

सूबेदार के बिना ही बुला ली मोर्चे के पदाधिकारियों की बैठक। अन्यथा वसुंधरा खेमा तो अब भी पूर्व सूबेदार अशोक परनामी को ही बनाए था पार्टी का सूबेदार। राजस्थान में भाजपा के भीतर सब कुछ तो कभी भी ठीक नहीं रहा। मसलन संगठन में आरएसएस के प्रचारक की तैनाती ही नहीं रही पूरे नौ साल। गैर संघी नेताओं को तो कतई नहीं भाते चंद्रशेखर। लेकिन कुछ कहने की हिम्मत कहां है।

बूथ के प्रबंधन का आलाकमान का प्रिय विषय चंद्रशेखर ने सबसे पहले उठाया है। बूथ समितियों के गठन में जो गुल गुपाड़ा हो चुका है, उससे चौकस हैं चंद्रशेखर। सूबेदार जैसा बर्ताव कर रहे हैं। बैठकों की अध्यक्षता से लेकर बूथ समितियों के सत्यापन तक की जिम्मेदारी है। अजमेर और अलवर लोकसभा उपचुनाव के नतीजों ने अशोक परनामी के बूथ प्रबंधन के दावों की पोल खोल दी थी। चंद्रशेखर को राष्ट्रीय संगठन सचिव वी सतीश से भी मदद मिल रही है। चुनावी नतीजे कुछ भी रहें पर बूथ प्रबंधन की कसौटी पर खरे उतरकर आलाकमान की आंखों का तारा बने रहना कौन नहीं चाहेगा।

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