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राजपाट : मुकद्दर की सिकंदर

कोलकाता हाई कोर्ट के मुआवजे के आदेश से ही जोड़ कर देख रहे हैं भाई लोग चुप्पी की वजह को। मरने वालों की संख्या कम बताना मजबूरी ठहरी। रही चुनाव आयोग की बात तो उसे ही अपनी साख की चिंता सता रही होगी।

हर छोटे-बड़े मुद्दे पर नुक्ताचीनी करने वाली दीदी अब खामोश हैं। पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के मतदान के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। बीस से ज्यादा लोग मर गए और दर्जनों घायल हो गए। ममता बनर्जी ने फिर भी मुंह नहीं खोला। विपक्षी जरूर सरकार पर वार करते दिखे। हां, ममता की पार्टी ने जरूर सफाई दी कि महज छह लोगों की ही हुई है चुनावी हिंसा के चलते मौत। खुद चुनाव आयोग के सचिव नीलांजन शांडिल्य ने ही कह दिया कि बाकी लोगों की मौत दूसरे कारणों से हुई।

बेशक इन कारणों पर रोशनी वे नहीं डाल पाए। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी और बड़े उस्ताद निकले। फरमाया कि मरने वाले सभी छह लोग उनकी पार्टी के थे। पर लोगों को ममता की चुप्पी पर हैरानी है। हालांकि कोलकाता हाई कोर्ट के मुआवजे के आदेश से ही जोड़ कर देख रहे हैं भाई लोग चुप्पी की वजह को। मरने वालों की संख्या कम बताना मजबूरी ठहरी। रही चुनाव आयोग की बात तो उसे ही अपनी साख की चिंता सता रही होगी। तभी तो इस बार की हिंसा को यह कह कर परोक्ष रूप से जायज ठहराने की कोशिश की है कि पिछले चुनाव के वक्त तो ज्यादा लोग मरे थे।

तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी को तो हर विवाद में माकपा की याद आ जाती है। इस बार भी दलील दे डाली कि माकपा राज में तो चुनाव के दौरान सैकड़ों लोगों की जान गई थी। जो भी हो चुनावी नतीजों ने तो गुरुवार को फिर साबित कर दिया कि पश्चिम बंगाल में अभी कोई चुनौती नहीं दीदी के सामने।